नई दिल्ली,25 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में शहरों और गांवों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विकास से ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास, पेयजल, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य सुविधाओं के विस्तार से गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेज हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से वडनगर जा रही ‘सेवा यात्रा’ मोटरसाइकिल रैली के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश में महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर किए गए प्रयासों का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में भारत में शहरों और गांवों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। गांवों के बुनियादी ढांचे में आज उल्लेखनीय सुधार हुआ है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल शहरों तक सीमित रहना नहीं होना चाहिए, बल्कि गांवों तक भी आधुनिक सुविधाएं और अवसर पहुंचने चाहिए।
वोट बैंक नहीं, समाज में बदलाव के लिए हो काम
प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रा में शामिल प्रतिभागियों से समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य केवल वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखकर नहीं किए जाने चाहिए। समाज में निरंतर सुधार, सकारात्मक बदलाव और जनसेवा की भावना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब सेवा का उद्देश्य व्यापक सामाजिक परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देता है। युवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। उन्होंने सेवा की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाने और लोगों को सकारात्मक कार्यों से जोड़ने पर जोर दिया।
वडनगर और काशी से जुड़ी सेवा यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को वडनगर और वाराणसी से दो मोटरसाइकिल रैलियों को रवाना किया गया था। इन यात्राओं का समापन सात अक्टूबर को निर्धारित है। वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही ये रैलियां मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही हैं।
दोनों यात्राएं विभिन्न कस्बों, जिलों और गांवों से होकर गुजर रही हैं। यात्रा का उद्देश्य सेवा, सामाजिक सहभागिता और जनकल्याण की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचाना बताया गया है। रैली में शामिल प्रतिभागी रास्ते में लोगों से संवाद कर रहे हैं और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ रहे हैं।
वडनगर ने दिए संस्कार, काशी ने जोड़े सेवा के रंग
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वडनगर और वाराणसी से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुजरात का वडनगर उनका जन्मस्थान है और वहीं से उन्हें ऐसे संस्कार मिले, जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया। वहीं, वाराणसी वर्ष 2014 से उनका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है।
उन्होंने कहा कि वडनगर ने उन्हें संस्कार दिए और काशी ने उन संस्कारों में सेवा के अनगिनत रंग जोड़े। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रा में शामिल लोगों की भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिभागी सेवा के अनेक रंगों के साथ इस यात्रा को समृद्ध कर रहे हैं।
गांवों तक पहुंची विकास की सुविधाएं
प्रधानमंत्री के बयान के केंद्र में ग्रामीण बुनियादी ढांचे में बदलाव रहा। पिछले वर्षों में ग्रामीण इलाकों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा गया है। गांवों में बेहतर संपर्क मार्ग, बिजली की उपलब्धता, आवास, पेयजल और डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाओं के विस्तार ने ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों के करीब लाने में भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि देश के विकास का वास्तविक लाभ तभी व्यापक रूप से सामने आएगा, जब गांवों में रहने वाले लोगों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को सुविधाओं तथा अवसरों से जोड़ना सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
सेवा यात्रा के जरिए जनभागीदारी पर जोर
वडनगर और वाराणसी से शुरू हुई दोनों मोटरसाइकिल यात्राओं के दौरान प्रतिभागी अलग-अलग क्षेत्रों से गुजर रहे हैं। यात्रा के माध्यम से सेवा को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल सरकार के प्रयासों से नहीं आता। इसके लिए आम नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों की भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने और समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहयोग पहुंचाने की भावना पर जोर दिया। सात अक्टूबर को दोनों यात्राओं के समापन के साथ यह अभियान अपने निर्धारित चरण को पूरा करेगा। इसके माध्यम से आयोजकों की ओर से जनसेवा, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा है।

