बड़ौत,07 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। नगर के दिगंबर जैन कॉलेज में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत “विकसित भारत : विकसित उत्तर प्रदेश” तथा “बुद्धिजीवियों का युवाओं से संवाद” की संकल्पना को केंद्र में रखते हुए वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका, शिक्षा, रोजगार, तकनीकी विकास, कौशल, नवाचार और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली एवं तार्किक ढंग से प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. शिन्जिता अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं डॉ. धनेंद्र कुमार जैन के संरक्षण में किया गया। मंच संचालन डॉ. नीलिमा, डॉ. राखी एवं डॉ. प्रीति ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजकों ने वाद-विवाद प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य और विषय की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” विषय के विभिन्न आयामों पर स्वतंत्र, तार्किक और तथ्यपरक ढंग से अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष दोनों में अपने तर्क प्रस्तुत करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समानता, महिला सशक्तीकरण, तकनीकी प्रगति और जिम्मेदार नागरिकता जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
शिक्षा और कौशल विकास को बताया विकास की आधारशिला
वाद-विवाद में विद्यार्थियों ने शिक्षा को राष्ट्र के विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ युवाओं को रोजगारपरक एवं व्यावहारिक कौशल से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ नई तकनीकों का ज्ञान भी हासिल करना होगा।
कई प्रतिभागियों ने कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए। उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने को भी विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
युवा शक्ति को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
प्रतियोगिता में युवाओं की भूमिका पर भी विद्यार्थियों ने खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।
प्रतिभागियों ने कहा कि युवाओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना जरूरी है। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और नेतृत्व विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
महिला सशक्तीकरण और सामाजिक समावेशन पर भी चर्चा
वाद-विवाद के दौरान महिला सशक्तीकरण और सामाजिक समावेशन जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आए। विद्यार्थियों ने कहा कि किसी भी देश का विकास तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता, जब तक समाज के सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध न हों।
उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व में भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने को भी विकसित भारत के लिए जरूरी बताया।
तकनीक और नवाचार को बताया विकास का प्रमुख आधार
प्रतिभागियों ने तकनीकी प्रगति और नवाचार को आधुनिक भारत के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। विद्यार्थियों ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन और संचार के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक तकनीकों का प्रभाव और बढ़ेगा। ऐसे में युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना आवश्यक है, ताकि वे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, जिम्मेदार नागरिकता भी जरूरी
वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सकल आर्थिक विकास या आय में वृद्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए। एक विकसित राष्ट्र के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक समावेशन, अवसरों की समानता, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और जिम्मेदार नागरिकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
विद्यार्थियों ने अपने तर्कों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
निर्णायक मंडल ने किया निष्पक्ष मूल्यांकन
प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में डॉ. ममता जैसियान एवं डॉ. सुनीता शामिल रहीं। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के विचारों और प्रस्तुतीकरण का निष्पक्ष मूल्यांकन किया।
मूल्यांकन के दौरान विषय-वस्तु की गुणवत्ता, तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता, अभिव्यक्ति-कौशल, भाषिक शुद्धता, प्रस्तुतीकरण शैली और समय-प्रबंधन को प्रमुख आधार बनाया गया। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, विषय की समझ और तर्कों की प्रभावशीलता को भी विशेष रूप से परखा गया।
देव गुप्ता प्रथम, ऋतिक द्वितीय और वंशिका तृतीय
प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी देते हुए प्रो. नीलू जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में देव गुप्ता ने प्रथम स्थान, ऋतिक ने द्वितीय स्थान तथा वंशिका ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विजेता प्रतिभागियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी गई। अन्य प्रतिभागियों के प्रयासों को भी सराहा गया और उन्हें भविष्य में इसी प्रकार शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान
कॉलेज की प्राचार्या प्रो. शिन्जिता अग्रवाल ने कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान में भी राष्ट्र के विकास के सक्रिय सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवा अपनी प्रतिभा, ज्ञान और ऊर्जा के माध्यम से देश के विकास की दिशा और गति को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे ज्ञान, कौशल, नवाचार और सकारात्मक चिंतन को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत विकास के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।
प्राचार्या ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वाद-विवाद के माध्यम से विद्यार्थी किसी विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों पहलुओं को समझते हैं, जिससे उनमें संतुलित दृष्टिकोण विकसित होता है।
शिक्षकों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. संजीव कुमार, डॉ. नीलिमा, डॉ. राखी, डॉ. प्रीति रस्तोगी, डॉ. नीलू जैन, डॉ. प्रतिभा गुप्ता, डॉ. कपिल चौहान एवं डॉ. ईशा जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आयोजकों ने प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता और उनके सार्थक विचारों की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों, निर्णायक मंडल और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल अपने विचारों को मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया, बल्कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सोचने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी प्रदान किया। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और तर्कपूर्ण प्रस्तुतियों से कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

