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अखिलेश-मुलायम के विवादित पोस्टर से बवाल, सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा

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पोस्टरों को तत्काल फाड़कर हटाया और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया, कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की तथा इसे सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया।

मथुरा,14 जुलाई 2026 (यूटीएन)। गोवर्धन रोड पर मंगलवार सुबह उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के फोटो वाले विवादित पोस्टर लगे मिले। पोस्टरों में दोनों नेताओं की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखी गई थीं और उन्हें मुस्लिम टोपी पहने हुए दर्शाया गया था। पोस्टर सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।

पोस्टरों की जानकारी मिलते ही सपा यूथ ब्रिगेड, छात्रसभा और अन्य संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने पोस्टरों को तत्काल फाड़कर हटाया और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की तथा इसे सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया।

सपा नेताओं का आरोप है कि इस तरह के पोस्टर लगाकर कुछ शरारती तत्व जानबूझकर जिले का माहौल खराब करना चाहते हैं। उनका कहना है कि मथुरा जैसे धार्मिक और संवेदनशील शहर में इस प्रकार की हरकत सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि पोस्टर लगाने वाले लोगों की जल्द से जल्द पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने कहा कि हाल ही में 9 अगस्त को कारसेवा के ऐलान के बाद इस तरह के पोस्टर सामने आना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि चुनावी माहौल बनने से पहले कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए समाज में तनाव और वैमनस्य का वातावरण तैयार करना चाहते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस भी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

सपा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनता से जुड़े महंगाई, बेरोजगारी, बिजली, किसानों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है और संबंधित पक्ष की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

घटना की सूचना मिलते ही थाना हाईवे पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने विवादित पोस्टरों को हटवाकर अपने कब्जे में ले लिया और स्थिति को शांत कराया। एहतियात के तौर पर कुछ समय तक क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो सके। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।

पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पोस्टर किस समय लगाए गए, कितने लोगों ने उन्हें लगाया और इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है। यदि आवश्यकता पड़ी तो आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार पुलिस पोस्टरों की छपाई, डिजाइन और सामग्री के आधार पर भी जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पोस्टर किस प्रिंटिंग प्रेस में तैयार किए गए और उन्हें किसने तैयार कराया। यदि पोस्टर किसी दुकान या प्रिंटिंग प्रेस से छपे हैं तो वहां से भी जानकारी जुटाई जाएगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संवेदनशील और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के विवादित पोस्टर लगाना कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई आवश्यक होती है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव की स्थिति पैदा न हो।

स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ इस तरह के विवादित पोस्टर लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि मथुरा की पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में है तथा यहां सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टर लगाने वालों की पहचान के लिए सभी उपलब्ध तकनीकी और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति या समूह इस घटना में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं समाचार लिखे जाने तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।

 






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