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गोवर्धन की मानसी गंगा में डूबा मासूम, धार्मिक यात्रा मातम में बदली

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कुछ लोगों ने पानी में छलांग लगाई जबकि अन्य लोगों ने रस्सी और अन्य साधनों की मदद से खोजबीन शुरू की, काफी प्रयासों के बाद बालक को पानी से बाहर निकाला गया, बाहर निकालते समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी।

मथुरा, 29 जून 2026 (यूटीएन)। गोवर्धन स्थित पवित्र मानसी गंगा में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। करौली निवासी 11 वर्षीय अविनाश की स्नान के दौरान डूबने से हुई मौत ने उसके परिवार के साथ-साथ वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भी गहरे सदमे में डाल दिया। जिस धार्मिक यात्रा को लेकर परिवार और साथी उत्साहित थे, वह देखते ही देखते मातम में बदल गई। जानकारी के अनुसार अविनाश अपने दोस्तों और अन्य श्रद्धालुओं के साथ गोवर्धन परिक्रमा करने आया था। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद सभी लोग मानसी गंगा घाट पर पहुंचे, जहां श्रद्धालु धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अविनाश भी पानी में उतरा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वह खेलते-खेलते या स्नान करते हुए घाट के उस हिस्से में पहुंच गया जहां पानी अपेक्षाकृत अधिक गहरा था। गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण वह अचानक डूबने लगा। जब तक आसपास मौजूद लोग स्थिति को समझ पाते, तब तक बालक पानी में कई बार ऊपर-नीचे हो चुका था। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय युवकों ने बिना समय गंवाए उसे बचाने का प्रयास शुरू कर दिया।

कुछ लोगों ने पानी में छलांग लगाई जबकि अन्य लोगों ने रस्सी और अन्य साधनों की मदद से खोजबीन शुरू की। काफी प्रयासों के बाद बालक को पानी से बाहर निकाला गया। बाहर निकालते समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी। मौके पर मौजूद लोगों ने प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के इस ऐलान के साथ ही परिजनों और साथ आए लोगों में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल परिसर का माहौल भी गमगीन हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला डूबने से मौत का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस ने घटना के संबंध में परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए हैं।

अविनाश की मौत की खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि कुछ घंटे पहले तक हंसता-खेलता उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी और रिश्तेदार लगातार उन्हें ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसी गंगा में पहले भी कई बार डूबने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच छोटे बच्चों पर लगातार निगरानी रखना जरूरी होता है। कई बार बच्चे उत्साह में गहरे पानी की ओर बढ़ जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि घाटों पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाने चाहिए। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मानसी गंगा के विभिन्न घाटों पर गहराई संबंधी चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक क्षेत्रों को बैरिकेडिंग कर अलग किया जाए तथा नियमित रूप से गोताखोरों और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा सीसीटीवी निगरानी और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार सावधान किया जाना चाहिए।

मानसी गंगा गोवर्धन की प्रमुख धार्मिक स्थली है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और अवकाश के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है। प्रशासन ने घटना के बाद श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बच्चों को अकेले पानी में न उतरने दें, स्नान के दौरान सतर्क रहें और निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही स्नान करें। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। अविनाश की असमय मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। घाट पर मौजूद लोगों की आंखों के सामने हुई यह घटना लंबे समय तक उनके जेहन में बनी रहेगी। एक मासूम की मौत ने न केवल उसके परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि हर उस व्यक्ति को भावुक कर दिया जिसने इस घटना के बारे में सुना।







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