बड़ौत,16 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। धर्मनगरी बड़ौत के अजितनाथ सभागार में आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन विश्व शांति महायज्ञ सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की आराधना कर विश्व में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। धार्मिक आयोजन के समापन पर विधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मुख्य पात्रों का मांगलिक यंत्र भेंट कर स्वागत और सम्मान किया गया। वहीं, शाम को पूर्व प्राचार्य वकील चंद जैन सहित पांच दीक्षार्थियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के बाद आचार्य श्री के सान्निध्य में दीक्षार्थियों की गोद भराई की रस्म संपन्न हुई।
जिनाभिषेक, शांतिधारा और पूजन के साथ शुरू हुए अनुष्ठान
आठ दिवसीय धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन सुबह जिनाभिषेक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सौधर्म इंद्र राजेश जैन ने भगवान की शांतिधारा की। इसके बाद विधि-विधान से पूजन किया गया। विधानाचार्य पंडित सनत कुमार जैन और पंडित विनोद कुमार जैन के निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इस दौरान 1008 अर्घ्य समर्पित कर श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना की और धर्मलाभ अर्जित किया।
विधान में श्रीपाल इंद्र और मैना सुंदरी का सौभाग्य वरदान जैन और नीलू जैन को प्राप्त हुआ। धार्मिक क्रियाओं में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे सभागार में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के गुणों का स्मरण करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
विधान की पूर्णता पर आयोजित विश्व शांति महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुतियां समर्पित कीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे अनुष्ठान आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और विश्व कल्याण की भावना को मजबूत करते हैं। आठ दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। अंतिम दिन भी धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
आचार्य श्री ने दिया धर्म और आत्मशुद्धि का संदेश
समापन अवसर पर आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने और पुण्य अर्जित करने का संदेश दिया। उन्होंने आध्यात्मिक जीवन में सदाचार, संयम और आत्मचिंतन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के माध्यम से श्रद्धालुओं को सिद्ध परमेष्ठी के गुणों का स्मरण करने और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला। आयोजन के दौरान पूजा-अर्चना के साथ आध्यात्मिक चिंतन पर भी जोर दिया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक क्रियाओं में भाग लेकर आत्मिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव किया।
आठ दिवसीय आयोजन के सफल समापन पर विधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मुख्य पात्रों का मांगलिक यंत्र भेंट कर सम्मान किया गया। समाज के लोगों ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले श्रद्धालुओं और सहयोगियों की सराहना की। पूरे आयोजन के दौरान सामूहिक सहभागिता, धार्मिक अनुशासन और भक्ति का विशेष वातावरण बना रहा।
वकील चंद जैन सहित पांच दीक्षार्थियों की निकली शोभायात्रा
धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के बाद शाम को पांच दीक्षार्थियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इनमें दिगंबर जैन इंटर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य वकील चंद जैन भी शामिल रहे। शोभायात्रा में सभी पांचों दीक्षार्थी बग्गियों पर सुशोभित थे। समाज के लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ शोभायात्रा में भाग लिया।
शोभायात्रा गांधी रोड से प्रारंभ हुई और नेहरू मूर्ति तथा महावीर मार्ग से होते हुए अजितनाथ सभागार मंडी पहुंची। मार्ग में धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। शोभायात्रा के माध्यम से समाज के लोगों ने दीक्षार्थियों के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया। जैन परंपरा में दीक्षा को सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण संकल्प माना जाता है। ऐसे में दीक्षार्थियों की शोभायात्रा समाज के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।
अजितनाथ मंदिर कमेटी और सकल जैन समाज ने की गोद भराई
शोभायात्रा के अजितनाथ सभागार मंडी पहुंचने के बाद आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के सान्निध्य में पांचों दीक्षार्थियों की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई गई। श्री अजितनाथ मंदिर कमेटी और सकल जैन समाज के लोगों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार दीक्षार्थियों का सम्मान किया और उनके भावी संयम जीवन के लिए मंगलकामना की।
इस अवसर पर समाज के श्रद्धालुओं ने दीक्षार्थियों के त्याग और धार्मिक समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। दीक्षा से पहले आयोजित इस तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में समाज की सहभागिता दीक्षार्थियों के प्रति श्रद्धा, समर्थन और सम्मान को दर्शाती है।
25 अक्टूबर को दिल्ली में संपन्न होगी दीक्षा
मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्य में 25 अक्टूबर को दिल्ली के लाल किला मैदान में पांचों दीक्षार्थियों की दीक्षा संपन्न होगी। दीक्षा कार्यक्रम को लेकर जैन समाज में उत्साह है। बड़ौत में आयोजित शोभायात्रा और गोद भराई के माध्यम से समाज के लोगों ने दीक्षार्थियों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
उन्होंने बताया कि दीक्षार्थियों के जीवन में यह अवसर महत्वपूर्ण है। जैन धर्म में दीक्षा को त्याग, तपस्या, संयम और आध्यात्मिक साधना का मार्ग माना जाता है। दीक्षार्थी सांसारिक जीवन से विरक्त होकर धर्म साधना के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं। इसी भावना के साथ समाज के लोगों ने उनके आगामी जीवन के लिए मंगलकामनाएं कीं।
समाज के लोगों ने लिया भाग
कार्यक्रम में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, नवीन जैन, विकास जैन, संजय जैन, अनिल जैन, संजीव जैन, वीरसेन जैन, रोहित जैन, विवेक जैन, अनुज जैन और ऋषभ जैन सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।
आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन, विश्व शांति महायज्ञ और पांच दीक्षार्थियों की शोभायात्रा ने बड़ौत के जैन समाज में आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बनाया। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, आत्मशुद्धि और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

