नई दिल्ली,03 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता को लेकर देशभर में चलाए जा रहे अभियानों के बीच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में भी व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। दो अक्तूबर को आयोजित स्वच्छ भारत दिवस के दौरान एम्स के फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, कर्मचारियों और सैनिटेशन स्टाफ ने सफाई अभियान में सक्रिय भागीदारी की। डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हाथों में झाड़ू थामी और सड़क किनारे तथा आसपास के क्षेत्रों में जमा कचरे को हटाया।
अभियान की शुरुआत एम्स के गेट नंबर-6 से की गई और सफाई दल गेट नंबर-2 तक पहुंचा। इस दौरान रिंग रोड और श्री अरबिंदो मार्ग के आसपास के हिस्सों की सफाई की गई। अभियान के मार्ग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नेशनल मेडिकल लाइब्रेरी और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के आसपास के क्षेत्र भी शामिल रहे।
एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने स्वयं अभियान की अगुवाई की और मौके पर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने अभियान में शामिल डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य सदस्यों से सफाई व्यवस्था को लेकर जानकारी ली तथा साफ-सफाई को नियमित गतिविधि के रूप में जारी रखने पर जोर दिया।
800 किलो से अधिक कचरा निकला
स्वच्छता अभियान के दौरान सड़क और उसके आसपास के इलाकों से बड़ी मात्रा में कचरा एकत्र किया गया। अभियान में 800 किलोग्राम से अधिक कचरा निकाला गया। एकत्र किए गए कचरे को मौके पर ही अलग-अलग श्रेणियों में छांटने की प्रक्रिया भी की गई, ताकि उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
सफाई अभियान के दौरान प्लास्टिक, कागज, पैकेजिंग सामग्री और अन्य प्रकार का कचरा अलग किया गया। सफाई से पहले जहां सड़क किनारे जगह-जगह कचरा दिखाई दे रहा था, वहीं अभियान के बाद आसपास का क्षेत्र काफी साफ नजर आया। इस दौरान लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकने और कूड़ेदान का इस्तेमाल करने का संदेश भी दिया गया।
डॉक्टरों ने दिया स्वच्छता का संदेश
एम्स जैसे देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान के डॉक्टरों और कर्मचारियों के सड़क पर उतरकर सफाई अभियान में भाग लेने से स्वच्छता को लेकर सकारात्मक संदेश गया। अभियान में शामिल लोगों ने केवल सफाई करने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि स्वच्छ वातावरण का सीधा संबंध स्वस्थ जीवन से है। अस्पताल और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए स्वच्छता का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि साफ-सफाई संक्रमण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
घर-घर पहुंची एम्स की टीम
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जागरूकता कार्यक्रम भी रहा। सफाई अभियान पूरा होने के बाद एम्स की छोटी-छोटी टीमें आसपास के आवासीय क्षेत्रों में पहुंचीं। टीम के सदस्यों ने प्लाकार्ड, पर्चे और कूड़ेदान बैग के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
टीमों ने लोगों से घरों में निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की अपील की। इसके साथ ही कचरे को खुले में न फेंकने, सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करने और निर्धारित स्थान पर कचरा डालने के बारे में जानकारी दी गई।
जागरूकता टीमों ने लोगों से यह भी अपील की कि वे अपने घर के साथ-साथ आसपास की गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में सहयोग करें। लोगों को समझाया गया कि केवल सफाईकर्मियों के भरोसे स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो सकता, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
नुक्कड़ नाटक के जरिए समझाया स्वच्छता का महत्व
स्वच्छता अभियान के दौरान जागरूकता का संदेश देने के लिए नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया। एम्स के सैनिटेशन स्टाफ की ओर से जेएलएन ऑडिटोरियम के सामने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।
नाटक के माध्यम से रोजमर्रा की जिंदगी में स्वच्छता की भूमिका, खुले में कचरा फेंकने से होने वाली समस्याओं और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने आम लोगों की दिनचर्या से जुड़े उदाहरणों के जरिए यह समझाने का प्रयास किया कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके स्वच्छ वातावरण तैयार किया जा सकता है।
नुक्कड़ नाटक देखने के लिए आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जुटी। प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि सफाई केवल सरकारी विभागों या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की ली शपथ
अभियान में शामिल फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों ने स्वच्छ एवं टिकाऊ पर्यावरण बनाए रखने की शपथ भी ली। सभी ने सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने, कचरे का उचित निस्तारण करने और दूसरे लोगों को भी स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छता को केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। गांधी जयंती जैसे अवसर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और सामूहिक संकल्प लेने का माध्यम हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब इन संकल्पों को दैनिक जीवन में अपनाया जाए।
अस्पताल परिसर से बाहर भी सामाजिक जिम्मेदारी
एम्स देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज तथा उनके तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छता का महत्व और बढ़ जाता है। एम्स की ओर से चलाया गया यह अभियान अस्पताल परिसर से बाहर आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों तक पहुंचा।
डॉक्टरों और कर्मचारियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी जिम्मेदारी केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है। स्वस्थ समाज के लिए स्वच्छ वातावरण भी जरूरी है और इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है।
सफाईकर्मियों की भूमिका को किया रेखांकित
कार्यक्रम में सैनिटेशन स्टाफ की भूमिका भी प्रमुख रही। रोजाना अस्पताल और उसके आसपास सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों ने न केवल सफाई अभियान में हिस्सा लिया, बल्कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया।
अभियान के दौरान सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के प्रयासों को भी सराहा गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता अभियान की सफलता में सफाईकर्मियों के साथ-साथ आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
अभियान में दिखी सामूहिक भागीदारी
गांधी जयंती पर आयोजित इस अभियान में डॉक्टर, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट, कर्मचारी और सैनिटेशन स्टाफ एक साथ नजर आए। सभी ने मिलकर सफाई की और लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया।
अभियान के दौरान सफाई के साथ-साथ जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कचरा एकत्र करने, उसे अलग-अलग करने और लोगों को उसके उचित निस्तारण के बारे में समझाने से अभियान को केवल प्रतीकात्मक सफाई कार्यक्रम के बजाय जागरूकता गतिविधि का रूप दिया गया।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने की सराहना
कार्यक्रम के समापन पर एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेने वाले सभी फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, कर्मचारियों और सैनिटेशन स्टाफ की सराहना की। उन्होंने स्वच्छता अभियान में भाग लेने वाले सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि स्वच्छता को निरंतर व्यवहार का हिस्सा बनाना जरूरी है।
उन्होंने अभियान के दौरान किए गए कार्यों और जागरूकता गतिविधियों की भी जानकारी ली। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने आगे भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने का संकल्प लिया।
गांधी जयंती पर दिया बड़ा संदेश
एम्स नई दिल्ली का यह अभियान गांधी जयंती पर स्वच्छता के संदेश को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आया। एक ओर जहां 800 किलोग्राम से अधिक कचरा हटाया गया, वहीं दूसरी ओर घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया गया और नुक्कड़ नाटक के जरिए स्वच्छता का संदेश दिया गया।
अभियान का संदेश साफ रहा कि स्वच्छता केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। यह ऐसी आदत है जिसे रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाना, गीले और सूखे कचरे को अलग रखना, कचरे का उचित निस्तारण करना और आसपास के लोगों को इसके लिए प्रेरित करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
गांधी जयंती के अवसर पर एम्स के डॉक्टरों और कर्मचारियों की इस पहल ने स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए लोगों को सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

