मथुरा,25 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग की प्रस्तावित कार्ययोजना, किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती के विस्तार तथा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कृषि विभाग की योजनाओं के अंतर्गत होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कृषि प्रदर्शनियों, फसल प्रदर्शनों, तकनीकी प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों में हर बार नए किसानों का चयन किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ कुछ सीमित किसानों तक ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि जिले के अधिक से अधिक कृषकों को सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें उनका व्यावहारिक लाभ भी मिलना चाहिए। इसके लिए गांव स्तर तक योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने और पात्र किसानों को चिह्नित कर उन्हें कार्यक्रमों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
हर बार नए किसानों को मिले प्रशिक्षण का अवसर
जिलाधिकारी ने कृषि अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रमों में एक ही किसानों को बार-बार शामिल करने के बजाय नए किसानों को अवसर दिया जाए। इससे जिले में कृषि संबंधी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक संख्या में किसानों तक पहुंचाई जा सकेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों के चयन में पारदर्शिता रखी जाए और अलग-अलग क्षेत्रों तथा गांवों के किसानों को योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाए। कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए किसानों को केवल योजनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें तकनीक के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित
बैठक में जिलाधिकारी ने प्राकृतिक खेती पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में जानकारी दी जाए और उन्हें रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों के बारे में बताया जाना चाहिए, जिनसे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। कृषि विभाग के प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रमों में प्राकृतिक खेती से जुड़े मॉडल तथा तकनीकों को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए।
पराली जलाने से बचें किसान
बैठक के दौरान जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने किसानों से धान की पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में जलाने से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव खेत की मिट्टी पर भी पड़ता है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं और मिट्टी की उर्वरता में कमी आ सकती है। इसके अलावा फसल अवशेषों के जलने से धुआं आसपास के वातावरण में फैलता है, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।
जिलाधिकारी ने किसानों से कहा कि पराली को समस्या समझकर जलाने के बजाय उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के विकल्पों को अपनाया जाए। कृषि विभाग किसानों को उपलब्ध तकनीकों और संसाधनों की जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि फसल अवशेषों का उपयोग उचित तरीके से किया जा सके।
सड़क दुर्घटनाओं और आग का भी रहता है खतरा
डीएम ने कहा कि खेतों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं आसपास के क्षेत्रों में फैल सकता है। सड़क किनारे खेतों में आग लगाए जाने की स्थिति में धुआं सड़क तक पहुंचने से दृश्यता प्रभावित होने का खतरा रहता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
इसके अलावा खेतों में लगाई गई आग तेज हवा के दौरान आसपास के खेतों तक फैल सकती है और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए जागरूक करना जरूरी है।
आत्मा योजना के तहत आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण
बैठक में जिलाधिकारी ने कृषि विभाग की आत्मा योजना के अंतर्गत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को खेती की नई तकनीकों, बेहतर कृषि पद्धतियों और तकनीकी जानकारी से लगातार जोड़ा जाना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देने के साथ उन्हें खेतों में उनके प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया। कृषि विभाग को निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए।
दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस के तहत दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को दलहन फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें आवश्यक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, उन्नत तकनीक और उत्पादन बढ़ाने के उपायों के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि योजना के निर्धारित उद्देश्यों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।
खाद्य सुरक्षा और पोषण पर भी ध्यान
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की भी बैठक में समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि की उत्पादकता को बनाए रखना भी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी दी जाए, जिनसे मिट्टी की उर्वरता में सुधार हो, उत्पादन क्षमता बढ़े और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। कृषि योजनाओं का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी कृषि व्यवस्था की ओर ले जाना भी होना चाहिए।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
बैठक में किसानों की आय में वृद्धि को कृषि योजनाओं का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और यदि किसी स्तर पर किसानों को योजना का लाभ मिलने में समस्या आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंच सके।
योजनाओं का गांव स्तर तक हो प्रचार-प्रसार
डीएम ने कहा कि कई बार किसान सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में उनका लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए कृषि विभाग को गांव स्तर पर जागरूकता गतिविधियां बढ़ानी चाहिए। किसानों को योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सरल तरीके से दी जानी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का प्रचार केवल कार्यालय स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जाए।
स्वयं सहायता समूहों की भी भागीदारी
बैठक में स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों की मौजूदगी भी रही। कृषि क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए किसानों और समूहों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे कृषि आधारित गतिविधियों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
बैठक में अधिकारियों और कृषकों के बीच योजनाओं से संबंधित विषयों पर चर्चा भी हुई। किसानों की आवश्यकताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़ी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों को दिए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन स्तर से संचालित कृषि योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, दलहन उत्पादन और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे विषयों पर भी लगातार जागरूक किया जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता, अपर जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी धनंजय जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक तथा स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ आगामी वित्तीय वर्ष के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और अधिक से अधिक किसानों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी सुविधाओं से जोड़ा जाए।

