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‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ ने भारत-रूस मैत्री के रिश्तों को दी नई मजबूती

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नई दिल्ली,29  सितम्बर  2026  (यूटीएन)। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को सांस्कृतिक सहभागिता, महिला नेतृत्व और जन-जन के संपर्क के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से रूसी हाउस, नई दिल्ली में ‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ विषय पर रूसी और भारतीय महिलाओं का विशेष संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दोनों देशों की महिला प्रतिनिधियों, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, संस्थाओं और युवाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और रूस के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को लोगों के स्तर पर और व्यापक बनाना तथा महिलाओं की भूमिका को सामने लाना रहा। संवाद के दौरान वक्ताओं ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल सरकारी और संस्थागत सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, महिला नेतृत्व, युवा सहभागिता और आपसी संपर्क के माध्यम से इन्हें और व्यापक बनाया जा सकता है।

इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन रूसी स्पीकिंग विमेन इन एशिया ट्रस्ट, रूसी हाउस ऑफ साइंस एंड कल्चर, रूसी संघ का दूतावास तथा ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) की ओर से किया गया।

महिलाओं को बनाया संवाद का केंद्र

‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ कार्यक्रम में महिलाओं की भूमिका को भारत-रूस संबंधों के एक महत्वपूर्ण आयाम के रूप में सामने रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं परिवार, समाज, शिक्षा, संस्कृति और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं और इस वजह से वे विभिन्न समुदायों तथा देशों के बीच संवाद स्थापित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।

संवाद के दौरान महिला नेतृत्व, सांस्कृतिक समझ, आपसी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों की महिलाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान नए सहयोग के अवसर पैदा कर सकता है।

वक्ताओं के अनुसार, सांस्कृतिक समानताओं और पारस्परिक सम्मान को आधार बनाकर दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। महिला प्रतिनिधियों के बीच ऐसे संवाद भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं, शैक्षणिक संपर्क और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आधार तैयार कर सकते हैं।

जीटीटीसीआई ने जताई प्रतिबद्धता

कार्यक्रम में ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने सहभागिता की। उन्होंने भारत-रूस संबंधों को सांस्कृतिक एवं संस्थागत आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क के माध्यम से मजबूत करने वाली पहलों के प्रति जीटीटीसीआई की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी दो देशों के बीच संबंधों को दीर्घकालिक आधार देने में सरकारी स्तर के साथ-साथ जनस्तर का संपर्क भी महत्वपूर्ण होता है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, संवाद मंच और महिला एवं युवा सहभागिता दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

जीटीटीसीआई के बोर्ड सदस्य सुमित वर्मा और डॉ. उर्वशी मित्तल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने भारत-रूस के बीच संस्थागत और सामाजिक स्तर पर सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।

भारतीय पैनल में महिला प्रतिनिधियों ने रखे विचार

भारतीय पैनल में आश्मीन के. मुंजाल, जुही राजपूत, पूर्णिमा गुप्ता और डॉ. उर्वशी मित्तल ने भाग लिया। पैनल चर्चा के दौरान भारत-रूस संबंधों में महिलाओं की भूमिका, सांस्कृतिक समझ और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर विचार साझा किए गए।

प्रतिनिधियों ने इस बात पर चर्चा की कि महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व और संवाद के अवसर मिलने से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दोनों देशों के नागरिकों के बीच बेहतर समझ विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

महिला प्रतिनिधियों ने शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक संपर्क और युवा भागीदारी जैसे क्षेत्रों में संवाद को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी अपने विचार रखे। चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि लोगों के बीच सीधे संपर्क से देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को मजबूत आधार मिल सकता है।

रूसी प्रतिनिधियों ने भी साझा किए अनुभव

रूसी पक्ष की ओर से इंडियन एसोसिएशन ऑफ रशियन कम्पैट्रियट्स की अध्यक्ष एलेना बार्मन ने सहभागिता की। उन्होंने भारत और रूस के बीच जन-जन के संपर्क और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संपर्क को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, नागरिकों और सांस्कृतिक समूहों के बीच लगातार संवाद दोनों देशों की पारंपरिक मैत्री को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक हो सकता है।

वहीं रूसी संघ के दूतावास की काउंसलर (संस्कृति) इयूलिया अरियावा ने अपने संबोधन में निरंतर संवाद, पारस्परिक समझ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भारत-रूस संबंधों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां लोगों को एक-दूसरे के इतिहास, परंपराओं और सामाजिक जीवन को समझने का अवसर देती हैं। इस तरह के मंच दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संबंधों को और व्यापक बनाने में भूमिका निभा सकते हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भारतीय विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति की विविधता, परंपरा और युवा प्रतिभा का प्रदर्शन देखने को मिला।

विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद भारतीय और रूसी प्रतिनिधियों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का वातावरण बनाया। आयोजन के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य के सांस्कृतिक संवाद के सक्रिय सहभागी भी बन सकते हैं।

आयोजकों के अनुसार, सांस्कृतिक सत्र का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सामने रखने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद से जोड़ना था।

युवाओं की भूमिका पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी को भारत-रूस संबंधों के भविष्य से जोड़कर देखा गया। युवा पीढ़ी शिक्षा, संस्कृति, तकनीक और रचनात्मक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संपर्क को नई दिशा दे सकती है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल सरकारों और संस्थाओं के बीच होने वाले समझौतों तक सीमित नहीं हैं। विद्यार्थी, कलाकार, शोधकर्ता, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा पेशेवर भी देशों के बीच संवाद के महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।

इस दृष्टि से भारतीय विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि युवा पीढ़ी सांस्कृतिक विविधता को समझने और साझा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मित्रता को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे सकती है।

सांस्कृतिक कूटनीति को मिला मंच

‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ कार्यक्रम में सांस्कृतिक संबंधों को दोनों देशों की मैत्री का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। भारत और रूस के बीच लंबे समय से शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क के विभिन्न माध्यमों से संबंध रहे हैं।

कार्यक्रम में इन संबंधों को नई पीढ़ी और विशेष रूप से महिला नेतृत्व के माध्यम से आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। महिलाओं के बीच संवाद, सांस्कृतिक संस्थानों की सहभागिता और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को भविष्य के सहयोग के संभावित क्षेत्रों के रूप में सामने रखा गया।

इस तरह का संवाद सांस्कृतिक कूटनीति के उस स्वरूप को भी सामने लाता है, जिसमें नागरिक और सामाजिक संस्थाएं देशों के बीच समझ बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं।

प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के अंत में प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इसमें कार्यक्रम में योगदान देने वाले प्रतिभागियों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया। आयोजन से जुड़े लोगों ने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

प्रमाण-पत्र वितरण के दौरान प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के साथ संवाद किया और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।

संवाद से सहयोग की नई संभावनाएं

‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ की मूल भावना संवाद, संस्कृति, सहयोग और आपसी सम्मान के माध्यम से भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रही। कार्यक्रम ने महिला प्रतिनिधियों, युवाओं, सांस्कृतिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया।

कार्यक्रम में हुई चर्चाओं ने यह रेखांकित किया कि भारत और रूस के बीच संबंधों को व्यापक बनाने में लोगों के बीच संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। महिला नेतृत्व और युवा भागीदारी को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर सहयोग के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।

आयोजकों के अनुसार, भविष्य में भी ऐसे संवाद मंच भारत और रूस के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और अनुभवों को समझने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मैत्रीपूर्ण संबंधों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर और व्यापक आधार मिल सकता है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि मैत्री केवल औपचारिक संबंधों से नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, सांस्कृतिक सहभागिता और लोगों के बीच मजबूत संपर्क से भी आगे बढ़ती है। ‘वूमेन बिल्डिंग ब्रिज’ इसी सोच के साथ भारत-रूस के बीच महिला नेतृत्व और सांस्कृतिक संवाद के एक साझा मंच के रूप में सामने आया।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







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