खेकड़ा, 21 अगस्त 2026 (यूटीएन)। बसी गांव के सबसे बुजुर्ग 108 वर्षीय छोटूराम का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे और अंतिम दर्शन कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
छोटूराम के निधन को ग्रामीणों ने गांव के लिए अपूरणीय क्षति बताया। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने अपने लंबे जीवनकाल में कई पीढ़ियों को बदलते हुए देखा। जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हमेशा हिम्मत और सकारात्मक सोच के साथ जीवन बिताया।
108 वर्ष की उम्र तक रहे सक्रिय
परिजनों के अनुसार, छोटूराम ने करीब 108 वर्षों के अपने जीवन में कई सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों का सामना किया। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद वह अपने आसपास के लोगों से जुड़े रहते थे और ग्रामीणों के सुख-दुख में अपनी भागीदारी निभाते थे।
ग्रामीणों ने बताया कि छोटूराम का स्वभाव बेहद सरल, सहज और मिलनसार था। गांव में हर उम्र के लोग उनसे आत्मीयता से मिलते थे। उनका व्यवहार ऐसा था कि उनसे मिलने वाला व्यक्ति सहज महसूस करता था।
ग्रामीणों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे बुजुर्ग के रूप में थी, जो हमेशा लोगों को आपसी भाईचारे और प्रेम के साथ रहने की सीख देते थे।
एकजुट रहने की देते थे सीख
ग्रामीणों ने बताया कि छोटूराम हमेशा परिवार और समाज में आपसी भाईचारे को महत्व देते थे। उनका मानना था कि किसी भी गांव की मजबूती वहां रहने वाले लोगों की एकजुटता से होती है।
वह लोगों को सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की सलाह देते थे। यही वजह थी कि गांव में उनके प्रति सभी वर्गों के लोगों में सम्मान का भाव था। उनके निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों का उनके घर पहुंचना उनके प्रति लोगों के जुड़ाव को दर्शाता है।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े ग्रामीण
शुक्रवार को छोटूराम के निधन की जानकारी मिलते ही उनके आवास पर ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
परिवार और परिचितों ने उनके साथ बिताए पुराने समय को याद किया। इस दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। गांव के कई बुजुर्गों ने उनके निधन को व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि छोटूराम जैसे अनुभवी और सरल स्वभाव के बुजुर्ग का चले जाना पूरे समाज के लिए दुखद है।
नम आंखों से दी अंतिम विदाई
शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। अंतिम यात्रा के दौरान गांव का माहौल भावुक रहा। लोगों ने नम आंखों से अपने गांव के सबसे बुजुर्ग नागरिक को अंतिम विदाई दी।
ग्रामीणों ने कहा कि छोटूराम ने अपने लंबे जीवन में कई पीढ़ियों को अपने सामने बढ़ते देखा और गांव के सामाजिक जीवन में उनकी अपनी एक अलग पहचान रही। उनके अनुभव और सहज व्यवहार को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
परिजनों को बंधाया ढांढस
ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिजनों सुशील नैन, सोनू नैन और संदीप नैन समेत परिवार के अन्य सदस्यों को ढांढस बंधाया। लोगों ने इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
ग्रामीणों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
छोटूराम का 108 वर्ष का जीवन गांव की कई पीढ़ियों की यादों से जुड़ा रहा। उनके निधन से बसी गांव ने न केवल अपने सबसे बुजुर्ग नागरिक को खोया है, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक को भी खो दिया है, जिसकी सादगी, मिलनसारिता और सकारात्मक सोच को ग्रामीण लंबे समय तक याद करते रहेंगे।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

