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दिल्ली में आयोजित होगा एम्स एस्थेटिक सर्जरी अपडेट 2026

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वर्ष 2024 में लगभग 1.2 मिलियन (12 लाख) प्रक्रियाएँ की गईं, और अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 1.5 मिलियन (15 लाख) तक पहुँच सकती है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल  2026  (यूटीएन)। एम्स दिल्ली के प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी विभाग द्वारा एस्थेटिक सर्जरी अपडेट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन एस्थेटिक सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास और तकनीकों पर केंद्रित होगा। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ शामिल होकर फेस, ब्रेस्ट, बॉडी से जुड़ी सर्जरी के व्यावहारिक और प्रमाण-आधारित तरीकों पर चर्चा करेंगे। साथ ही नई उभरती तकनीकों और बदलते चिकित्सा मानकों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। विभाग ने एस्थेटिक सर्जरी को प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भी शामिल किया है। जिससे प्लास्टिक सर्जरी के प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण का अनुभव मिल सकेगा। इसका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित, नैतिक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना है।
इस बैठक में पूरे भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों से भी 280 से अधिक प्लास्टिक सर्जन शामिल होंगे।
 
यह विभाग एस्थेटिक प्रक्रियाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है—जिनमें सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल, दोनों तरह की प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इनमें हेयर ट्रांसप्लांटेशन, लाइपोसक्शन, फेसलिफ्ट, राइनोप्लास्टी, लेज़र उपचार, बोटुलिनम टॉक्सिन और डर्मल फिलर्स प्रमुख हैं। इस बैठक का मुख्य फोकस इस तेज़ी से बढ़ते हुए क्षेत्र में हुई हालिया प्रगति और नई तकनीकों पर रहेगा।
आज भारत एस्थेटिक सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में से एक है और इसकी रैंकिंग 6वीं है। हालाँकि, इस विकास के साथ-साथ यह ज़िम्मेदारी भी आती है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रक्रियाएँ सुरक्षित, नैतिक और पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित पेशेवरों द्वारा ही की जाएँ।
 
प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. मनीष सिंघल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में एस्थेटिक सर्जरी की माँग में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024 में लगभग 1.2 मिलियन (12 लाख) प्रक्रियाएँ की गईं, और अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 1.5 मिलियन (15 लाख) तक पहुँच सकती है। सहायक प्रोफेसर डॉ. शिवांगी साहा ने बताया कि एस्थेटिक सर्जरी की माँग समाज के सभी वर्गों में है। विभिन्न आयु-वर्गों के लोग ऐसी प्रक्रियाओं की तलाश में रहते हैं जो न केवल उनके बाहरी रूप-रंग को बेहतर बनाएँ, बल्कि उनके आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाएँ। उन्होंने आगे कहा कि एस्थेटिक (सौंदर्य संबंधी) चिंताओं का अक्सर व्यक्ति के आत्म-सम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अवसरों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
 
प्रो. सिंघल ने इस बात को भी रेखांकित किया कि एक अग्रणी राष्ट्रीय संस्थान होने के नाते, एम्स की यह ज़िम्मेदारी है कि वह एस्थेटिक सर्जरी के क्षेत्र में सुरक्षित, नैतिक और सुव्यवस्थित प्रशिक्षण को बढ़ावा दे। एम्स (नई दिल्ली, पटना, भुवनेश्वर) और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान इस दिशा में सक्रिय रूप से पहल कर रहे हैं।
 
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।






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