बिनौली,03 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। जिवाना स्थित गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित वेद प्रचार सप्ताह का गुरुवार को वैदिक यज्ञ एवं वेद गोष्ठी के साथ विधिवत समापन हुआ। सप्ताहभर चले कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वेदों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों, यज्ञ परंपरा और वैदिक जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी दी गई। समापन अवसर पर विद्यालय परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने आहुति देकर सुख-शांति एवं विश्व कल्याण की कामना की।
यज्ञ के उपरांत आयोजित वेद गोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान समय में वैदिक संस्कृति और संस्कारों की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी विकास के दौर में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। संस्कारों से जुड़ा युवा ही समाज और राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
वेद भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का आधार
गोष्ठी में यज्ञ के ब्रह्म जितेंद्र उज्ज्वल ने कहा कि वेद भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का मूल आधार हैं। वेदों में मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने के साथ-साथ सत्य, सदाचार, परोपकार, अनुशासन और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि इनमें जीवन को बेहतर और व्यवस्थित बनाने की प्रेरणा मिलती है। वेदों की शिक्षाएं मनुष्य को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के साथ ही समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती हैं।
जितेंद्र उज्ज्वल ने कहा कि आज युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन उसे अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैदिक संस्कृति एवं संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
प्रकृति संरक्षण का भी दिया संदेश
उन्होंने कहा कि वेदों में प्रकृति को विशेष महत्व दिया गया है। जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और पर्यावरण के संरक्षण की भावना वैदिक जीवन पद्धति में दिखाई देती है। वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के सामने खड़ी चुनौतियों के बीच वैदिक विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना जरूरी
गोष्ठी में उन्होंने कहा कि युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कार, सही दिशा और सकारात्मक विचार मिलें तो वह समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
उन्होंने कहा कि परिवार और विद्यालय दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा भी दी जाए। बच्चों में सत्य बोलने, बड़ों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने जैसे संस्कार विकसित किए जाने चाहिए।
वेद प्रचार सप्ताह का उद्देश्य बताया
विद्यालय के प्रबंधक डॉ. अनिल आर्य ने कहा कि वेद प्रचार सप्ताह आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज को वैदिक विचारधारा, यज्ञ, संस्कार एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी देना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे वेदों में बताए गए सत्य, अनुशासन, संयम, सेवा और परोपकार के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं।
डॉ. अनिल आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी समृद्ध परंपराओं और संस्कारों से है। वैदिक जीवन मूल्यों को अपनाकर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास करने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी बन सकता है।
जीवन में आत्मसात करें वैदिक शिक्षाएं
उन्होंने कहा कि वेद प्रचार सप्ताह केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उद्देश्य तभी सफल होगा, जब विद्यार्थी यहां से मिली शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।
उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से अच्छे साहित्य का अध्ययन करने, अपने माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने, अनुशासन का पालन करने और समाज के प्रति सकारात्मक सोच रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान के साथ-साथ व्यवहार और चरित्र को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अपने चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए।
वैदिक यज्ञ से गूंजा विद्यालय परिसर
समापन कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ से हुई। यज्ञ के दौरान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने यज्ञ में आहुति देकर सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
यज्ञ के दौरान विद्यालय परिसर का वातावरण आध्यात्मिक एवं शांतिमय बना रहा। विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक यज्ञ में सहभागिता की और वैदिक परंपरा को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया।
विद्यार्थियों को बताए भारतीय संस्कृति के मूल्य
वेद प्रचार सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की विभिन्न विशेषताओं से परिचित कराया गया। उन्हें बताया गया कि भारतीय संस्कृति में सत्य, अहिंसा, सेवा, त्याग, परोपकार, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना पैदा करने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
गोष्ठी में हुई वैदिक विचारों पर चर्चा
उप प्रधानाचार्य डॉ. सुशील वत्स के संचालन में आयोजित वेद गोष्ठी में वक्ताओं ने वैदिक जीवन पद्धति, संस्कारों और वर्तमान समाज में उनकी उपयोगिता पर चर्चा की। विद्यार्थियों को वेदों के मूल संदेश और उनके व्यावहारिक महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति को मजबूत बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए विद्यालयों में समय-समय पर इस प्रकार के आयोजन होते रहने चाहिए।
शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया संकल्प
समापन अवसर पर विद्यालय परिवार ने वैदिक मूल्यों को जीवन में अपनाने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन, परिश्रम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर निदेशक डॉ. सुनील आर्य, प्रधानाचार्य पवन कुमार त्यागी, कुणाल आर्य, ऋषिपाल सिंह, चंद्रवीर सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

