नई दिल्ली,11 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के 21वें संस्करण में भारतीय इलीट धावकों के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। रविवार, 18 अक्टूबर को आयोजित होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स गोल्ड लेबल रोड रेस में देश के 42 भारतीय इलीट धावक अपनी प्रतिभा और दमखम का प्रदर्शन करेंगे। इनमें 22 पुरुष और 20 महिला धावक शामिल हैं। पुरुष वर्ग में हरमनजोत सिंह और किरण मात्रे भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे, जबकि महिला वर्ग में पूर्व चैंपियन लिली दास और कविता यादव पर विशेष नजर रहेगी।
देश की राजधानी में होने वाली यह प्रतिष्ठित लंबी दूरी की दौड़ भारतीय एथलेटिक्स प्रतिभाओं के लिए अपनी क्षमता साबित करने का महत्वपूर्ण मंच होगी। इसमें अनुभवी धावकों के साथ ऐसे एथलीट भी भाग लेंगे, जो ट्रैक रेस और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुके हैं। मजबूत भारतीय दल की मौजूदगी से घरेलू धावकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने और दर्शकों को रोमांचक मुकाबले देखने की उम्मीद है।
इस बार पुरुष वर्ग में हरमनजोत सिंह पहली बार दिल्ली हाफ मैराथन में उतरेंगे। वहीं, पिछले संस्करण में भारतीय इलीट पुरुष वर्ग में दूसरा स्थान हासिल करने वाले किरण मात्रे बेहतर प्रदर्शन के इरादे से दौड़ेंगे। महिला वर्ग में लिली दास और कविता यादव अपने अनुभव के दम पर चुनौती पेश करेंगी। इनके अलावा डॉ. कार्तिक करकेरा, प्रिंस कुमार, अंकिता ध्यानी और प्रीति लांबा जैसे प्रमुख नाम भी प्रतियोगिता को दिलचस्प बनाएंगे।
हरमनजोत सिंह पहली बार दिल्ली हाफ मैराथन में दिखाएंगे दम
हरमनजोत सिंह इस समय भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में उभरते हुए प्रमुख नामों में शामिल हैं। टीसीएस वर्ल्ड 10के बेंगलुरु के 2026 भारतीय इलीट चैंपियन और एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता हरमनजोत पहली बार वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में हिस्सा लेंगे।
अलवर टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन में 1 घंटा 1 मिनट 46 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज कर चुके हरमनजोत भारतीय प्रतिभागियों में सबसे तेज धावक हैं। उनका प्रदर्शन इस प्रतियोगिता में भारतीय इलीट पुरुष वर्ग की प्रतिस्पर्धा को और मजबूत बनाता है।
हरमनजोत ने कहा कि बेंगलुरु में मिली जीत और एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उनके अनुसार, दिल्ली हाफ मैराथन देश की कठिन दौड़ों में से एक है और यहां मजबूत इलीट धावकों के बीच प्रतिस्पर्धा करने से खिलाड़ियों को अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने इस प्रतिष्ठित रेस में भाग लेने को अपनी तैयारी और प्रदर्शन को अगले स्तर तक ले जाने का अवसर बताया। पहली बार दिल्ली की सड़कों पर हाफ मैराथन दौड़ने के कारण उनके लिए यह प्रतियोगिता व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण रहेगी।
हाफ मैराथन में धावकों को 21.0975 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इस दूरी में गति के साथ ऊर्जा का सही प्रबंधन, दौड़ की रणनीति और शुरुआती चरण से अंतिम किलोमीटर तक एकसमान प्रदर्शन बनाए रखना अहम होता है। ऐसे में हरमनजोत के सामने अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि को बेहतर करने की चुनौती भी रहेगी।
किरण मात्रे की नजर बेहतर प्रदर्शन पर
भारतीय इलीट पुरुष वर्ग में किरण मात्रे भी प्रमुख दावेदारों में शामिल होंगे। पिछले संस्करण में वह भारतीय इलीट धावकों के बीच दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने पिछली दिल्ली हाफ मैराथन में 1 घंटा 4 मिनट 57 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था।
किरण के नाम 10 किलोमीटर की दौड़ में 29 मिनट 32 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय भी दर्ज है। वह 2024 टीसीएस वर्ल्ड 10के बेंगलुरु के भारतीय इलीट विजेता रह चुके हैं। इस उपलब्धि से उनकी लंबी दूरी की दौड़ में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का पता चलता है।
दिल्ली हाफ मैराथन में इस बार उनके सामने मजबूत प्रतिद्वंद्वी होंगे। ऐसे में पिछली बार के प्रदर्शन में सुधार करना और भारतीय इलीट वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल करना उनके लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य रहेगा।
किरण का अनुभव उन्हें रेस की गति और प्रतिस्पर्धियों की रणनीति को समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, हाफ मैराथन की लंबी दूरी में अंतिम परिणाम धावकों की तैयारी, उस दिन के प्रदर्शन और पूरे रास्ते गति को संतुलित रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
डॉ. कार्तिक करकेरा और प्रिंस कुमार भी पेश करेंगे चुनौती
हरमनजोत सिंह और किरण मात्रे को 2026 टाटा मुंबई मैराथन के भारतीय इलीट पुरुष विजेता डॉ. कार्तिक करकेरा से कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। करकेरा पिछले वर्ष दिल्ली हाफ मैराथन में भारतीय इलीट पुरुष वर्ग में तीसरे स्थान पर रहे थे।
उनका पिछला प्रदर्शन इस बार की प्रतियोगिता को और प्रतिस्पर्धी बनाता है। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले धावकों के बीच मुकाबले में अनुभव और रेस के दौरान सही रणनीति की अहम भूमिका होगी।
उत्तर प्रदेश के ट्रैक स्टार प्रिंस कुमार भी लंबे अंतराल के बाद हाफ मैराथन में वापसी करेंगे। वह 2025 ओपन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर और 10,000 मीटर के चैंपियन रहे थे। इसके अलावा उन्होंने 2025 साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक जीता था।
ट्रैक रेस में उनकी उपलब्धियां लंबी दूरी की दौड़ में उनकी क्षमता को दर्शाती हैं। हालांकि, ट्रैक पर छोटी दूरी की प्रतियोगिताओं और सड़क पर हाफ मैराथन के बीच शारीरिक तैयारी तथा दौड़ की रणनीति में अंतर होता है। प्रिंस के लिए यह वापसी अपनी क्षमता को एक अलग प्रारूप में साबित करने का अवसर होगी।
भारतीय पुरुष दल में इन धावकों की मौजूदगी से शीर्ष स्थानों के लिए मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। घरेलू स्तर पर मजबूत प्रदर्शन कर चुके खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा युवा धावकों को भी बेहतर तैयारी और प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर सकती है।
महिला वर्ग में लिली दास और कविता यादव पर रहेंगी निगाहें
महिला इलीट वर्ग में पूर्व चैंपियन लिली दास और 2023 की विजेता कविता यादव भारतीय चुनौती का नेतृत्व करेंगी। दोनों धाविकाएं इस प्रतियोगिता में अपने अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर मजबूत चुनौती पेश करने उतरेंगी।
लिली दास ने 2024 में भारतीय इलीट महिला वर्ग का खिताब जीता था। उनके लिए इस बार भी अच्छा प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, कविता यादव 2023 की विजेता होने के कारण प्रतियोगिता के अनुभव और रेस की परिस्थितियों से परिचित हैं।
दिल्ली हाफ मैराथन में महिला वर्ग की प्रतिस्पर्धा भी काफी रोचक रहने की उम्मीद है। लंबी दूरी की सड़क दौड़ में धाविकाओं को अपनी गति बनाए रखने के साथ ऊर्जा का संतुलित इस्तेमाल करना पड़ता है। शुरुआती किलोमीटरों में सही गति चुनना और अंतिम चरण में तेजी बनाए रखना परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
लिली दास और कविता यादव के सामने अन्य भारतीय धाविकाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने की चुनौती होगी। भारतीय इलीट वर्ग में शीर्ष तीन स्थान हासिल करने के लिए उन्हें लगातार मजबूत प्रदर्शन करना होगा।
अंकिता ध्यानी और प्रीति लांबा भी मजबूत दावेदार
महिला वर्ग में अंकिता ध्यानी की मौजूदगी भी प्रतियोगिता को खास बनाएगी। वह ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में स्टीपलचेज स्पर्धा में हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में पहली बार हाफ मैराथन में भाग लिया था और भारतीय इलीट महिला वर्ग में पांचवां स्थान हासिल किया था।
ट्रैक की बाधा दौड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अनुभव अंकिता के लिए महत्वपूर्ण है। हाफ मैराथन में उनकी भागीदारी यह भी दिखाती है कि ट्रैक एथलेटिक्स से जुड़े खिलाड़ी सड़क दौड़ में अपनी क्षमताओं को आजमाने के अवसर तलाश रहे हैं।
हालांकि, स्टीपलचेज और हाफ मैराथन की शारीरिक तथा तकनीकी आवश्यकताएं अलग होती हैं। लंबी दूरी की सड़क दौड़ में धाविका को पूरे मार्ग में गति और सहनशक्ति का संतुलन बनाए रखना होता है। अंकिता के लिए यह प्रतियोगिता अपने अनुभव को नए प्रारूप में आगे बढ़ाने का अवसर होगी।
2023 एशियाई खेलों की 3,000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली प्रीति लांबा भी भारतीय महिला दल को मजबूती देंगी। एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पदक जीतने की उपलब्धि उनके अनुभव को दर्शाती है।
प्रीति की भागीदारी से महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी। लिली दास, कविता यादव, अंकिता ध्यानी और प्रीति लांबा समेत अन्य धाविकाओं के बीच मुकाबला भारतीय इलीट महिला वर्ग के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
भारतीय लंबी दूरी के धावकों के लिए शुरू होगी ‘प्राइड’ पहल
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के इस संस्करण में भारतीय इलीट लंबी दूरी के धावकों के लिए पुरस्कार आधारित एक नई पहल ‘प्राइड’ शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मान देना और उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस पहल के तहत प्रोकेम इंटरनेशनल के आयोजनों में पंजीकृत और सत्यापित भारतीय इलीट लंबी दूरी के धावकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके माध्यम से घरेलू धावकों की उपलब्धियों को अलग पहचान देने और भारतीय इलीट प्रतियोगिता को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जा रहा है।
लंबी दूरी की दौड़ में खिलाड़ियों को वर्षों तक प्रशिक्षण, अनुशासन और नियमित प्रतिस्पर्धा के माध्यम से अपनी क्षमता विकसित करनी पड़ती है। ऐसे में प्रदर्शन आधारित पुरस्कार खिलाड़ियों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के साथ उपलब्धियों को मान्यता देने का माध्यम बन सकते हैं।
‘प्राइड’ पहल भारतीय इलीट पुरुष और महिला वर्ग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले धावकों को पुरस्कृत करेगी। इसके अतिरिक्त नया भारतीय इलीट हाफ मैराथन रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी को भी विशेष पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है।
शीर्ष तीन भारतीय धावकों को मिलेंगे नकद पुरस्कार
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में भारतीय इलीट पुरुष और महिला वर्ग में शीर्ष तीन स्थान हासिल करने वाले धावकों को पुरस्कार राशि दी जाएगी।
-
पहला स्थान: 3.50 लाख रुपये
-
दूसरा स्थान: 2.50 लाख रुपये
-
तीसरा स्थान: 1.50 लाख रुपये
इसके अलावा नया भारतीय इलीट हाफ मैराथन रिकॉर्ड बनाने वाले धावक को एक लाख रुपये का अतिरिक्त पुरस्कार दिया जाएगा।
इस पुरस्कार व्यवस्था से भारतीय धावकों को अपनी उपलब्धियों को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। पुरुष और महिला वर्ग में समान पुरस्कार राशि का प्रावधान भारतीय इलीट धावकों की उपलब्धियों को सम्मान देने की पहल का हिस्सा है।
हालांकि, पुरस्कार राशि के साथ खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियां, खेल पोषण, रिकवरी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर भी महत्वपूर्ण रहते हैं। इन सभी पहलुओं का संयुक्त प्रभाव धावकों के दीर्घकालिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
अविनाश साबले और एल. सूर्या के नाम भारतीय रिकॉर्ड
भारतीय इलीट हाफ मैराथन में मौजूदा रिकॉर्ड भी इस प्रतियोगिता को खास बनाते हैं। पुरुष वर्ग का भारतीय इलीट रिकॉर्ड 60 मिनट 30 सेकंड है, जो अविनाश साबले ने 2020 में बनाया था। महिला वर्ग का रिकॉर्ड 70 मिनट 31 सेकंड है, जो एल. सूर्या के नाम है और वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था।
इन रिकॉर्डों को बेहतर करने के लिए धावकों को गति, सहनशक्ति और रेस प्रबंधन के उच्च स्तर का प्रदर्शन करना होगा। हाफ मैराथन में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के करीब पहुंचना भी किसी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है, जबकि राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना भारतीय एथलेटिक्स के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।
नए रिकॉर्ड पर एक लाख रुपये का अतिरिक्त पुरस्कार खिलाड़ियों को रिकॉर्ड स्तर का प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। हालांकि, रिकॉर्ड बनाने के लिए धावक को निर्धारित तकनीकी और प्रतियोगिता संबंधी नियमों के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा।
पहली बार यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के इस संस्करण की एक और प्रमुख विशेषता इसका यूट्यूब पर सीधा प्रसारण होना है। पहली बार दर्शक इस प्रतिष्ठित सड़क दौड़ को प्रोकेम इंटरनेशनल के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकेंगे।
आयोजकों के अनुसार, रविवार, 18 अक्टूबर को सुबह पांच बजे से रेस का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इससे दिल्ली में मौजूद दर्शकों के अलावा देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले खेल प्रेमियों को भी प्रतियोगिता देखने का अवसर मिलेगा।
डिजिटल प्रसारण के विस्तार से एथलेटिक्स को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से लंबी दूरी की दौड़ में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखने और उनके संघर्ष तथा उपलब्धियों को समझने का अवसर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
सीधे प्रसारण के जरिए दर्शक भारतीय इलीट धावकों की प्रतिस्पर्धा, दौड़ की रणनीति और शीर्ष स्थानों के लिए होने वाले मुकाबले को देख सकेंगे। इससे देश में सड़क दौड़ और लंबी दूरी की एथलेटिक्स के प्रति रुचि बढ़ाने में भी मदद मिलने की संभावना है।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण मंच
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन केवल एक सड़क दौड़ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय लंबी दूरी के धावकों के लिए अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच भी है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर चुके अनुभवी खिलाड़ियों और विभिन्न स्पर्धाओं से आगे आए धावकों को एक साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।
हरमनजोत सिंह की पहली भागीदारी, किरण मात्रे की वापसी, डॉ. कार्तिक करकेरा की चुनौती और प्रिंस कुमार का हाफ मैराथन में लौटना पुरुष वर्ग को विशेष रूप से दिलचस्प बनाता है। वहीं, लिली दास और कविता यादव के अनुभव के साथ अंकिता ध्यानी तथा प्रीति लांबा की मौजूदगी महिला वर्ग में मुकाबले को मजबूत करेगी।
‘प्राइड’ पुरस्कार पहल के माध्यम से भारतीय धावकों की उपलब्धियों को सम्मान देने का प्रयास भी इस संस्करण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदर्शन आधारित पुरस्कार, राष्ट्रीय रिकॉर्ड के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन और लाइव प्रसारण जैसी व्यवस्थाएं प्रतियोगिता की पहुंच तथा भारतीय एथलीटों की पहचान को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।
18 अक्टूबर को होने वाली इस दौड़ में भारतीय इलीट धावकों की नजर अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन को बेहतर बनाने और शीर्ष स्थान हासिल करने पर रहेगी। प्रतियोगिता के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से धावक अपनी तैयारी को परिणाम में बदलते हैं और भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में नई उपलब्धियां दर्ज करते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

