नई दिल्ली, 03 जून 2026 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 6 बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। इनमें 2 बड़े फैसले अहम हैं। सबसे बड़ा फैसला एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) को लेकर है। सरकार के इस फैसले से पश्चिम एशिया संकट के एविएशन सेक्टर पर पड़ने वाले असर को कम किया जाएगा।
एटीएफ समेत अन्य एलानों को लेकर सरकार ने कुल 39 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान रखा है। वहीं, मोदी कैबिनेट ने दिल्ली में पुराने ट्रक और बसों को चलन से बाहर करने और कई बड़े हाइवे प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है।
*एटीएफ पर सरकार ने क्या फैसला लिया?*
कैबिनेट ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एकमुश्त बजटीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। इसके तहत यह मदद 10,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी और इसका मकसद शेड्यूल्ड भारतीय एयरलाइंस को उनके घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखने में सहायता प्रदान करना है। दरअसल, पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव हुए हैं, इसलिए एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर बनाए रखने हेतु यह मदद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
*दिल्ली में वाहनों पर क्या फैसला लिया?*
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी है। यह योजना दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कार्यान्वित की जाएगी। इस योजना के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 5,041 करोड़ रुपये और भागीदार राज्यों द्वारा कर छूट के रूप में अनुमानित 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों के मालिकों को प्रोत्साहित करना है जो बीएस-IV या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं, ताकि वे उन्हें बीएस-VI या उससे भी सख्त उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाले वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से बदल सकें। केंद्र सरकार पांच साल के लिए लोन पर 5% ब्याज सब्सिडी, वाहन की श्रेणी के आधार पर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या जमा प्रमाणपत्र के व्यापार के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी।
*नए कोस्टल हाईवे का निर्माण - 8300.79 करोड़*
कैबिनेट समिति ने आज ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक एक नए तटीय राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह निर्माण 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' के तहत दो पैकेजों में किया जाएगा। इसकी कुल लंबाई 160.18 किलोमीटर और कुल पूंजीगत लागत 8300.79 करोड़ रुपये होगी।
*तेलंगाना में फोर-लेन सड़कें बढ़ाएंगी औद्योगिक रफ्तार*
दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल तेलंगाना में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी बड़ा निवेश किया गया है. सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-63 और राष्ट्रीय राजमार्ग-563 के कई हिस्सों को चार लेन में बदलने की मंजूरी दी है.
7,597 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य औद्योगिक केंद्रों और व्यापारिक मार्गों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है. बेहतर सड़कें परिवहन समय को कम करेंगी, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत घटेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
*मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग होगा आधुनिक*
देश के भौगोलिक केंद्र माने जाने वाले मध्य प्रदेश में भी सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग 347बी के अपग्रेडेशन के लिए 4,415 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इस परियोजना से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा और माल परिवहन अधिक सुविधाजनक बनेगा. बेहतर सड़क नेटवर्क का सीधा लाभ कृषि, उद्योग और स्थानीय व्यापार को मिलने की उम्मीद है.
*बिहार में चार लेन सड़क से बढ़ेगा विकास*
बिहार में बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने के लिए खगड़िया से पूर्णिया तक राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और राष्ट्रीय राजमार्ग-231 के हिस्सों को चार लेन में विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली है. करीब 3,936 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना उत्तर-पूर्वी बिहार के कई जिलों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगी. इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी सफर अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगा.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

