दोघट,26 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। दाहा क्षेत्र के गांव भड़ल में आचार्य कपिल के संयोजन में दो दिवसीय सामवेद यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्र, समाज और परिवार के कल्याण की भावना से आहुतियां प्रदान कीं। यज्ञ में ब्रह्मत्व आचार्य विनोद कुमार शास्त्री ने किया, जबकि सौरभ कुमार सपत्नीक यज्ञमान रहे। यज्ञ के दौरान सामवेद के पवित्र मंत्रों का उच्चारण वातावरण को आध्यात्मिक बना रहा था।
यज्ञ में प्रवचन करते हुए आचार्य विनोद कुमार शास्त्री ने सामवेद के एक मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि इस विशाल सृष्टि में असंख्य योनियां हैं, लेकिन उनमें मानव योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मनुष्य को विवेक, बुद्धि, चिंतन और सही-गलत में अंतर करने की क्षमता मिली है। इसलिए मानव जीवन को केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं तक सीमित न रखकर इसे समाज, राष्ट्र और परमात्मा की सेवा में लगाना चाहिए।
आत्मविश्वास के बिना मानव जीवन अधूरा
आचार्य विनोद शास्त्री ने कहा कि परमपिता परमात्मा ने मनुष्य को जो शरीर और जीवन प्रदान किया है, उसके उपकार की तुलना किसी भी सांसारिक उपलब्धि से नहीं की जा सकती। मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे सार्थक बनाने के लिए व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास ही मनुष्य को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देता है। जीवन में संघर्ष और चुनौतियां प्रत्येक व्यक्ति के सामने आती हैं। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपना विश्वास बनाए रखता है, वह निराशा से बाहर निकलकर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन तभी सार्थक माना जा सकता है, जब व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को आत्मविश्वास, निश्चिंतता, निर्द्वंद्वता और निर्भीकता के साथ व्यतीत करे। भय और निराशा मनुष्य की क्षमता को कमजोर करते हैं, जबकि आत्मविश्वास उसे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
जीवन को अध्यात्म से जोड़ने का आह्वान
आचार्य ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों के पीछे भागने के लिए नहीं है। आधुनिक जीवन में व्यक्ति धन, पद और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष करता है, लेकिन यदि इस संघर्ष में अध्यात्म और संस्कार पीछे छूट जाएं तो जीवन की वास्तविक शांति प्राप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन को अध्यात्म से जोड़ने और परमात्मा की उपासना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से वैदिक चिंतन, यज्ञ और सद्कर्मों से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है। जब व्यक्ति परमात्मा में विश्वास रखता है और अपने कर्म को ईमानदारी से करता है तो कठिन परिस्थितियों में भी उसका मन विचलित नहीं होता।
यज्ञ में राष्ट्र कल्याण की भावना से दी आहुति
यज्ञ के दौरान सभी यज्ञीय प्रेमियों ने राष्ट्र कल्याण, समाज की सुख-शांति और परिवारों की समृद्धि की भावना से यज्ञ में आहुतियां प्रदान कीं। वैदिक मंत्रों के उच्चारण और यज्ञ की पवित्र अग्नि से पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक बना रहा।
मोहित शास्त्री ने सामवेद के पवित्र मंत्रों का पाठ करते हुए यज्ञीय क्रियाओं को विधिवत संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञ में भाग लिया और सामूहिक रूप से लोक कल्याण की कामना की।
यज्ञ के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व रहा है। यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि त्याग, सेवा, सहयोग और सामूहिक कल्याण की भावना का प्रतीक भी है। यज्ञ में सभी वर्गों के लोग मिलकर आहुति देते हैं, जिससे समाज में एकता और भाईचारे का संदेश जाता है।
युवाओं में संस्कार और आत्मविश्वास जरूरी
प्रवचन के दौरान युवाओं और बच्चों को विशेष रूप से संस्कारों से जुड़ने का संदेश दिया गया। आचार्य ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना हो तो समाज और देश को नई दिशा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। जीवन में आने वाली चुनौतियों को अवसर के रूप में स्वीकार कर निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का मार्ग है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दी आहुति
सामवेद यज्ञ में क्षेत्र के अनेक लोगों ने पहुंचकर वैदिक अनुष्ठान में भाग लिया। यज्ञ में पूर्व प्रधान देवेंद्र राणा, सुखबीर राणा, योगेंद्र आर्य, ब्रह्मचारी आर्य, पं. गौरव भारद्वाज, वेदसिंह आर्य, बाबू आनंद पाल, मनोज राणा, तेजपाल सिंह, जयराम आर्य, सागर आर्य, चंद्रकांत आर्य और पं. देवेंद्र आर्य सहित अन्य यज्ञ प्रेमियों ने आहुति प्रदान की।
आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय सामवेद यज्ञ के माध्यम से लोगों को वैदिक संस्कृति, यज्ञ परंपरा और आध्यात्मिक जीवन के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने भी इसे आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला आयोजन बताया। यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों की गूंज और हवन की सुगंध से भड़ल गांव का वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। श्रद्धालुओं ने परमात्मा से परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना की तथा यज्ञ परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

