नई दिल्ली, 30 अगस्त 2025 (यूटीएन)। केंद्र सरकार ने सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो मंत्रियों के समूह के साथ-साथ दो उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया है। इनका मकसद नागरिकों और कारोबारियों के लिए जीवन आसान बनाना है। साथ ही, बड़े प्रोजेक्ट्स और योजनाओं को लागू करना भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर सुधारों के लिए एक टास्क-फोर्स बनाने की बात कही थी। इसके बाद ही ये कमेटियां बनी हैं। इस उच्च स्तरीय कमेटियों का नेतृत्व नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा करेंगे। वे पहले कैबिनेट सचिव थे।
*कमेटी में प्राइवेट सेक्टर के लोग भी होंगे शामिल*
इस 10 सदस्यों वाली कमेटी में प्राइवेट सेक्टर के लोग और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी देखेगी कि अभी के कानून, नियम और रेगुलेशन कितने सही हैं। यह भी देखेगी कि क्या वे आर्थिक गतिविधियों के लिए जरूरी हैं। कमेटी इन सब चीजों को आसान बनाने के लिए सुझाव देगी।
हालांकि, यह कमेटी वित्तीय सेक्टर से जुड़े मामलों को नहीं देखेगी। कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, अन्य मामलों में इन्हें हटाने पर विचार किया जा सकता है। यह प्रक्रिया सरकार की वर्तमान नीतियों के अनुरूप होनी चाहिए।कमेटी एमएसएमई, विदेशी व्यापार, बीआईएस और एफएसएसएआई जैसी सर्टिफिकेशन एजेंसियों और कंपनी कानून के तहत नियमों पर खास ध्यान देगी। पर्यावरण से जुड़े कानूनों को भी देखा जाएगा।
*क्या होगा कमेटी का काम?*
सरकार द्वारा गठित की गई कमेटी यह भी देखेगी कि कारोबारियों को टैक्स भरने में क्या दिक्कतें आती हैं। कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनी कमेटी में कई मंत्रालयों के सचिव और पवन गोयनका शामिल हैं। पवन गोयनका भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र के चेयरमैन हैं। यह कमेटी आत्मनिर्भर भारत के तहत संभावित क्षेत्रों और योजनाओं की पहचान करेगी। उम्मीद है कि ये दोनों कमेटियां आने वाले हफ्तों में सरकार को सुझाव देंगी। इससे सरकार आत्मनिर्भरता के प्रयासों को और तेजी से आगे बढ़ा पाएगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।