नई दिल्ली,06 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। राजस्थानी कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से राजस्थानी अकादमी की ओर से 34वीं राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता एवं 12वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार, 9 अक्टूबर को किया जाएगा। यह सांस्कृतिक आयोजन आईवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम, आईवान-ए-गालिब रोड, आईटीओ के निकट, नई दिल्ली में आयोजित होगा। प्रतियोगिता को लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और राजस्थान की कला-संस्कृति से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे उद्घाटन समारोह के साथ होगी। इसके बाद सुबह 9:15 बजे से दोपहर 12 बजे तक राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में दिल्ली के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी भाग लेकर राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्यों और लोक जीवन से जुड़े रंगों को मंच पर प्रस्तुत करेंगे। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य की विविध शैलियों और सांस्कृतिक परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिलेगी।
राजस्थान की लोक संस्कृति अपने भीतर अनेक क्षेत्रों की अलग-अलग परंपराओं को समेटे हुए है। यहां के लोक नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रदेश के सामाजिक जीवन, रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार, लोक आस्थाओं और ग्रामीण जीवन की झलक भी दिखाई देती है। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को इन्हीं सांस्कृतिक रंगों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखने का अवसर मिलेगा। मंच पर जब विद्यार्थी पारंपरिक राजस्थानी गीतों और लोक धुनों पर नृत्य प्रस्तुत करेंगे तो दर्शकों को राजस्थान के विभिन्न अंचलों की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव होगा।
चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को किया जाएगा सम्मानित
लोक नृत्य प्रतियोगिता के बाद दोपहर 12 बजे राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को राजस्थान की कला, लोक जीवन, प्राकृतिक परिवेश, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक प्रतीकों को अपनी कल्पनाशक्ति एवं रचनात्मकता के माध्यम से कागज पर उकेरने का अवसर मिला है।
चित्रकला जैसी विधा बच्चों के भीतर रचनात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और उनसे जुड़ने का अवसर भी प्रदान करती है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने राजस्थान की कला और संस्कृति को अपने नजरिए से प्रस्तुत किया है। पुरस्कार समारोह में प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया जाएगा तथा उत्कृष्ट चित्रों और प्रतिभागियों की प्रतिभा को पहचान मिलेगी।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना उद्देश्य
राजस्थानी अकादमी का कहना है कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ना है। वर्तमान समय में तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवनशैली के बीच बच्चों और युवाओं का अपनी पारंपरिक संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अकादमी विद्यालयी विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध करा रही है।
लोक नृत्य और चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि पैदा होने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को भी सामने आने का अवसर मिलता है। मंच पर प्रस्तुति देने से बच्चों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उनमें टीम भावना, अनुशासन तथा रचनात्मकता का विकास होता है।
विभिन्न अंचलों की संस्कृति की दिखेगी झलक
राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। अलग-अलग लोक नृत्य शैलियों, गीत-संगीत और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से विद्यार्थी राजस्थान की विविधता को मंच पर जीवंत करेंगे। रंग-बिरंगी पोशाकों में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम को आकर्षक बनाएंगी।
राजस्थानी लोक नृत्यों में प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की गहरी छाप देखने को मिलती है। कहीं त्योहारों की उमंग दिखाई देती है तो कहीं ग्रामीण जीवन की सहजता और लोक आस्था की अभिव्यक्ति होती है। ऐसे में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले नृत्य कार्यक्रम को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखकर सांस्कृतिक प्रस्तुति का स्वरूप भी प्रदान करेंगे।
विद्यालयों को मिलता है प्रतिभा दिखाने का मंच
राजस्थानी अकादमी की ओर से आयोजित यह प्रतियोगिता विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच है। पढ़ाई के साथ कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है। कई विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जिनमें नृत्य, संगीत, चित्रकला और अभिनय जैसी प्रतिभाएं होती हैं, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उपयुक्त मंच नहीं मिल पाता। अकादमी के इस प्रकार के आयोजन ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी कार्यक्रम से पहले अभ्यास और तैयारियों में जुटे हुए हैं। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को नृत्य की बारीकियों, मंच संचालन, तालमेल और प्रस्तुति के विभिन्न पहलुओं का अभ्यास कराया जा रहा है। वहीं चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक क्षमता को निखारने पर ध्यान दिया है।
राजस्थानी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में प्रयास
राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता और सचिव सुमन माहेश्वरी ने बताया कि अकादमी लंबे समय से दिल्ली में राजस्थानी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करती रही है। उनका कहना है कि किसी भी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को उससे जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयी विद्यार्थियों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच उपलब्ध कराना अकादमी के सांस्कृतिक अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जानने और समझने का अवसर भी मिलता है।
अकादमी की ओर से समय-समय पर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संगीत, नृत्य, चित्रकला और लोक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे लोगों को राजस्थानी संस्कृति से जोड़े रखना और इसकी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह
कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह है। अभिभावक अपने बच्चों को मंच पर राजस्थानी संस्कृति की प्रस्तुति देते हुए देखने के लिए उत्सुक हैं। वहीं विद्यालयों के शिक्षक विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार अभ्यास करा रहे हैं।
आयोजकों का मानना है कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलने से उनमें आगे भी सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का उत्साह बढ़ेगा। इससे विद्यालयों में कला एवं संस्कृति आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों के बीच अपनी परंपराओं को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।
संस्कृति के संरक्षण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
आज के दौर में तकनीक और आधुनिक जीवनशैली ने बच्चों और युवाओं के जीवन में व्यापक बदलाव किया है। ऐसे समय में लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और क्षेत्रीय भाषाओं से नई पीढ़ी का जुड़ाव बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी है। राजस्थानी अकादमी द्वारा आयोजित इस तरह के कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राजस्थान की लोक संस्कृति अपनी रंगीन वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य, हस्तकला, लोक कथाओं और परंपराओं के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखती है। विद्यार्थियों के माध्यम से इन परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किए जाने से न केवल संस्कृति का प्रचार होता है, बल्कि बच्चों में अपनी विरासत के प्रति गौरव की भावना भी मजबूत होती है।
बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक तथा राजस्थान की कला और संस्कृति से जुड़े लोग शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने के लिए दर्शकों से भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहने का आग्रह किया गया है।
अकादमी ने कला एवं संस्कृति प्रेमियों से अपील की है कि वे कार्यक्रम में पहुंचकर विद्यार्थियों की प्रतिभा का उत्साहवर्धन करें। आयोजकों का कहना है कि बच्चों को जब दर्शकों और समाज का प्रोत्साहन मिलता है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी प्रतिभा को और बेहतर तरीके से निखारने के लिए प्रेरित होते हैं।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश
राजस्थानी लोक नृत्य एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़ने, अपनी परंपराओं को समझने और उन्हें आधुनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
9 अक्टूबर को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम राजस्थान की कला और संस्कृति के रंगों से सजेगा। लोक नृत्य की थिरकन, पारंपरिक वेशभूषाओं की रंगत, लोक संगीत की मधुर धुनें और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा मिलकर कार्यक्रम को यादगार बनाएंगी। वहीं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान विद्यार्थियों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा। राजस्थानी अकादमी के इस प्रयास से एक ओर जहां विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राजस्थानी भाषा, कला, साहित्य और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

