खेकड़ा,30 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। सांकरौद गांव स्थित जनता उत्तर माध्यमिक विद्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को पोक्सो अधिनियम-2012, बच्चों के कानूनी अधिकारों, यौन अपराधों से सुरक्षा तथा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में शिकायत और कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके अलावा कस्बे के विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज में भी छात्राओं को पोक्सो एक्ट और बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
जनता उत्तर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजे सियाराम चौरसिया और जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव यादव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं। बच्चों को किसी भी प्रकार के यौन अपराध, शोषण अथवा अनुचित व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करना पोक्सो कानून का प्रमुख उद्देश्य है।
वक्ताओं ने पोक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान और गरिमा की रक्षा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। छात्र-छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी बच्चे के साथ गलत घटना होने पर उसे अकेले सहन करने या छिपाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
गलत घटना को छिपाने के बजाय करें शिकायत
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को समझाया गया कि यदि उनके साथ अथवा उनके किसी परिचित बच्चे के साथ किसी प्रकार की गलत घटना होती है तो डरने या चुप रहने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक अथवा किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी देनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं से भी संपर्क किया जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि कई बार बच्चे डर, झिझक या किसी दबाव के कारण अपने साथ हुई घटना के बारे में किसी को नहीं बताते। ऐसी स्थिति समस्या को और गंभीर बना सकती है। इसलिए बच्चों में जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना आवश्यक है। उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके साथ गलत व्यवहार होने पर आवाज उठाना उनका अधिकार है।
छात्र-छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी भी संदिग्ध या अनुचित परिस्थिति में वे अपने आसपास के विश्वसनीय लोगों की मदद ले सकते हैं। विद्यालयों में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चे बिना झिझक अपनी बात साझा कर सकें।
बच्चों के अधिकारों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में भी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, सम्मान के साथ रहने और किसी भी प्रकार के शोषण से सुरक्षा पाने का अधिकार है। बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बरतना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपने साथ-साथ अपने आसपास के बच्चों की सुरक्षा के प्रति भी जागरूक रहें। यदि उन्हें किसी बच्चे के साथ संदिग्ध या अनुचित व्यवहार की जानकारी मिलती है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उचित व्यक्ति या संबंधित अधिकारी तक सूचना पहुंचानी चाहिए।
विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज में भी जागरूकता कार्यक्रम
कस्बे के विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज में भी छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां छात्राओं को पोक्सो एक्ट के साथ-साथ व्यक्तिगत सुरक्षा और सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में समझाया गया। उन्हें बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज या असुरक्षित महसूस कराता है तो वे तुरंत उसका विरोध कर सकती हैं और किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकती हैं। छात्राओं को अपनी व्यक्तिगत सीमाओं और सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि उन्हें किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार को सामान्य मानकर चुप नहीं रहना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से छूने, डराने, धमकाने या किसी अन्य प्रकार से परेशान करने का प्रयास करता है तो इसकी जानकारी तत्काल अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को दी जानी चाहिए।
हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को विभिन्न डायल नंबरों और हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे सहायता प्राप्त कर सकें। वक्ताओं ने कहा कि आपात स्थिति में समय पर सहायता मांगना बेहद महत्वपूर्ण है।
छात्राओं को यह भी समझाया गया कि मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति से निजी जानकारी साझा करने, संदिग्ध संदेशों या लिंक पर प्रतिक्रिया देने तथा अपनी तस्वीर अथवा व्यक्तिगत जानकारी किसी अपरिचित व्यक्ति को भेजने से बचना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा में विद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, विद्यालय और समाज सभी की भूमिका होती है। विद्यालय में शिक्षक बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं, इसलिए यदि किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो संवेदनशीलता के साथ उसकी बात सुनना जरूरी है।
उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि बच्चों को ऐसा वातावरण दिया जाए, जिसमें वे बिना डर और झिझक अपनी समस्याएं बता सकें। बच्चों की शिकायत को गंभीरता से सुनना और आवश्यकता के अनुसार उचित स्तर पर सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी कानून और बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों को लेकर जानकारी प्राप्त की तथा वक्ताओं से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। अधिकारियों ने बच्चों को आश्वस्त किया कि कानून उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए है तथा किसी भी परेशानी की स्थिति में सहायता लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
जनता उत्तर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य नरेंद्र धामा, विपिन कुमार, नरेंद्र कुमार, जयदीप धामा, गौरव कुमार, अमरजीत, श्याम सुंदर, रामकुमार और दीपक कुमार मौजूद रहे।
वहीं विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्या रेनू जैन समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। विद्यालय प्रबंधन ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को छात्राओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि कानून की जानकारी होने से बच्चे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग और आत्मविश्वासी बनते हैं।
कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं से अपील की गई कि वे अपने अधिकारों को समझें, दूसरों का सम्मान करें और किसी भी प्रकार की गलत घटना को छिपाने के बजाय समय रहते इसकी जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति को दें। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता, संवाद और समय पर सहायता बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

