नई दिल्ली,03 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। दिल्ली की तेज रफ्तार जिंदगी, काम का दबाव, पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियां, अकेलापन और बदलती जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य के लिए लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे में राजधानी के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए एम्स नई दिल्ली ने नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे-2 (NMHS-2) के तहत व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया है।
इस सर्वे के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि दिल्ली की आबादी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की स्थिति क्या है, कितने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है, कितने लोग वास्तव में इन सेवाओं तक पहुंच पा रहे हैं और मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था लोगों की जरूरतों को पूरा करने में कितनी सक्षम है।
यह पहल केवल मानसिक बीमारियों की संख्या पता करने तक सीमित नहीं है। सर्वे का व्यापक उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों, सेवाओं की उपलब्धता, लोगों की सेवा तक पहुंच और स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों को एक साथ समझना है।
घर-घर पहुंच रही सर्वे की टीम
दिल्ली में एनएमएचएस-2 के फील्ड डेटा कलेक्शन का काम आबादी के बीच जाकर किया जा रहा है। इसके तहत चयनित क्षेत्रों में लोगों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
सर्वे में प्राप्त जानकारी से यह समझने में मदद मिलेगी कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं समाज के अलग-अलग वर्गों और आबादी के विभिन्न हिस्सों में किस तरह दिखाई दे रही हैं। इसके साथ यह भी देखा जा रहा है कि जिन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता की आवश्यकता है, वे सेवाओं तक पहुंच पा रहे हैं या नहीं।
इस तरह सर्वे का फोकस केवल बीमारी पर नहीं, बल्कि जरूरत और सेवा के बीच मौजूद अंतर को समझने पर भी है।
एम्स के विशेषज्ञ संभाल रहे जिम्मेदारी
दिल्ली में एनएमएचएस-2 की जिम्मेदारी एम्स के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों की टीम संभाल रही है। इसमें सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. आनंद कृष्णन, मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर, प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे, प्रोफेसर डॉ. रामदीप और प्रोफेसर डॉ. आलोक अग्रवाल शामिल हैं।
विभिन्न विशेषज्ञताओं से जुड़े चिकित्सकों की भागीदारी इस सर्वे को व्यापक दृष्टिकोण देती है। कम्युनिटी मेडिसिन, मनोचिकित्सा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ मिलकर आबादी और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों की तस्वीर को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
सिर्फ बीमारी नहीं, जरूरत का भी होगा आकलन
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी समस्या की मौजूदगी का पता चलना पहला कदम है। इसके बाद यह जानना भी जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति को किस तरह की सहायता की जरूरत है और वह सहायता उसे मिल पा रही है या नहीं।
एनएमएचएस-2 में इसी पहलू पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सर्वे के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता और उनके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इससे नीति और सेवा नियोजन के स्तर पर यह समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में सेवाओं की जरूरत अधिक है, कहां संसाधनों को मजबूत करने की आवश्यकता है और किन स्तरों पर लोगों की पहुंच बेहतर बनाने की जरूरत हो सकती है।
अस्पताल से लेकर दवाओं तक सिस्टम की जांच
एम्स ने मानसिक स्वास्थ्य की तस्वीर को केवल मरीजों और बीमारी तक सीमित नहीं रखा है। इसके साथ मेंटल हेल्थ सिस्टम असेसमेंट (MHSA) भी किया गया है।
इस आकलन के तहत दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों को समझने की कोशिश की गई। इसके लिए एम्स नई दिल्ली में एक कंसेंसस वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सरकारी और संस्थागत प्रतिनिधियों तथा सिविल सोसायटी संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
वर्कशॉप में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और उपलब्ध जानकारी व निष्कर्षों की विशेषज्ञों तथा संबंधित हितधारकों के साथ समीक्षा की गई।
कितने डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं?
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए केवल अस्पतालों का होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सिस्टम असेसमेंट में यह समझने की कोशिश की गई कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं।
डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों की उपलब्धता तथा प्रशिक्षण जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहा कि मौजूदा स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की पहचान और प्राथमिक स्तर पर सहायता देने के लिए किस प्रकार की ट्रेनिंग और सहयोग की जरूरत है।
अस्पताल और बुनियादी ढांचे की भी पड़ताल
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी बुनियादी ढांचा होना भी महत्वपूर्ण है। सिस्टम असेसमेंट के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया।
यह देखा गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता कैसी है और मरीजों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था किस स्तर तक तैयार है।
जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर भी नजर
मानसिक स्वास्थ्य उपचार में दवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सिस्टम असेसमेंट के दौरान आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और उनसे जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
मकसद यह समझना है कि जिन लोगों को उपचार की जरूरत है, उनके लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता और दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
लोगों में जागरूकता कितनी?
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के बीच जागरूकता भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई बार लोग समस्या को पहचान नहीं पाते या सहायता लेने में देर करते हैं। सामाजिक धारणाएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पूर्वाग्रह भी लोगों के सेवा लेने के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
वर्कशॉप में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता और सेवाओं के बारे में जानकारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों और हितधारकों ने इस बात पर विचार किया कि लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी किस तरह पहुंचाई जा सकती है।
विभागों के बीच तालमेल भी अहम
मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल मनोचिकित्सा विभाग तक सीमित नहीं होतीं। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अस्पतालों और अन्य संस्थानों तक अलग-अलग स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता होती है।
इसी कारण सिस्टम असेसमेंट में विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा गया। मरीज को जरूरत के अनुसार सही स्तर की सेवा समय पर मिल सके, इसके लिए स्वास्थ्य तंत्र के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी माना जाता है।
'कागज' पर नहीं, जमीन पर व्यवस्था कितनी तैयार?
एनएमएचएस-2 और मेंटल हेल्थ सिस्टम असेसमेंट को साथ देखने की खासियत यही है कि एक तरफ आबादी की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों की तस्वीर सामने आएगी, वहीं दूसरी तरफ यह समझने का प्रयास होगा कि उन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी तैयार है।
यदि आबादी की जरूरत और उपलब्ध सेवाओं के बीच अंतर सामने आता है तो भविष्य में संसाधनों, सेवाओं और प्रशिक्षण की प्राथमिकताएं तय करने में ऐसी जानकारी उपयोगी हो सकती है।
वर्कशॉप में सामने आए निष्कर्षों की विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने समीक्षा की। चर्चा के दौरान व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव भी सामने आए।
सर्वे के निष्कर्ष बन सकते हैं भविष्य की योजना का आधार
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी बड़े हस्तक्षेप के लिए विश्वसनीय और स्थानीय स्तर का डेटा महत्वपूर्ण होता है। दिल्ली जैसे बड़े और विविध आबादी वाले महानगर में लोगों की जरूरतों को समझने के लिए व्यवस्थित आंकड़ों की भूमिका और बढ़ जाती है।
एनएमएचएस-2 से मिलने वाले आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और सेवाओं की आवश्यकता को समझने में मदद कर सकते हैं। वहीं एमएचएसए से स्वास्थ्य तंत्र की मौजूदा क्षमता और कमियों की पहचान में सहायता मिल सकती है।
दोनों आकलनों के निष्कर्षों को साथ देखने पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिक स्पष्ट आधार उपलब्ध हो सकता है।
दिल्ली के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सर्वे?
दिल्ली देश का एक ऐसा महानगरीय क्षेत्र है जहां अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और पेशागत पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतें भी एक जैसी नहीं हो सकतीं।
किसी व्यक्ति के लिए काम का तनाव बड़ी चुनौती हो सकता है तो किसी दूसरे के लिए सामाजिक परिस्थितियां, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक दबाव या अन्य जीवन परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे विविध वातावरण में स्थानीय स्तर पर डेटा जुटाने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि राजधानी में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरत क्या है और उपलब्ध व्यवस्था किस तरह उन जरूरतों से जुड़ रही है।
सर्वे का संदेश—मानसिक स्वास्थ्य भी स्वास्थ्य का हिस्सा
एनएमएचएस-2 की पूरी प्रक्रिया मानसिक स्वास्थ्य को स्वास्थ्य व्यवस्था के व्यापक हिस्से के रूप में देखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान, उपचार और समय पर सहायता तक पहुंच को बेहतर बनाना स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।
एम्स की ओर से चलाए जा रहे इस सर्वे में आबादी से सीधे जानकारी जुटाने के साथ-साथ स्वास्थ्य प्रणाली का आकलन किया जा रहा है। इस कारण यह पहल केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं, बल्कि दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य की जरूरत और सेवा व्यवस्था के बीच संबंध को समझने की व्यापक प्रक्रिया के रूप में सामने आ रही है।
आने वाले समय में सर्वे और सिस्टम असेसमेंट से सामने आने वाले निष्कर्ष यह समझने में मदद कर सकते हैं कि दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को किन क्षेत्रों में मजबूत करने की जरूरत है और लोगों तक सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए किस तरह की योजना बनाई जा सकती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

