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एमवीडीए की बड़ी कार्रवाई, गोवर्धन में अवैध 'हरेकृष्णा रेजिडेंसी' कॉलोनी सील

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अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गोवर्धन और उसके आसपास के क्षेत्रों में बिना अनुमति कृषि भूमि पर अवैध रूप से प्लॉटिंग कर लोगों को भूखंड बेचे जा रहे हैं।

मथुरा, 16 जुलाई 2026 (यूटीएन)। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गुरुवार को गोवर्धन क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए 'हरेकृष्णा रेजिडेंसी' नाम से विकसित की जा रही एक अवैध कॉलोनी को सील कर दिया। प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया और नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की। एमवीडीए का कहना है कि कॉलोनी बिना स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक वैधानिक अनुमति के विकसित की जा रही थी, जो विकास प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन है।

प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने गोवर्धन के जतीपुरा परिक्रमा मार्ग स्थित केला देवी मंदिर के समीप विकसित की जा रही कॉलोनी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कॉलोनाइजर से परियोजना से संबंधित स्वीकृत लेआउट, मानचित्र, विकास अनुमति और अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन मौके पर कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसके बाद एमवीडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए कॉलोनी को सील कर दिया और निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गोवर्धन और उसके आसपास के क्षेत्रों में बिना अनुमति कृषि भूमि पर अवैध रूप से प्लॉटिंग कर लोगों को भूखंड बेचे जा रहे हैं। शिकायतों के सत्यापन के बाद प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें अनियमितताएं सामने आने पर यह कार्रवाई की गई।

एमवीडीए अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार न केवल विकास योजनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य में मूलभूत सुविधाओं, सड़क, जल निकासी, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी व्यवस्थाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए बिना अनुमति विकसित की जा रही किसी भी कॉलोनी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में गंभीर कानूनी और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी कॉलोनियों में सड़क, सीवर, जल निकासी, पार्क, स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विकास सुनिश्चित नहीं होता। कई मामलों में खरीदार वर्षों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हैं और बाद में संपत्ति संबंधी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं।

एमवीडीए ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट, मकान या अन्य संपत्ति खरीदने से पहले संबंधित परियोजना का स्वीकृत मानचित्र, लेआउट प्लान, विकास अनुमति, भूमि की वैधानिक स्थिति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि किसी परियोजना की वैधता को लेकर संदेह हो तो प्राधिकरण कार्यालय से जानकारी प्राप्त करने के बाद ही निवेश करें।

अधिकारियों ने कहा कि केवल आकर्षक विज्ञापन, कम कीमत या आसान किस्तों के लालच में आकर संपत्ति खरीदना उचित नहीं है। बिना अनुमति विकसित की गई कॉलोनियों में निवेश करने पर खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और भविष्य में निर्माण की अनुमति मिलने में भी कठिनाई आ सकती है।

एमवीडीए के अनुसार अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जिन कॉलोनाइजरों द्वारा बिना अनुमति भूमि का विकास किया जा रहा है, उनके खिलाफ नियमानुसार सीलिंग, ध्वस्तीकरण और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

प्राधिकरण ने यह भी कहा कि विकास कार्यों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने और शहर की मास्टर प्लान व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए सभी निर्माण कार्यों का नियमानुसार स्वीकृत होना आवश्यक है। अवैध प्लॉटिंग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे भविष्य में शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि एमवीडीए की इस कार्रवाई से अवैध कॉलोनियां विकसित करने वालों में स्पष्ट संदेश जाएगा कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या निर्माण गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं कई लोगों ने मांग की है कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह नियमित निरीक्षण कर अवैध निर्माण और कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

एमवीडीए ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनी, अवैध प्लॉटिंग या अनधिकृत निर्माण की जानकारी मिले तो इसकी सूचना प्राधिकरण को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और लोगों को किसी प्रकार की धोखाधड़ी या आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।







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