बागपत,20 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर चौधरी चरण सिंह सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में ‘संविधान के लक्ष्यों की प्राप्ति में अधिवक्ताओं की भूमिका’ विषय पर अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कानून से जुड़े वक्ताओं ने विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने, आमजन को न्याय दिलाने तथा संविधान में निहित मूल्यों और उद्देश्यों को व्यवहार में लागू कराने में अधिवक्ताओं की भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला न्यायाधीश मनोज कुमार तथा उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश अधिवक्ता परिषद के क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता अतुल प्रशांत त्यागी ने की, जबकि बागपत शाखा के महामंत्री अधिवक्ता अमित कुमार तोमर ने कार्यक्रम का संचालन किया।
गोष्ठी के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया। इसके बाद अधिवक्ता परिषद की स्थापना, उसके उद्देश्यों तथा अधिवक्ता समाज के लिए उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने पक्षकार का प्रतिनिधित्व करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग के रूप में उनकी सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।
संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार प्रदान करने के साथ-साथ न्याय, समानता और गरिमा जैसे मूल्यों की स्थापना का आधार भी है। इन मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिवक्ता अपने पेशे के माध्यम से नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाती है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित हो। इसके लिए अधिवक्ताओं को अपने व्यावसायिक दायित्वों के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अथवा सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में भी अधिवक्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गोष्ठी में कानून के बदलते स्वरूप, न्यायिक प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों तथा अधिवक्ताओं के दायित्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ कानून और न्याय व्यवस्था में बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में अधिवक्ताओं के लिए निरंतर अध्ययन और नवीन विधिक प्रावधानों की जानकारी रखना आवश्यक है।
न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की अहम भूमिका
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता सुभाष कुमार और महामंत्री अधिवक्ता अजित सिंह ने भी गोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्यायिक प्रक्रिया और आम नागरिक के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। किसी भी व्यक्ति को उसके अधिकारों और न्यायिक उपायों की जानकारी दिलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को अपने पेशे की गरिमा और न्याय व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए। न्यायालय में प्रभावी पैरवी के साथ-साथ कानून के प्रति सम्मान और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र पाल शर्मा, सुभाष त्यागी, पवन गुप्ता और जयेश शर्मा को शॉल ओढ़ाकर सम्मान प्रदान किया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के सम्मान के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया। वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लंबे अनुभव से नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं को सीखने और विधिक क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का अनुभव न्यायिक प्रक्रिया की समझ विकसित करने में भी उपयोगी होता है।
नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं को मार्गदर्शन की जरूरत
गोष्ठी में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को कानून के अध्ययन के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया की बारीकियों को समझने पर ध्यान देना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से युवा अधिवक्ताओं को अपने पेशे में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
वक्ताओं ने अधिवक्ताओं से संविधान और कानून की मूल भावना को समझने तथा न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज के प्रति जागरूकता फैलाने और कानूनी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में अधिवक्ता परिषद बागपत इकाई के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार, उदित प्रताप, कांता पंवार, कोषाध्यक्ष निशांत शर्मा, मंत्री करुण भेदा समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। इसके अलावा डीजीसी राजस्व रविंद्र राठी, डीजीसी भूपेंद्र शर्मा, डीजीसी फौजदारी राहुल नेहरा और एडीजीसी अमित खोखर ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता परिषद के स्थापना दिवस के उद्देश्य और उसकी भूमिका पर चर्चा की। मौजूद अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय, संविधान और कानून से जुड़े विषयों पर इस तरह की विचार गोष्ठियां अधिवक्ताओं को अपने दायित्वों पर विचार करने और समाज के प्रति अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने का अवसर प्रदान करती हैं।
अंत में आयोजकों ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, न्यायिक अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा कार्यक्रम में शामिल सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया। विचार गोष्ठी के समापन के साथ ही अधिवक्ता परिषद के 35वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का समापन हुआ।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

