बिनौली,29 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। बरनावा स्थित लाक्षागृह परिसर के श्री महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल में ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में चल रहे सामवेद पारायण महायज्ञ का मंगलवार को विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति देकर समापन हुआ। कई दिनों तक चले इस धार्मिक एवं वैदिक आयोजन में पांच यज्ञशालाओं पर सामवेद पारायण एवं यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न प्रांतों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए यज्ञ में आहुति दी और धर्मलाभ अर्जित किया।
महायज्ञ के समापन अवसर पर गुरुकुल परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की आहुतियों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना रहा। पूर्णाहुति के दौरान श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, परिवार की सुख-समृद्धि और समाज में शांति एवं सद्भाव की कामना की।
यज्ञ से मानव जीवन बनता है श्रेष्ठ
आयोजन के ब्रह्म वैदिक विद्वान एवं प्रधानाचार्य अरविंद शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यज्ञ के माध्यम से मानव जीवन को श्रेष्ठ और पवित्र बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन यज्ञमय होना चाहिए और यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासन, त्याग, सेवा और सद्भाव की दिशा में ले जाने का माध्यम भी है।
उन्होंने प्रसाद शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रसाद वह है, जिसे ग्रहण करने से मनुष्य को प्रसन्नता की अनुभूति हो और परमपिता परमात्मा की कृपा प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि परमात्मा दया के सागर हैं और उनकी कृपा प्राप्त होना मनुष्य के जीवन का सर्वोत्तम सौभाग्य है।
अरविंद शास्त्री ने कहा कि वैदिक परंपरा में यज्ञ का विशेष महत्व रहा है। यज्ञ के माध्यम से मनुष्य अपने विचारों और आचरण को पवित्र बनाने की प्रेरणा प्राप्त करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ब्रह्मलीन कृष्णदत्त महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कृष्णदत्त महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
समारोह में बीएसएनएल के पूर्व महाप्रबंधक एवं वैदिक वक्ता चंद्रहास सिंह दलाल ने कहा कि कलयुग में ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज जैसे महान तपस्वी ऋषि का अवतरित होना समाज के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि कृष्णदत्त महाराज ने अपने जीवन, तपस्या और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से समाज को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन की दिशा में प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
पांच यज्ञशालाओं में हुआ सामवेद पारायण
ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस महायज्ञ के दौरान गुरुकुल परिसर में पांच यज्ञशालाओं में वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न कराया गया। सामवेद के मंत्रों और वैदिक ऋचाओं के उच्चारण से परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला में पहुंचकर आहुति दी। आयोजन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर परिवार एवं समाज के कल्याण की कामना की।
वैदिक संस्कृति और संस्कारों का संदेश
महायज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को वैदिक संस्कृति, यज्ञ परंपरा और भारतीय संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच मनुष्य को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैदिक परंपरा में यज्ञ को लोककल्याण की भावना से जोड़ा गया है। यज्ञ के दौरान मनुष्य अपने व्यक्तिगत हितों के साथ-साथ समाज और विश्व के कल्याण की कामना करता है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे धार्मिक एवं वैदिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर पूरे समय धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। महायज्ञ के सफल समापन पर आयोजन से जुड़े लोगों ने सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर आचार्य विनोद कुमार, आचार्य गुरवचन, गांधी धाम समिति के प्रधान यशोधर्मा, मंत्री राजपाल त्यागी, देवेंद्र शर्मा, सतीश शर्मा, पंकज राठी और सहदेव आर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के तहत आयोजित धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने वैदिक परंपराओं और महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

