खेकड़ा,17 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर खेकड़ा में उत्तम मार्दव धर्म बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक विधान के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा।
दशलक्षण पर्व के अंतर्गत उत्तम मार्दव धर्म का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना करते हुए अपने भीतर विनम्रता, सरलता और अहंकार के त्याग जैसे भावों को विकसित करने का संकल्प लिया। धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने परिवार एवं समाज की सुख-शांति तथा सभी के कल्याण की कामना की।
शांतिधारा का मिला सौभाग्य
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भगवान जिनेंद्र की शांतिधारा विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य महेश जैन एवं श्री कुणाल जैन को प्राप्त हुआ। वहीं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य शुभम जैन तथा इंद्राणी बनने का सौभाग्य श्रीमती काजल जैन को प्राप्त हुआ।
शांतिधारा और पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक मंत्रों का उच्चारण किया। मंदिर परिसर में भगवान के जयकारों और पूजा-अर्चना से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान जिनेंद्र के चरणों में नमन कर धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान में उमड़ा उत्साह
महोत्सव के अंतर्गत श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन भी बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ किया जा रहा है। विधान के पुण्यार्जक सुमेर जैन, सिद्धार्थ जैन एवं सार्थक जैन परिवार रहे।
विधान का शुभारंभ पं. प्रवर श्री राजेश राज जी, भोपाल के कुशल निर्देशन में हुआ। धार्मिक विधान के दौरान प्रसिद्ध संगीतकार महेंद्र मानव की मधुर संगीतमय लहरियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भक्ति गीतों और धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु पूरे मनोयोग से विधान में शामिल हुए।
विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक क्रियाओं में भाग लेते हुए भगवान जिनेंद्र की आराधना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने और पूजा-अर्चना के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
अहंकार के त्याग और विनम्रता का संदेश
धार्मिक विद्वानों ने उत्तम मार्दव धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्व है। उत्तम मार्दव का भाव मनुष्य को अहंकार से दूर कर विनम्रता की ओर ले जाता है। व्यक्ति को अपने ज्ञान, धन, पद, प्रतिष्ठा अथवा किसी अन्य उपलब्धि पर अभिमान नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सच्ची धार्मिक साधना तभी सार्थक होती है, जब उसके माध्यम से व्यक्ति के आचरण में भी सकारात्मक बदलाव आए। विनम्रता मनुष्य को दूसरों के प्रति सम्मान का भाव सिखाती है और समाज में आपसी सौहार्द को मजबूत करती है। दशलक्षण पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को अपने भीतर के विकारों को दूर करने और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
विधान में सुमेर जैन, शुभम जैन, महेश जैन, नानू जैन, आर्जव जैन, अर्पित जैन, अनिकेत जैन, राजकुमार जैन, श्रीमती नीतू जैन, मोनिका जैन, रीना जैन, सुनीता जैन, योगिता जैन एवं सीमा जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। पूजन और विधान के दौरान मंदिर में अनुशासन एवं श्रद्धा का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-शांति तथा समाज में समृद्धि की कामना की।
जैन समाज के पदाधिकारी भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जैन समाज खेकड़ा के प्रधान नितिन जैन, महामंत्री मनोज जैन, सहित राजेश जैन, सचिन जैन, पुनीत जैन, विनय जैन, शिखर चंद जैन, सुशील जैन, अजय जैन, संजीव जैन, अमित जैन एवं विकास जैन उपस्थित रहे।
समाज के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में सहयोग किया। मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। दशलक्षण महापर्व के अन्य दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की आराधना कर आत्मशुद्धि, संयम, विनम्रता, अहिंसा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण किया। मंदिर में देर तक धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं और वातावरण भक्तिमय बना रहा।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

