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सेवा संकल्प यात्रा: सेवा हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए—पीएम मोदी

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नई दिल्ली,24  सितम्बर  2026  (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘सेवा संकल्प यात्रा’ में शामिल प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने यात्रा में शामिल सेवा यात्रियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि सेवा को केवल भाषणों और उपदेशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से सेवा की भावना को समाज तक पहुंचाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा ही मुख्य मकसद होना चाहिए और कार्यकर्ताओं का आचरण लोगों को सेवा का संदेश देने वाला होना चाहिए।

‘सेवा संकल्प यात्रा’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है। यात्रा में शामिल सेवा यात्री अलग-अलग समूहों में साइकिल के माध्यम से यात्रा कर रहे हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य विभिन्न कस्बों, जिलों, तहसीलों और गांवों तक पहुंचकर सेवा, सामाजिक भागीदारी और जनसरोकार से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाना बताया गया है।

सेवा से ही समाज में पहुंचता है सकारात्मक संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिभागियों से कहा कि सेवा को जीवन और सार्वजनिक कार्यों का मूल उद्देश्य बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल सेवा का उपदेश देने के बजाय स्वयं सेवा के कार्य करने चाहिए। जब कोई व्यक्ति अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से सेवा की भावना को प्रदर्शित करता है तो उसका प्रभाव समाज पर अधिक पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “सेवा हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए। हमें सिर्फ उपदेश देकर नहीं, बल्कि खुद सेवा करके सेवा का संदेश देना चाहिए। हम अपने कामों से सेवा का संदेश देंगे, सिर्फ बातों से नहीं।”

उन्होंने यात्रा में शामिल लोगों को अपनी सेहत और सुरक्षा का ध्यान रखने की भी सलाह दी। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, अनुशासन और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

राजनीतिक शक्ति के बावजूद सेवा का रास्ता

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सार्वजनिक जीवन और सेवा के संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को चाहे कितनी भी राजनीतिक शक्ति या जिम्मेदारी प्राप्त हो जाए, उसके व्यवहार में सेवा की भावना बनी रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सेवा यात्रियों का व्यवहार लोगों को यह संदेश देने वाला होना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के बावजूद समाज और जनता के प्रति सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा व्यवहार लोगों को यह दिखाना चाहिए कि चाहे हमें कितनी भी बड़ी राजनीतिक ताकत क्यों न मिले, हमारा रास्ता सेवा का ही रहता है।”

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि सेवा का यह संकल्प किसी पद या उपलब्धि से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर सामाजिक दायित्व के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए।

‘सेवा परमो धर्म’ के सिद्धांत का उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा के रास्ते से कभी भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्म’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में कितनी भी ऊंचाइयां हासिल हों, सेवा की भावना को प्राथमिकता मिलती रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम सेवा के इस रास्ते से कभी नहीं भटकेंगे। हम चाहे कितनी भी बड़ी ऊंचाइयां हासिल कर लें, हम हमेशा ‘सेवा परमो धर्म’ के सिद्धांत का पालन करते हुए आगे बढ़ेंगे।”

प्रधानमंत्री के अनुसार, यात्रा में शामिल सभी समूहों का उद्देश्य सेवा की भावना को समाज के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना है।

पुरानी कहावत का जिक्र

सेवा यात्रियों से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने एक पुरानी कहावत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति यात्रा से लौटता है और लोग उसका सम्मान करते हैं, तो उस यात्रा से प्राप्त आध्यात्मिक पुण्य का आधा हिस्सा प्रणाम करने वाले व्यक्ति को भी प्राप्त होता है।

इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भी सभी ‘सेवा यात्रियों’ को नमन कर रहे हैं और इस प्रकार उनके द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों में अपना भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “एक पुरानी कहावत है कि जब कोई यात्रा से लौटता है और आप उन्हें प्रणाम करते हैं, तो उस यात्रा से मिले आध्यात्मिक पुण्य का आधा हिस्सा प्रणाम करने वाले व्यक्ति को मिल जाता है। इसलिए आज, इन सभी ‘सेवा यात्रियों’ को नमन करके, मैं भी उस पुण्य का आधा हिस्सा ले रहा हूं।”

वड़नगर से वाराणसी तक यात्रा

सेवा संकल्प यात्रा के तहत प्रतिभागी वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक की यात्रा कर रहे हैं। कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाली इस यात्रा में विभिन्न टीमें निर्धारित मार्गों से गुजरेंगी।

यात्रा का मार्ग गुजरात के वड़नगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक और फिर वापसी का है। प्रतिभागी रास्ते में आने वाले कस्बों, जिलों, तहसीलों और गांवों से गुजरते हुए लोगों से संपर्क कर रहे हैं।

इस यात्रा को केवल एक लंबी दूरी की साइकिल यात्रा के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सेवा और सामाजिक भागीदारी से जुड़े अभियान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

हजारों किलोमीटर की दूरी तय करेंगी टीमें

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि कुल 35,500 किलोमीटर की दूरी विभिन्न टीमें तय करेंगी। यात्रा में 20 टीमें शामिल होने की बात कही गई है। इन सभी यात्राओं का साझा संकल्प ‘सेवा’ रखा गया है।

लंबी दूरी की इस यात्रा के दौरान प्रतिभागियों का विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय लोगों से संपर्क होगा। गांवों और कस्बों में पहुंचने के साथ सेवा से जुड़े कार्यक्रमों और जनभागीदारी की गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

गांवों और कस्बों तक पहुंचने पर जोर

सेवा संकल्प यात्रा का एक प्रमुख पहलू ग्रामीण और छोटे कस्बाई क्षेत्रों तक पहुंचना है। अभियान से जुड़े प्रतिभागी बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे जिलों, तहसीलों और गांवों से होकर गुजर रहे हैं।

इस तरह के अभियानों में स्थानीय लोगों के साथ संवाद और उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। यात्रा के दौरान सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता से संबंधित गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

झाबुआ के गांव और ‘मोदी फालिया’ का उल्लेख

प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के एक गांव में ‘मोदी फालिया’ नाम रखे जाने का भी उल्लेख हुआ। इसके साथ ही युवाओं के समर्थन और स्थानीय स्तर पर अभियान से जुड़ी गतिविधियों की चर्चा की गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसी स्थान या बस्ती को नया नाम दिए जाने का मुद्दा स्थानीय सामाजिक पहचान और जनभागीदारी से भी जुड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने संवाद के दौरान इस संदर्भ को भी यात्रा और सेवा भावना से जोड़कर देखा।

युवाओं की भागीदारी

सेवा संकल्प यात्रा में युवाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। लंबी दूरी की साइकिल यात्रा में शामिल युवा प्रतिभागी विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए लोगों से संपर्क कर रहे हैं।

युवा वर्ग की भागीदारी के माध्यम से सामाजिक गतिविधियों में स्वयंसेवा, अनुशासन, फिटनेस और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों को भी जोड़ा जा रहा है।

यात्रा से जुड़ा व्यापक संदेश

सेवा संकल्प यात्रा के माध्यम से अभियान से जुड़े आयोजक सेवा को सार्वजनिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का संदेश दे रहे हैं। यात्रा का स्वरूप ऐसा रखा गया है जिसमें प्रतिभागी केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के बजाय रास्ते में पड़ने वाले क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों से संपर्क कर सकें।

प्रधानमंत्री के संवाद में भी इसी भावना पर जोर रहा कि सेवा केवल किसी विशेष अवसर पर किया जाने वाला कार्य नहीं, बल्कि निरंतर अपनाई जाने वाली सोच और व्यवहार का हिस्सा होनी चाहिए।

25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जोड़ा गया अभियान

सेवा संकल्प अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जोड़कर आयोजित किया जा रहा है। अभियान में उनके सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को सामने रखने के साथ सेवा और सामाजिक गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है।

इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यात्रा भी इसी व्यापक अभियान का एक हिस्सा है।

वड़नगर से वाराणसी तक जुड़ता सेवा संदेश

वड़नगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन से पहले के सार्वजनिक जीवन से जुड़ा स्थान है, जबकि वाराणसी उनके लोकसभा क्षेत्र के रूप में सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में दोनों स्थानों को जोड़ने वाली यात्रा को अभियान के आयोजकों ने विशेष महत्व दिया है।

साइकिल यात्रा के माध्यम से दोनों स्थानों के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी तय की जा रही है। रास्ते में आने वाले विभिन्न राज्यों, जिलों और गांवों में प्रतिभागियों का संपर्क अभियान की पहुंच को व्यापक बनाता है।

सेवा यात्रियों को प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री ने संवाद के दौरान सेवा यात्रियों को यह संदेश दिया कि यात्रा की वास्तविक भावना केवल दूरी तय करने में नहीं, बल्कि समाज के साथ जुड़ने और सेवा की भावना को व्यवहार में उतारने में है।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि उनकी यात्रा और व्यवहार लोगों तक यह संदेश पहुंचाए कि सार्वजनिक जीवन में सेवा को प्राथमिकता दी जा सकती है। उन्होंने यात्रा में शामिल सभी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।

आगे भी जारी रहेगा सेवा का संकल्प

प्रधानमंत्री के संबोधन में सेवा को निरंतर जारी रखने की बात प्रमुखता से सामने आई। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदल सकती हैं, जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और व्यक्ति अलग-अलग ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है, लेकिन सेवा की भावना को बनाए रखना जरूरी है।

‘सेवा परमो धर्म’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने सेवा को जीवन के मूल उद्देश्य से जोड़ने की बात कही।

इस तरह ‘सेवा संकल्प यात्रा’ को एक ऐसी पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें साइकिल यात्रा, जनसंपर्क, सामाजिक गतिविधियां और सेवा की भावना को एक साथ जोड़ा गया है। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान 20 टीमें वड़नगर और वाराणसी के बीच कुल 35,500 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री के साथ संवाद ने यात्रा में शामिल प्रतिभागियों के उत्साह को बढ़ाया और सेवा को अभियान का केंद्रीय संदेश बनाए रखने पर जोर दिया।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







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