खेकड़ा,27 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। नई बस्ती स्थित श्री सेन भक्त मंदिर प्रांगण में संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में विशाल संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। समागम में मेरठ, बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली, दिल्ली, सोनीपत और फरीदाबाद समेत विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सत्संग और आध्यात्मिक विचारों से सराबोर कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ संतों के प्रवचन सुने और भजन-कीर्तन का आनंद लिया।
समागम का वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने संतों के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना तथा मानव जीवन के उद्देश्य, भक्ति, सेवा, सद्भाव और जागरूकता जैसे विषयों पर दिए गए संदेशों को आत्मसात करने का प्रयास किया।
मुख्य वक्ता यशवीर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जागृति के बिना सच्ची भक्ति संभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में केवल धार्मिक गतिविधियां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अपने विचारों, कर्मों और व्यवहार के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है और अपने कर्मों को समझने का प्रयास करता है, तभी वह भक्ति के वास्तविक भाव को समझ सकता है।
उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ संसार से भाग जाना नहीं है। भक्ति तो जीवन के बीच रहकर स्वयं को सदैव जागृत और सजग रखने का नाम है। मनुष्य अपने परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी परमात्मा से जुड़ा रह सकता है। सच्चे हृदय और निर्मल भाव से की गई भक्ति ही मनुष्य को ईश्वर के निकट ले जाने का माध्यम बनती है।
संतों का जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित
यशवीर महाराज ने कहा कि संतों का जीवन केवल अपने सुख-दुख तक सीमित नहीं होता। संत अपने व्यक्तिगत कष्टों की चिंता किए बिना समाज और जनमानस के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य मानव जीवन को सही दिशा देना और लोगों के भीतर प्रेम, सेवा, सद्भाव तथा परोपकार की भावना जागृत करना होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए। दूसरों के प्रति प्रेम और सम्मान रखना, जरूरतमंद की सहायता करना तथा समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में अच्छे विचारों को स्थान दें और दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनें। केवल पूजा-पाठ तक भक्ति को सीमित न रखकर उसके संदेश को अपने व्यवहार में उतारने का प्रयास किया जाना चाहिए।
संत ओम प्रकाश की बरसी पर हुआ आयोजन
यह विशाल संत समागम संत ओम प्रकाश की बरसी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने संत ओम प्रकाश को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन से जुड़े आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेशों को याद किया।
आयोजकों ने बताया कि समागम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक विचारों से जोड़ना तथा समाज में प्रेम, शांति, सेवा और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना रहा। विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण मंदिर प्रांगण में पूरे दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
सत्संग के दौरान बाबूराम, मांगेराम, अंकित और सौरभ ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर धुन और आध्यात्मिक भाव से वातावरण भक्तिरस से भर गया। श्रद्धालु भजनों में भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
भक्तिमय प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कई श्रद्धालु भजनों के साथ आध्यात्मिक भाव में डूबे दिखाई दिए।
मानव जीवन में जागृति को बताया आवश्यक
यशवीर महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन के प्रत्येक कार्य के प्रति सजग रहना चाहिए। जागृति केवल बाहरी दुनिया को देखने का नाम नहीं, बल्कि अपने विचारों और कर्मों को पहचानने की अवस्था भी है। जब व्यक्ति अपने भीतर के विकारों को पहचानता है और उन्हें दूर करने का प्रयास करता है तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध, अहंकार, लोभ और द्वेष जैसी भावनाएं मनुष्य को भीतर से कमजोर करती हैं। इसके विपरीत प्रेम, करुणा, क्षमा, सेवा और संतोष जैसे गुण मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में अच्छे गुणों को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ाने का संदेश
समागम में सामाजिक एकता और भाईचारे पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सुख-शांति तभी कायम रह सकती है, जब लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना रखें। जाति, वर्ग, क्षेत्र अथवा अन्य भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में तनाव और आपसी दूरी को कम करने के लिए आध्यात्मिक विचारों और सत्संग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। लोगों को अपने जीवन में सेवा और परोपकार को स्थान देना चाहिए तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
समागम में श्रद्धालुओं ने संतों के विचारों को सुना और आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में आयोजकों एवं सेवादारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर मुखी रमेश, राज सिंह, सतीश, मनीष, मनोज, अमित, राजेश, कविता, सुनीता, नीतू, डोली, अवनि, लवी सहित अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजकों ने सभी संतों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
समागम के समापन पर श्रद्धालुओं ने संतों के संदेश को मानव जीवन में उतारने, समाज में प्रेम एवं भाईचारा बढ़ाने और जरूरतमंदों की सेवा करने का संदेश लेकर कार्यक्रम से विदाई ली।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

