Breaking News
उज्ज्वल टाइम्स न्यूज़ का असर: जांच के डर से चयनित अभ्यर्थियों को कराया कार्यभार ग्रहण   | लैब से मरीज के बिस्तर तक पहुंचे खोज, यही हो लाइफ साइंस की असली कसौटी: जेपी नड्डा   | मनोज तिवारी बनेंगे केवट, गीतों के साथ प्रभु श्रीराम को कराएंगे नैया पार   | कैप्टन स्मित ने पीएम मोदी से कहा- भगवान हनुमान ने मुझे बचाया, बोले- हनुमान चालीसा ने मुश्किल वक्त में दी हिम्मत   | चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, वोटर लिस्ट से छूटे नामों को फिर से जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान   | Bhoomi Trivedi to Headline 'Rang Raas Navratri 2026'; AI-Powered Navratri Song Set to Be a Highlight   | ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित 1600 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में बालक-बालिकाओं ने दिखाया उत्साह   | सुन्हैड़ा में आंगन मिलन सेवा में माताओं का सम्मान, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक   | स्टेट बैंक का सर्वर डाउन, पेंशनरों के खातों में नहीं पहुंची सितंबर माह की पेंशन   | महात्मा गांधी और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान   |
मल्टी डिजिटल मीडिया, पत्रकारिता के क्षेत्र में तुरंत आवश्यकता है देश एवं प्रदेश के सभी जगह से अनुभव गैर अनुभवी पुरुष एवं महिलाएं, देश एवं प्रदेश के सभी जिला एवं राज्य में युवक / महिलाएं संपर्क करें मल्टीमीडिया उज्जवल टाइम्स न्यूज़ में जोड़ने के लिए आपको मिल रहा है सुनहरा मौकाआप हमें अपने समाचार एवं विज्ञापन, कविता, लेख प्रकाशित करने के लिए संपर्क कर सकते हैं . E-mail- ujjwaltimesnewsnetwork@gmail.com

जब डॉक्टरों ने थामी कलम, माइक और सवालों की कमान

1790668545_1.png


नई दिल्ली,29  सितम्बर  2026  (यूटीएन)। आमतौर पर अस्पतालों में मरीजों की सेवा, इमरजेंसी ड्यूटी, जांच और इलाज में व्यस्त रहने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों का एक अलग रूप उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने स्टेथोस्कोप के साथ कलम, माइक और सवालों की कमान संभाली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टरों ने साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एम्स नई दिल्ली की ओर से आयोजित लिटरेचर फेस्ट ‘स्क्रब्स और स्क्रिप्ट’ में कविता, गद्य, बहस, जैम और क्विज जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों को उनकी व्यस्त चिकित्सकीय दिनचर्या से अलग रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा। प्रतियोगिताओं में रेजिडेंट डॉक्टरों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी साहित्यिक समझ, तर्कशक्ति तथा तत्काल अभिव्यक्ति की क्षमता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवंतिका माथुर ने किया। वहीं फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की डॉ. हर्षिता वर्मा ने सह-आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों ने कविता और गद्य के जरिए अपने विचारों को शब्द दिए तो बहस और एक्सटेम्पोर के माध्यम से तत्काल प्रतिक्रिया और तार्किक प्रस्तुति की क्षमता दिखाई।

क्विज में चार टीमों के बीच मुकाबला

फेस्ट का सबसे आकर्षक और रोमांचक मुकाबला क्विज प्रतियोगिता रहा। इसमें चिमेरा, ट्यूबलाइट्स, नियोप्लाज्म और स्लिथरिन्स नाम से चार टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता को तीन चरणों में आयोजित किया गया, जिनमें एमसीक्यू, प्लॉट ट्विस्ट और स्कोरबस्टर्स शामिल रहे।

क्विज में साहित्य और सामान्य ज्ञान से जुड़े सवालों ने प्रतिभागियों की जानकारी के साथ-साथ उनकी त्वरित निर्णय क्षमता की भी परीक्षा ली। अलग-अलग चरणों में टीमों के बीच अंकों का अंतर लगातार बदलता रहा, जिससे मुकाबला अंत तक दिलचस्प बना रहा।

कड़े मुकाबले के बाद विजेता का फैसला साहित्यिक टाई-ब्रेकर के जरिए हुआ। इसमें ‘नियोप्लाज्म’ टीम ने बाजी मारते हुए क्विज का खिताब अपने नाम किया। टीम की सफलता ने न केवल उसके सदस्यों की सामान्य ज्ञान संबंधी तैयारी, बल्कि साहित्य के प्रति उनकी रुचि को भी सामने रखा।

कविता में दिखी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति

कार्यक्रम में कविता प्रतियोगिता भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। डॉक्टरों ने अपनी कविताओं के माध्यम से विभिन्न भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त किया। चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले इन प्रतिभागियों की रचनाओं में संवेदनशीलता, अनुभव और जीवन को देखने का अलग नजरिया दिखाई दिया।

विजेता कवियों ने मंच पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि मरीजों के इलाज और चिकित्सा संबंधी जिम्मेदारियों के बीच रहने वाले डॉक्टरों के भीतर भी साहित्य और रचनात्मक लेखन के लिए गहरी रुचि मौजूद है।

जैम में एक मिनट में रखे विचार

फेस्ट की जैम यानी ‘जस्ट ए मिनट’ प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को दिए गए विभिन्न विषयों पर सीमित समय में अपनी बात रखनी थी। इस प्रतियोगिता में विषय की समझ, विचारों की स्पष्टता और तत्काल अभिव्यक्ति की क्षमता देखने को मिली।

प्रतिभागियों ने एक मिनट के भीतर अपने विचारों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया। कम समय में प्रभावी बात रखने की चुनौती ने प्रतियोगिता को रोचक बना दिया। डॉक्टरों ने गंभीर विषयों के साथ-साथ हल्के-फुल्के और समसामयिक विषयों पर भी अपनी राय व्यक्त की।

‘वीआईपी संस्कृति’ पर हुई जोरदार बहस

डिबेट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने तर्क और प्रत्युत्तर की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। ‘वीआईपी संस्कृति’ जैसे विषय पर डॉक्टरों ने पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क रखे। बहस के दौरान सामाजिक व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार सामने आए।

एक अन्य दिलचस्प विषय ‘सुबह के लोगों को ओवररेटेड किया जा रहा है’ रहा। इस विषय ने प्रतिभागियों को गंभीर तर्कों के साथ हास्य और व्यंग्य का इस्तेमाल करने का अवसर भी दिया। दोनों पक्षों के प्रतिभागियों ने अपनी बात को तार्किक ढंग से रखने का प्रयास किया, जिससे प्रतियोगिता में जीवंतता बनी रही।

डॉक्टरों के भीतर की रचनात्मक दुनिया सामने आई

‘स्क्रब्स और स्क्रिप्ट’ का सबसे खास पहलू यह रहा कि इसमें डॉक्टरों को उनकी चिकित्सकीय पहचान से अलग उनकी रचनात्मक प्रतिभा के साथ देखने का अवसर मिला। अस्पताल की व्यस्त दिनचर्या में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा जिम्मेदारियों के बीच काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंच पर साहित्य, वाद-विवाद और क्विज के माध्यम से अपने व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं को सामने रखा।

आयोजन के दौरान यह भी देखने को मिला कि चिकित्सा शिक्षा और पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ साहित्यिक गतिविधियां डॉक्टरों को अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने का अवसर देती हैं। कविता और गद्य जहां भावनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बने, वहीं बहस, जैम और क्विज ने प्रतिभागियों की तार्किक एवं त्वरित सोच को सामने रखा।

विजेताओं और निर्णायकों का सम्मान

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और निर्णायकों को सम्मानित किया गया। डॉ. प्रमोद गर्ग, डॉ. परमेश्वर कुमार अय्यर और डॉ. रितु सहगल ने निर्णायक की भूमिका निभाई।

विजेताओं और निर्णायकों को प्रमाणपत्र, अमेजन वाउचर और पुष्प देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला। आयोजन से जुड़े लोगों ने कहा कि इस तरह के मंच डॉक्टरों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं और चिकित्सा संस्थानों में एक सकारात्मक एवं संवादपूर्ण वातावरण बनाने में भी मदद करते हैं।

चिकित्सा के साथ रचनात्मकता का संगम

‘स्क्रब्स और स्क्रिप्ट’ ने यह संदेश दिया कि डॉक्टर की भूमिका केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है। चिकित्सा पेशे में संवेदनशीलता, मानवीय अनुभवों की समझ और प्रभावी अभिव्यक्ति का भी महत्वपूर्ण स्थान है। साहित्य और रचनात्मक गतिविधियां डॉक्टरों को अपने अनुभवों, भावनाओं और विचारों को अलग माध्यम से व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं।

एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों की इस पहल ने यह भी दिखाया कि कठिन और व्यस्त चिकित्सकीय दिनचर्या के बीच रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालना संभव है। मंच पर जब डॉक्टरों ने कलम और माइक संभाला तो उनके भीतर छिपे कवि, वक्ता, लेखक और क्विज प्रतिभागी भी सामने आए। इस तरह ‘स्क्रब्स और स्क्रिप्ट’ केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह रेजिडेंट डॉक्टरों के रचनात्मक व्यक्तित्व को सामने लाने वाला मंच बनकर उभरा। कविता से लेकर क्विज और बहस से लेकर जैम तक, हर गतिविधि में डॉक्टरों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और यह साबित किया कि चिकित्सा की दुनिया के साथ साहित्य और रचनात्मकता का भी गहरा रिश्ता हो सकता है।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







Breaking Update

🌐 Translate
🔔 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें ×
📢 ताज़ा खबर WhatsApp पर पाएँ