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गौवंश नंदी की तेरहवीं पर जुटा समाज, किया भंडारे का आयोजन

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बड़ौत, 21  सितम्बर  2026  (यूटीएन)। क्षेत्र के गांव लुहारी में एक गौवंश नंदी की मौत के बाद ग्रामीणों ने जिस तरह श्रद्धा और सम्मान के साथ उसके अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए, वह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। नंदी की मौत के बाद ग्रामीणों ने विधिवत शव यात्रा निकाली थी। इसके बाद तेरहवीं के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजन, यज्ञ और हवन का आयोजन कर दिवंगत नंदी की आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना की।

तेरहवीं के अवसर पर गांव के लोगों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए। धार्मिक आयोजन के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव दिखाई दिया।

नंदी को ग्रामीणों ने दी विशेष पहचान

ग्रामीणों के अनुसार मृत नंदी लंबे समय से गांव और मंदिर के आसपास ही रहता था। लोगों का कहना है कि उसके स्वभाव में विशेष सहजता और शालीनता थी। वह आमतौर पर गांव के लोगों के बीच ही रहता था और ग्रामीणों के साथ उसका व्यवहार शांत रहा।

रालोद के वरिष्ठ कार्यकर्ता तेजवीर दांगी ने बताया कि मृत नंदी सीधा और शांत स्वभाव का था। वह मंदिर और उसके आसपास ही रहता था। उन्होंने कहा कि नंदी को कभी किसी के खेत या फसल में आवारा पशु की तरह घूमते हुए नहीं देखा गया।

ग्रामीणों का कहना है कि नंदी के इसी स्वभाव के कारण उसके प्रति गांव और आसपास के क्षेत्र के लोगों में एक अलग तरह का लगाव बन गया था। लोग उसे केवल एक पशु के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़े गौवंश के रूप में सम्मान देते थे।

मौत के बाद निकाली गई थी विधिवत शव यात्रा

नंदी की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे सम्मान देने के लिए विधिवत शव यात्रा निकाली थी। शव यात्रा में गांव के लोगों ने भाग लिया और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी।

ग्रामीणों के अनुसार नंदी लंबे समय से गांव के वातावरण का हिस्सा था। मंदिर के आसपास उसका रहना और ग्रामीणों के बीच सहज रूप से घूमना लोगों के लिए सामान्य दृश्य बन चुका था। ऐसे में उसकी मौत की खबर से ग्रामीणों में दुख का माहौल बन गया।

ग्रामीणों ने उसकी अंतिम यात्रा को भी धार्मिक एवं सम्मानजनक तरीके से संपन्न कराया। इसके बाद तेरहवीं के अवसर पर पुनः धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

तेरहवीं पर किया गया पूजन और यज्ञ

तेरहवीं के अवसर पर मृत नंदी के नाम से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और उसके बाद यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया।

हवन में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर नंदी की आत्मा की शांति की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ और हवन को पुण्यदायी माना जाता है। इसी आस्था के आधार पर ग्रामीणों ने नंदी के लिए भी यज्ञ का आयोजन किया और उसके मोक्ष की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने गौवंश के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। कई लोगों ने कहा कि गांव में रहने वाले इस नंदी ने लंबे समय तक लोगों के बीच रहकर सभी का ध्यान आकर्षित किया था।

ग्रामीणों ने बताया पुण्यात्मा

ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने नंदी को पुण्यात्मा बताया और धार्मिक भावनाओं के साथ उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। ग्रामीणों का कहना था कि नंदी का स्वभाव शांत था और उसने कभी गांव में किसी को परेशान नहीं किया।

तेजवीर दांगी ने बताया कि नंदी को लेकर गांव और आसपास के लोगों के बीच हमेशा सम्मान की भावना रही। वह मंदिर के आसपास ही रहता था और लोगों के बीच सहज रूप से घूमता था। ग्रामीणों का कहना है कि उसकी यही विशेषता उसे अन्य आवारा पशुओं से अलग बनाती थी।

ग्रामीणों ने तेरहवीं के आयोजन के दौरान नंदी की स्मृतियों को याद किया और उसके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

हवन के बाद हुआ भंडारा

धार्मिक कार्यक्रम के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में गांव और आसपास के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामीणों ने स्वयं व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।

भंडारे में शामिल लोगों ने इसे केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का अवसर भी बताया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के एक साथ जुटने से कार्यक्रम में सामूहिकता का भाव देखने को मिला।

तेरहवीं के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने नंदी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के साथ-साथ गौवंश के संरक्षण और उसके प्रति संवेदनशीलता की भावना पर भी चर्चा की।

गौवंश के प्रति संवेदना का संदेश

ग्रामीणों का कहना है कि गौवंश भारतीय ग्रामीण जीवन और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। गांवों में लंबे समय से पशुओं के साथ लोगों का भावनात्मक रिश्ता रहा है। लुहारी में नंदी की मौत के बाद जिस तरह ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार और तेरहवीं के कार्यक्रम किए, उससे भी इस भावनात्मक जुड़ाव की तस्वीर सामने आई।

ग्रामीणों ने कहा कि पशुओं के प्रति संवेदना रखना और उनके साथ मानवीय व्यवहार करना समाज की जिम्मेदारी है। नंदी की मौत के बाद आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने इसी भावना को सामने रखा।

मंदिर और गांव से जुड़ी रही नंदी की यादें

ग्रामीणों के अनुसार नंदी लंबे समय से मंदिर के आसपास रहता था। सुबह-शाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए उसका वहां दिखाई देना सामान्य बात थी। इसी कारण धीरे-धीरे गांव के लोगों का उसके साथ भावनात्मक लगाव हो गया।

लोगों का कहना है कि वह किसी के खेत में जाकर फसल खराब करने या ग्रामीणों को परेशान करने के लिए नहीं जाना जाता था। उसका शांत स्वभाव ही ग्रामीणों के बीच उसकी पहचान बन गया था।

इसी वजह से उसकी मौत को ग्रामीणों ने सामान्य पशु की मौत के रूप में न लेकर श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

धार्मिक आयोजन में ग्रामीणों की सहभागिता

तेरहवीं के आयोजन में गांव के अनेक लोगों ने अपनी सहभागिता निभाई। किसी ने पूजन की व्यवस्था में सहयोग किया तो किसी ने यज्ञ और भंडारे की व्यवस्था संभाली। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कार्यक्रम को संपन्न कराया।

पूजन और हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी की आत्मा की शांति की कामना की। इसके बाद भंडारे में लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि नंदी के प्रति उनके मन में पहले से ही सम्मान की भावना थी और उसकी मौत के बाद अंतिम विदाई में भी इसी भावना को बनाए रखा गया।

सामाजिक एकता का भी दिखा स्वरूप

कार्यक्रम में अलग-अलग वर्गों के ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। धार्मिक आयोजन के साथ भंडारे में सभी लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इससे गांव में सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का वातावरण भी देखने को मिला।

ग्रामीणों का कहना था कि धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने का माध्यम भी बनते हैं। नंदी की तेरहवीं के बहाने बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और उन्होंने दिवंगत गौवंश के प्रति सम्मान प्रकट किया।

ग्रामीणों ने की मोक्ष की कामना

हवन और पूजन के दौरान ग्रामीणों ने नंदी की आत्मा की शांति तथा मोक्ष की कामना की। धार्मिक आस्था के अनुसार यज्ञ और पूजा से प्राप्त पुण्य को दिवंगत आत्मा की शांति के लिए समर्पित किया गया।

ग्रामीणों ने कहा कि नंदी के प्रति उनके मन में श्रद्धा थी, इसलिए उसकी तेरहवीं भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई गई। आयोजन में शामिल लोगों ने दिवंगत नंदी को याद करते हुए उसके शांत स्वभाव और गांव के साथ उसके लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया।

ये लोग रहे मौजूद

तेरहवीं के धार्मिक कार्यक्रम एवं भंडारे में लाला हरिश्चन्द्र, विमल प्रसाद गर्ग, खुशी मेडिकल के अनिल चौहान, संसार सिंह, वेदो कश्यप, छोटा तेजवीर दांगी, मां संजीव कुमार, ग्राम प्रधान कपिल कुमार दांगी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।

सभी ने पूजन एवं हवन में सहभागिता की और नंदी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।

ग्रामीणों के लिए भावनात्मक रहा आयोजन

लुहारी गांव में नंदी की तेरहवीं का आयोजन ग्रामीणों के लिए केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इससे उनके और उस गौवंश के बीच लंबे समय से बने भावनात्मक संबंध की झलक भी देखने को मिली। नंदी की अंतिम यात्रा से लेकर तेरहवीं तक ग्रामीणों ने जिस तरह सहभागिता निभाई, उससे गांव में गौवंश के प्रति श्रद्धा और संवेदना का भाव सामने आया।

पूजन, यज्ञ, हवन और भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ग्रामीणों ने दिवंगत नंदी को श्रद्धांजलि देते हुए उसकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की तथा गौवंश के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता बनाए रखने का संदेश दिया।

वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )







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