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डफ़र” का अनाउंसमेंट टीज़र पोस्टर जिम कॉर्बेट, उत्तराखंड में अनवील

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नई दिल्ली. आगामी हिंदी फीचर फिल्म “डफ़र” का अनाउंसमेंट टीज़र पोस्टर जिम कॉर्बेट, उत्तराखंड में अनवील किया गया, जो एक ऐसे प्रोजेक्ट की दिलचस्प और अलग शुरुआत को दर्शाता है जो साफ तौर पर कुछ अलग करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बहुत कुछ बताने के बजाय, फिल्म के मेकर्स उस विचार की ओर झुकते दिखते हैं जिसे वे “जॉनर एनार्की” कहते हैं। यानी ऐसी स्टोरीटेलिंग स्पेस जिसे किसी एक तय श्रेणी में बांधना आसान नहीं होगा और जो ऑडियंस को अपनी तरह से नैरेटिव को समझने और इंटरप्रेट करने की जगह देती है। शुरुआत से ही कोशिश यही दिखाई देती है कि बातचीत की दिशा क्यूरियोसिटी तय करे। फिल्म का निर्देशन मल्टीपल अवॉर्ड विनिंग फिल्ममेकर नकुल देव कर रहे हैं। यह फिल्म उनकी सिग्नेचर लेयर्ड स्टोरीटेलिंग एप्रोच को आगे बढ़ाते हुए उसे एक बड़े सिनेमैटिक कैनवस पर एक्सपैंड करती है। पोस्टर भी इसी फिलॉसफी को दर्शाता है। इसमें कैरेक्टर का चेहरा जानबूझकर छुपाया गया है, ताकि यह विज़ुअल साफ जवाब देने के बजाय एक तरह की फ्रेन्ज़ीड एम्बिग्युइटी पैदा करे।

फिल्म का निर्माण एलीफैंटा फिल्म्स की डॉ. कोमल वर्मा कर रही हैं। वहीं “डफ़र” जैसा टाइटल भी शुरुआत से ही एक बोल्ड और सोचा समझा निर्णय रहा है। इसे सिर्फ एक लेबल की तरह नहीं बल्कि एक कन्वर्सेशन स्टार्टर की तरह देखा गया है, जो सुनते ही अलग अलग इंटरप्रेटेशन्स को आमंत्रित करता है। यह बैनर अब आगे भी लगातार सक्रिय रहने वाला है, क्योंकि इसके प्रोडक्शन विंग के तहत अलग अलग जॉनर में लॉन्ग और शॉर्ट फॉर्मेट कंटेंट के लिए पाँच और टाइटल्स अनाउंस किए जाने वाले हैं। फिल्म की क्रिएटिव डायरेक्शन और राइटिंग सुमन दिव्या द्वारा की गई है, जो फिल्ममेकिंग की दुनिया में एक जानी मानी डुओ मानी जाती है। उनकी पहचान ऐसी कहानियों से रही है जिनमें नैरेटिव डेप्थ के साथ साथ स्ट्राइकिंग विज़ुअल आइडियाज़ भी दिखाई देते हैं।

अनवील किया गया पोस्टर एक बैक फेसिंग कैरेक्टर को दिखाता है जिसकी बॉडी पर क्रिप्टिक टैटूज़ बने हुए हैं। यह एक सिटीस्केप के ऊपर उभरता हुआ दिखाई देता है, मानो किसी साइलेंट नॉइज़ का संकेत दे रहा हो। यह इमेज बदलते कॉन्टेक्स्ट्स, छिपी हुई कहानियों और कई परतों वाली पहचान की ओर इशारा करती है। चेहरे का न दिखाया जाना एक सोचा समझा क्रिएटिव डिसीज़न है, जो ऑडियंस को इमैजिन करने और क्वेश्चन करने की जगह देता है। मेकर्स ने कन्फर्म किया है कि पोस्टर में दिखाई देने वाले कैरेक्टर का चेहरा जानबूझकर छुपाया गया है। असली पहचान का रिवील सही समय पर किया जाएगा और वह भी एक और बड़े बैंग के साथ सामने आएगा।

दिलचस्प बात यह है कि पोस्टर ने लॉन्च के दौरान मौजूद मीडिया के बीच पहले ही काफी कन्वर्सेशन्स पैदा कर दी हैं। यह लॉन्च भी पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि जिम कॉर्बेट, उत्तराखंड में एक डेस्टिनेशन प्रेस कॉन्फ्रेंस के रूप में आयोजित किया गया। यह चुनाव प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है, मानो फिल्ममेकिंग स्ट्रैटेजी एक सफारी की तरह ऑडियंस को ऐसे विज़ुअल्स की यात्रा पर ले जाने वाली हो जो आसानी से देखने को नहीं मिलते, ठीक वैसे ही जैसे जंगल में टाइगर साइटिंग्स दुर्लभ होती हैं। मेकर्स इस क्यूरियोसिटी का स्वागत करते दिखाई देते हैं और उनका मानना है कि यह फिल्म सिर्फ एक स्टोरी बताने के लिए नहीं बल्कि ऑडियंस के बीच स्पेक्युलेशन्स और डिस्कशन्स को जन्म देने के लिए बनाई गई है।

अपने अनकन्वेंशनल टाइटल, विज़ुअली इंट्रीगिंग पोस्टर और मिस्ट्री पर आधारित लॉन्च के साथ “डफ़र” ने शुरुआत से ही एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। मेकर्स फिल्म को कई भाषाओं में डब करके व्यापक ऑडियंस तक पहुँचाने की योजना भी देख रहे हैं। अगर शुरुआती प्रतिक्रियाएँ कोई संकेत देती हैं, तो यह साफ है कि मेकर्स ठीक वहीं पहुँचे हैं जहाँ वे पहुँचना चाहते थे, यानी क्यूरियोसिटी के बिल्कुल केंद्र में।







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