बागपत, 03 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। जिले में बालश्रम के खिलाफ प्रशासन और पुलिस की ओर से अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में थाना एएचटी प्रभारी निरीक्षक मय फोर्स, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, ग्रामीण समाज विकास केंद्र एवं चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने मुख्यालय से प्राप्त बालश्रम संबंधी शिकायतों के आधार पर कस्बा बड़ौत और छपरौली में जांच एवं रेस्क्यू अभियान चलाया। अभियान के दौरान बड़ौत स्थित एक प्रतिष्ठान से दो बालकों को बालश्रम करते हुए रेस्क्यू किया गया। दोनों बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
संयुक्त टीम की कार्रवाई से बाल श्रमिकों से काम कराने वाले प्रतिष्ठानों में हड़कंप की स्थिति बनी रही। टीम ने स्पष्ट किया कि बच्चों से मजदूरी अथवा किसी भी प्रकार का श्रम कराना उनके अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत के आधार पर बड़ौत में पहुंची टीम
मुख्यालय से बालश्रम से संबंधित शिकायतें प्राप्त होने के बाद एएचटी पुलिस, श्रम विभाग, ग्रामीण समाज विकास केंद्र और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच करने का निर्णय लिया।
टीम ने कस्बा बड़ौत में विभिन्न स्थानों पर जांच की। इसी दौरान एक प्रतिष्ठान पर दो बालक काम करते हुए पाए गए। टीम ने तत्काल दोनों बच्चों को रेस्क्यू किया और उन्हें बालश्रम से मुक्त कराया।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बच्चों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित प्रतिष्ठान के संबंध में भी जानकारी जुटाई। इसके बाद श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा मामले में आवश्यक विधिक कार्यवाही की गई।
बालकों को परिजनों के सुपुर्द किया
रेस्क्यू किए गए दोनों बालकों की आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने परिजनों को बच्चों से बालश्रम न कराने और उनकी शिक्षा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों का बचपन पढ़ाई, खेल और सुरक्षित वातावरण में गुजरना चाहिए। आर्थिक मजबूरी अथवा किसी अन्य कारण से बच्चों को काम पर लगाना उनके विकास और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
संबंधित के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई
बड़ौत के प्रतिष्ठान पर बालकों के बालश्रम में संलिप्त पाए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की गई। श्रम विभाग द्वारा मामले से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बालश्रम को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी प्रतिष्ठान में बच्चों से श्रम कराया जाता पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
छपरौली में भी शिकायत की जांच
संयुक्त टीम ने कस्बा छपरौली में प्राप्त एक अन्य शिकायत की भी मौके पर जाकर जांच की। टीम शिकायत में बताए गए प्रतिष्ठान पर पहुंची और वहां जांच-पड़ताल की।
हालांकि जांच के दौरान संबंधित दुकान पर कोई भी बालक काम करता हुआ नहीं पाया गया। टीम ने मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी ली और शिकायत की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
इस दौरान अधिकारियों ने प्रतिष्ठान संचालकों को भी बालश्रम संबंधी नियमों का पालन करने की हिदायत दी। टीम ने कहा कि बच्चों को काम पर लगाने से बचें और यदि किसी बच्चे को काम करते हुए देखा जाए तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।
बालश्रम के खिलाफ लगातार जारी रहेगा अभियान
एएचटी प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि बालश्रम के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर संबंधित स्थानों पर जांच की जाएगी और यदि कोई बच्चा बालश्रम करता पाया गया तो उसे रेस्क्यू कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बालश्रम केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा भी है। बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बच्चों के अधिकारों को लेकर जागरूकता जरूरी
अधिकारियों ने कहा कि बालश्रम रोकने के लिए केवल सरकारी स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। दुकानदार, प्रतिष्ठान संचालक और अन्य व्यवसायी बच्चों को काम पर रखने से बचें।
उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि बच्चों को काम पर भेजने के बजाय उनकी शिक्षा पर ध्यान दें। किसी प्रकार की आर्थिक समस्या होने पर संबंधित सरकारी योजनाओं और सहायता तंत्र की जानकारी लेकर उसका लाभ उठाया जा सकता है।
चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका भी महत्वपूर्ण
बालश्रम से जुड़े मामलों में चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। किसी बच्चे के बालश्रम में लगे होने की जानकारी मिलने पर शिकायत के आधार पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रेस्क्यू की कार्रवाई की जा सकती है।
संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए अभियान में पुलिस, श्रम विभाग, सामाजिक संगठन और चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रतिनिधियों ने मिलकर कार्रवाई की। इससे स्पष्ट है कि बालश्रम के मामलों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
प्रतिष्ठानों पर बढ़ सकती है निगरानी
बड़ौत और छपरौली में शिकायतों की जांच के बाद अब जिले के अन्य कस्बों और बाजारों में भी बालश्रम को लेकर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। खासकर दुकानों, ढाबों, होटलों, वर्कशॉप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जांच की जा सकती है।
अभियान के दौरान टीम द्वारा यह भी देखा जाएगा कि कहीं नाबालिग बच्चों से उनकी उम्र के अनुरूप प्रतिबंधित अथवा जोखिमपूर्ण कार्य तो नहीं कराया जा रहा है।
बच्चों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर
अधिकारियों ने कहा कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को केवल बालश्रम से मुक्त कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करना भी जरूरी है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों के स्तर से आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का बचपन मजदूरी में नहीं बीतना चाहिए। बच्चों को शिक्षा, खेलकूद और अपने व्यक्तित्व के विकास का अवसर मिलना आवश्यक है।
शिकायतों पर गंभीरता से होगी कार्रवाई
एएचटी प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि बालश्रम से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी दुकान, प्रतिष्ठान, होटल, ढाबे, वर्कशॉप या अन्य स्थान पर नाबालिग बच्चे से काम कराया जा रहा हो तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।
उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मौके पर जांच की जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभियान से बालश्रम कराने वालों में हड़कंप
संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद जिले में बालश्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि अभियान केवल एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिकायतों और जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
बड़ौत में दो बालकों को रेस्क्यू किए जाने की कार्रवाई को अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। वहीं छपरौली में शिकायत की जांच के दौरान बालक नहीं मिलने पर टीम ने स्थिति का सत्यापन किया।
अधिकारियों का कहना है कि बालश्रम के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई दोनों एक साथ चलती रहेंगी, ताकि बच्चों को श्रम से मुक्त कर उन्हें शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाया जा सके।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

