मथुरा, 12 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। नगर निगम मथुरा-वृन्दावन की ओर से कांशीराम कॉलोनी के गिरासू और खतरनाक भवनों को लेकर जारी किए गए नोटिस के बाद कॉलोनी के निवासियों में आक्रोश फैल गया है। निगम की टीम ने कई भवनों पर नोटिस चस्पा करते हुए भवन स्वामियों और निवासियों को 15 दिनों के भीतर खतरनाक हिस्सों को हटाने, आवश्यक मरम्मत कराने तथा स्थिति अधिक गंभीर होने पर भवन खाली करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में कॉलोनी के निवासी सड़क पर उतर आए और जिला प्रशासन तथा नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि कांशीराम कॉलोनी में रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है। ऐसे में हजारों रुपये खर्च कर मकानों की मरम्मत कराना उनके लिए संभव नहीं है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि मकान सरकारी योजना के तहत बनाए गए हैं और समय के साथ जर्जर हो गए हैं तो उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग और प्रशासन को उठानी चाहिए।
नोटिस के बाद परिवारों में चिंता
नगर निगम की कार्रवाई के बाद कॉलोनी में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि मकानों में कहीं दीवारों पर दरारें हैं तो कहीं प्लास्टर और अन्य हिस्से कमजोर हो चुके हैं। बरसात के मौसम में जर्जर भवनों को लेकर पहले से ही परिवारों में डर बना हुआ है। अब निगम के नोटिस के बाद उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि कहीं मकान खाली कराने की कार्रवाई न शुरू कर दी जाए।
निवासियों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। यदि उन्हें आवास खाली करने के लिए मजबूर किया गया तो वे परिवार और बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। कई परिवारों ने प्रशासन से मांग की कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले मौके पर भवनों की तकनीकी जांच कराई जाए और वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लिया जाए।
महिलाओं ने जताई नाराजगी
कॉलोनी की निवासी अनीता मिश्रा और वंदना ने कहा कि महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। राशन, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी और अन्य जरूरी खर्चों के बाद मकान की बड़ी मरम्मत कराने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को मकान खतरनाक नजर आ रहे हैं तो सरकार को इनकी मरम्मत करानी चाहिए।
महिलाओं ने कहा कि गरीब परिवारों को नोटिस देकर जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हुआ जा सकता। प्रशासन को पहले यह देखना चाहिए कि इन मकानों में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति क्या है और उनके पास कोई दूसरा आवास है या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मकान खाली कराने की कार्रवाई की गई तो परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
सरकार से मरम्मत या वैकल्पिक आवास की मांग
प्रभावित परिवारों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि कांशीराम कॉलोनी के जर्जर आवासों का सर्वे कराया जाए। जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, उनकी मरम्मत सरकारी स्तर पर कराई जाए। वहीं जिन भवनों की हालत इतनी खराब है कि उनमें रहना सुरक्षित नहीं है, वहां रहने वाले परिवारों को पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
निवासियों का कहना है कि वे कार्रवाई का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके सामने रहने की समस्या है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है तो समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। केवल नोटिस चस्पा करने से समस्या समाप्त नहीं होगी।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
कॉलोनी में बड़ी संख्या में परिवारों के साथ छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी रहते हैं। निवासियों का कहना है कि जर्जर भवनों की स्थिति निश्चित रूप से गंभीर है, लेकिन इसका समाधान लोगों को बेघर करना नहीं हो सकता। यदि भवन खाली कराने की स्थिति बनती है तो सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ेगी।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी निर्णय से पहले कॉलोनी में रहने वाले प्रत्येक परिवार की स्थिति का सर्वे कराया जाए। इसके बाद भवनवार रिपोर्ट तैयार कर यह तय किया जाए कि किस मकान की मरम्मत संभव है और किसे खाली कराना जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान उठी आवाज
नोटिस की कार्रवाई के विरोध में निवासियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से इन आवासों में रह रहे हैं और अब अचानक मरम्मत तथा भवन खाली करने का नोटिस मिलने से उनके सामने परेशानी खड़ी हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि नोटिस की समयसीमा को लेकर भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए और पहले प्रभावित परिवारों से बातचीत की जाए।
निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी समस्या सुनने के बजाय सीधे कार्रवाई करता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। लोगों ने कहा कि वे अपने परिवारों को लेकर सड़क पर आने को मजबूर नहीं होना चाहते और सरकार से उम्मीद है कि उनकी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जाएगा।
बोले निवासी- कार्रवाई से पहले हो स्थायी समाधान
कॉलोनी के लोगों ने कहा कि वे नगर निगम और प्रशासन के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें उचित समाधान चाहिए। यदि कोई भवन वास्तव में रहने योग्य नहीं है तो उसकी जगह सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए। यदि भवन की मरम्मत से उसे सुरक्षित बनाया जा सकता है तो सरकार की ओर से मरम्मत कराई जाए।
निवासियों ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर लाखों रुपये की मरम्मत का बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि मौके पर अधिकारियों की टीम भेजकर स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और लोगों की समस्याएं सुनी जाएं।
प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की उम्मीद
कांशीराम कॉलोनी में नोटिस को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद अब प्रभावित परिवार जिला प्रशासन की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोगों का कहना है कि वे किसी विवाद या टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रहने की व्यवस्था चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकार गरीब परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने की योजनाएं चला रही है, ऐसे में पुराने सरकारी आवासों में रहने वाले लोगों को बेघर करने के बजाय उनके आवासों को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम होना चाहिए।
निवासियों ने प्रशासन से जल्द बैठक कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक मकान खाली कराने जैसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मकान टूटने या खाली होने से पहले उनके परिवारों के लिए सुरक्षित छत की व्यवस्था करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

