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भारत बदल रहा और आगे बढ़ रहा है’जरूरी है नए आपराधिक कानूनों को अपनाना:डीवाई चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि नया आपराधिक न्याय कानून में बदलाव समाज के लिए ऐतिहासिक पल है और कहा कि भारत अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में अहम बदलाव के लिए तैयार है।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2024 (यूटीएन)। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि संसद द्वारा नए आपराधिक कानूनों में किए गए बदलाव इस बात का साफ संकेत है कि भारत बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानूनी उपकरणों की जरूरत है। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने नए आपराधिक न्याय कानूनों के अधिनियमन को समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि भारत अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव के लिए तैयार है।
*समाज के लिए ये ऐतिहासिक पल*
आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन में भारत का प्रगतिशील पथ’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने उक्त बातें कही। इस मौके पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत अन्य लोग मौजूद थे। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि नया आपराधिक न्याय कानून में बदलाव समाज के लिए ऐतिहासिक पल है और कहा कि भारत अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में अहम बदलाव के लिए तैयार है। इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि यह नए कानून तभी सफल होंगे जब हम नागरिक के तौर पर उन्हें अपनाएं। साथ ही कहा कि नए कानून ने क्रिमिनल जस्टिस पर भारत के कानूनी ढांचे को एक नए युग में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की हितों को प्रोटेक्ट करने के लिए अपराध की जांच व प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन) कुशल तरीके से हो इसके लिए जरूरी बदलाव व सुधार किए गए हैं।
*’भारत बदल रहा है’*
चीफ जस्टिस ने कहा कि संसद ने कानूनी बदलाव के जरिये तीन नए कानून पारित किए हैं और यह संकेत देता है कि भारत बदल रहा है और वह आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के 75 वें वर्षगांठ के मौके पर आयोजित समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार मौजूदा संदर्भ और बेहतरीन प्रथाओं के अनुसार कानून का आधुनिकीकरण कर रही है। पीएम ने कहा था कि तीन नए कानून बनाने से भारत के कानून, पुलिस और जांच प्रणाली एक नए युग में जा पहुंची है। एक जुलाई से लागू हो रहा है तीनों क्रिमिनल लॉतीनों क्रिमिनल लॉ एक जुलाई 2024 से अमल में आ जाएगा लेकिन हिट एंड रन से जुड़े प्रावधान के अमल पर रोक रहेगी।
आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह बनाए गए तीनों नए कानून को एक जुलाई 2024 से अमल में लाने के लिए नोटिफाई किया जा चुका है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य एक्ट को एक जुलाई से लागू किया जाएगा, लेकिन नोटिफिकेशन में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने भारतीय न्याय संहिता की धारा-106 (2) को फिलहाल होल्ड कर दिया है यानी धारा-106 (2) फिलहाल लागू नहीं होगा यह प्रावधान हिट एंड रन से जुड़े अपराध से जुड़ा हुआ है।
संसद से तीनों कानूनों को 21 दिसंबर 2023 को पास हो गया था जिसके बाद राष्ट्रपति ने इस पर 25 दिसंबर 2023 को मुहर लगा दी थी। पुराने औपनिवेशिक काल के कई शब्दावली को हटा दिया गया है। ऐसे करीब 475 शब्दों को डिलीट किया गया है जिनमें लंदन गजट, ज्यूरी, हर हैनिस आदि शामिल हैं। पहले जहां चार सौ बीस (420) यानी धोखाधड़ी, दफा 302 यानी हत्या व 376 यानी रेप जैसे अपराध के लिए कानून की किताब में लिखी धाराएं लोगों के जुबान पर चढ़ी हुई थी वह सब अब बदल गई है। भारतीय न्याय संहिता में कुल 358 धाराएं हैं और उसमें 20 नए अपराध को परिभाषित किया गया है। राजद्रोह जैसे अपराध को अब नए कानून में हटा दिया गया। बीएन 2 संहिता की धारा-113 में आतंकवाद से संबंधित परिभाषा और सजा काि प्रावधान है। सीआरपीसी में जहां कुल 484 धाराएं थीं वहीं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। कुल 177 ऐसे प्रावधान हैं जिसमें संशोधन हुआ है।
बीएनएसएस, 2023 में सबूतों के मामले में ऑडियो-विडियो इलेक्ट्रॉनिक्स तरीके से जुटाए जाने वाले सबूतों को प्रमुखता दी गई है। नए कानून में किसी भी अपराध के लिए जेल में अधिकतम सजा काट चुके कैदियों को उसके निजी बॉन्ड पर रिहा करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कुल 170 धाराएं होंगी ।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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