बड़ौत, 06 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। चौधरी केहर सिंह एजुकेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में महर्षि दयानंद सरस्वती वैदिक महाविद्यालय के प्रांगण में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ के साथ हुआ। समारोह में देश के 18 राज्यों से पहुंचे सैकड़ों शिक्षकों को उनके शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
समारोह में विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षकों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अनुभव साझा किए। आयोजकों ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके सम्मान से नई पीढ़ी को भी शिक्षा तथा संस्कार के प्रति प्रेरणा मिलती है।
शिक्षा के माध्यम से ही राष्ट्र का उत्थान संभव : केपी मलिक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यमंत्री केपी मलिक ने कहा कि शिक्षक समाज का सच्चा मार्गदर्शक होता है। वह विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही राष्ट्र का वास्तविक उत्थान किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक के लिए शिक्षा आवश्यक है, क्योंकि शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझते हुए देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का आधार उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और इस व्यवस्था को मजबूत बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने सम्मानित होने वाले सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की।
शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : मनीषा अहलावत
मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य मनीषा अहलावत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है। शिक्षक ही बच्चों के ज्ञान का वर्धन करने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व को सही दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। एक शिक्षक अपनी मेहनत, अनुभव और ज्ञान के माध्यम से बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। शिक्षक केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों का विकास भी करता है।
उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी को मजबूत और संस्कारित बनाना है तो शिक्षकों को भी समाज में उचित सम्मान और सहयोग दिया जाना चाहिए। उन्होंने देशभर से आए शिक्षकों को सम्मानित होने पर बधाई दी।
अभिभावकों के विश्वास पर खरा उतरना हमारा दायित्व : धीरेंद्र कुमार
विशिष्ट अतिथि आगरा मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक धीरेंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर काफी सजग हैं। उन्होंने कहा कि आज कई बार लोग अपने रिश्तेदारों पर भी उतना विश्वास नहीं करते, लेकिन शिक्षक पर भरोसा करते हुए अपने बच्चों को विद्यालय भेजते हैं।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों का यह विश्वास शिक्षकों के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। हमें उनके विश्वास पर खरा उतरते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें अच्छे संस्कार भी देने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक और अभिभावक मिलकर ही बच्चे के बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
युवा पीढ़ी को संस्कारित करने की जिम्मेदारी शिक्षक की : एसपी
समारोह में जनपद बागपत के पुलिस अधीक्षक सूरज राय ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका एक गुरु के रूप में दिखाई देती है। बदलते दौर में बच्चों और युवाओं के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। ऐसे समय में उन्हें सही दिशा दिखाने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को संस्कारित करने और उन्हें समाज एवं राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाकर उन्हें बेहतर नागरिक बना सकते हैं।
आधुनिक ज्ञान और वैदिक मूल्यों के बीच सेतु है गुरु : डॉ. मनीष तोमर
कार्यक्रम में डॉ. मनीष तोमर ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी तकनीकी कौशल तो सीख लेते हैं, लेकिन कई बार चरित्र निर्माण और आत्मज्ञान पीछे छूट जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन ही वह कड़ी है, जो आधुनिक ज्ञान और वैदिक मूल्यों के बीच सेतु का कार्य करता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।
18 राज्यों के सैकड़ों शिक्षक हुए सम्मानित
चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा सम्मानित 18 राज्यों के सैकड़ों शिक्षकों को समारोह में सम्मानित किया गया। शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह एवं पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया।
आयोजकों ने कहा कि पौधा पर्यावरण संरक्षण और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। शिक्षक समाज को ज्ञान देने के साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तैयार करते हैं, वहीं पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण का संदेश देता है।
सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों ने भी आयोजन के लिए चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के समारोह शिक्षकों को अपने दायित्वों के प्रति और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
देशभर से पहुंचे शिक्षक
समारोह में दिल्ली से पहुंचे डॉ. राकेश अरोड़ा, डॉ. गीतांजलि तोमर, डॉ. तरुण तोमर, डॉ. शस्या तोमर, प्रधानाचार्य रामपाल सिंह तोमर, विकास मलिक, प्रो. सुरेंद्र पाल आर्य, धर्मपाल त्यागी, रवि शास्त्री, कपिल आर्य, अरुण मलिक, लाल बहादुर मौर्य, बबीता तोमर, डॉ. आदित्य तोमर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था, नई शिक्षा पद्धतियों, विद्यार्थियों में संस्कार निर्माण तथा आधुनिक तकनीक के साथ वैदिक मूल्यों को जोड़ने जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए। यज्ञ और वैदिक मंत्रोच्चार से शुरू हुआ समारोह शिक्षकों के सम्मान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए संपन्न हुआ।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

