झारखंड,20 अगस्त 2025 (यूटीएन)। चंदनकियारी क्षेत्र में इलेक्ट्रोस्टील वेदांता इस्पात संयंत्र द्वारा मौजा भागाबॉंध में सैकड़ों डिसमिल कृषि भूमि पर जलजमाव के माध्यम से कब्जा करने के विरोध में झारखंड शोषण मुक्ति उलगुलान मंच के नेतृत्व में शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू हुआ। इस दौरान अलकुशा मोड़ पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को उकसाने का प्रयास किया और क्रूर लाठीचार्ज किया, जिसमें महिला कार्यकर्ता संध्या देवी सहित अनेक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर उन पर झूठे मुकदमे दर्ज करने की साजिश रची, जिससे क्षेत्र में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
किसान संग्राम समिति के केंद्रीय सदस्य कॉमरेड गयाराम शर्मा ने इस घटना की कठोर निंदा करते हुए बोकारो उपायुक्त को पत्र लिखकर और अधिकारियों से वार्ता कर निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई, घायल आंदोलनकारियों के लिए समुचित चिकित्सा सुविधा और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। शर्मा ने कहा, “वेदांता के सियालजोरी प्रबंधन ने किसानों की भूमि जबरन हड़पने, मजदूरों के रोजगार को नष्ट करने और संयंत्र के प्रदूषण से जनजीवन को संकट में डालने का कार्य किया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

मानव अधिकार कार्यकर्ता साजिद हुसैन ने चेतावनी दी कि यदि रैयतों की भूमि पर जलजमाव की समस्या का समाधान और उनके नियोजन की गारंटी नहीं दी गई, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा, जिसकी जिम्मेदारी बोकारो जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बोकारो पुलिस, इलेक्ट्रोस्टील और वेदांता इस्पात संयंत्र के इशारे पर कार्य कर रही है और निर्दोष रैयतों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उनकी भूमि हड़पने का षड्यंत्र रच रही है, जिससे कई लोग अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
किसान संग्राम समिति ने सियालजोरी थाना प्रभारी मनीष कुमार द्वारा कथित रूप से फर्जी गंभीर चोट के दावे और बोकारो स्टील सिटी सेक्टर 4 में जाली सिटी स्कैन कराने के प्रयास की कड़े शब्दों में निंदा की। समिति ने मांग की कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो, थाना प्रभारी के दावों की चिकित्सा बोर्ड से जांच कराई जाए और पुलिस को निजी कंपनियों के हितों के बजाय रैयतों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करने का निर्देश दिया जाए।
किसान संग्राम समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए एकजुट होकर संघर्ष को और सशक्त करने का संकल्प लिया। समिति ने घोषणा की कि 9 सितंबर को उपायुक्त के साथ वार्ता होगी। समिति ने सभी रैयतों और मजदूरों से अपील की कि वे इस अन्याय के खिलाफ संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करें, ताकि उनकी भूमि और अधिकार सुरक्षित रह सकें।
झारखंड- गयाराम शर्मा |