बागपत, 06 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) पिछले नौ दिन से कार्य बहिष्कार कर लखनऊ में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सीएचओ के कार्य बहिष्कार का असर अब जिले के गांवों में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। इन केंद्रों पर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों को सामान्य बीमारी और प्राथमिक उपचार के लिए भी दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों अथवा निजी चिकित्सकों का रुख करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को गांव के नजदीक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन की ओर से अधिकांश बड़े गांवों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए गए हैं। इन केंद्रों पर ग्रामीणों की प्राथमिक जांच, सामान्य बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सीएचओ को दी गई है। लेकिन जिले के सीएचओ के हड़ताल पर जाने से इन केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन प्रभावित हो गया है।
नौ दिन से कार्य बहिष्कार
सीएचओ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले नौ दिनों से कार्य बहिष्कार कर लखनऊ में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले के सीएचओ के आंदोलन में शामिल होने के कारण गांवों में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर नियमित रूप से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
कई ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण उन्हें उम्मीद रहती है कि छोटी-मोटी बीमारी होने पर नजदीक ही प्राथमिक उपचार मिल जाएगा। पहले सामान्य बुखार, सर्दी-जुकाम, रक्तचाप, शुगर की जांच और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए ग्रामीण इन केंद्रों पर पहुंच जाते थे। अब सीएचओ के कार्य बहिष्कार के कारण उन्हें अन्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
सामान्य बीमारी के लिए भी भटक रहे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होने से बुजुर्गों, महिलाओं और ऐसे लोगों को काफी सुविधा होती थी, जिन्हें छोटी बीमारी के लिए दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक जाना मुश्किल होता है। सीएचओ के नहीं होने से इन लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
कई ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है। इससे उनका अतिरिक्त समय और पैसा खर्च हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सीएचओ की हड़ताल लंबी चलती है तो स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर और बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित करनी चाहिए।
अप्रशिक्षित निजी चिकित्सकों की ओर बढ़ रहा रुझान
गांवों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का एक असर यह भी देखने को मिल रहा है कि सामान्य बीमारी से परेशान लोग स्थानीय स्तर पर उपलब्ध निजी चिकित्सकों का सहारा लेने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कई गांवों में पर्याप्त चिकित्सकीय प्रशिक्षण या आवश्यक योग्यता के बिना उपचार करने वाले लोग भी सक्रिय हैं।
सरकारी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ऐसे लोगों के पास मरीजों के पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारू संचालन होने से लोगों को गलत या अधूरे उपचार से बचाया जा सकता है।
ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने उठाई मांग
सीएचओ की हड़ताल के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से गांवों में वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि जब तक सीएचओ का आंदोलन समाप्त नहीं होता, तब तक स्वास्थ्य विभाग को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर वैकल्पिक कर्मचारी अथवा स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे ग्रामीणों को कम से कम प्राथमिक उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श गांव के स्तर पर ही मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के सामने बढ़ी चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखना स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना का उद्देश्य ही ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में लंबे समय तक सीएचओ के कार्य बहिष्कार से इन केंद्रों की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सीएचओ की मांगों और आंदोलन का समाधान शासन स्तर पर किया जाना चाहिए, लेकिन जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक ग्रामीणों की स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करना भी जरूरी है।
ग्रामीणों ने जल्द समाधान की मांग की
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और शासन से मांग की है कि सीएचओ की हड़ताल के कारण गांवों में उत्पन्न स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या का तत्काल संज्ञान लिया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कहा कि यदि गांवों में वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था शुरू कर दी जाती है तो सीएचओ के आंदोलन के दौरान भी ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विभाग से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर जल्द वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल सीएचओ के कार्य बहिष्कार के चलते जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित बनी हुई हैं। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि शासन स्तर से सीएचओ की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग क्या वैकल्पिक कदम उठाता है।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

