खेकड़ा,09 अगस्त 2025 (यूटीएन)। कस्बे के संस्कृत महाविद्यालय में शनिवार को श्रावणी महापर्व के अवसर पर विधिविधान से यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हुआ। प्रातःकाल नवीन ब्रह्मचारियों ने यमुना स्नान कर ऋषि तर्पण और ऋषि पूजन किया। इसके साथ ही विश्व संस्कृत दिवस भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य रामेश्वर शर्मा ने श्रावणी उपाकर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व श्रावण मास की श्रवण नक्षत्र युक्त पूर्णिमा को मनाया जाता है। साथ ही विधिविधान से इसका पालन करने पर ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘श्रावणी’ शब्द ‘श्रवण’ से बना है, जिसका अर्थ कान होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु शिष्य के कान में गुरु मंत्र का उपदेश देते हैं और ठीक एक माह बाद यह पर्व मनाया जाता है।
गुरु रामेंद्र शर्मा ने यज्ञोपवीत के नियमों की विस्तृत जानकारी दी और संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विश्व संस्कृत दिवस के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर अमित कुमार, देवेंद्र कुमार शर्मा, सुनील कुमार तिवारी, रोहित मिश्र, सुनील जोशी, राकेश बलोधी, राकेश तिवारी, विवेक मिश्र समेत विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
स्टेट ब्यूरो,( डॉ योगेश कौशिक ) |