नई दिल्ली, 05 जून 2026 (यूटीएन)। इंडिया गैस फ्लेक्स इवेंट के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर मारुति सुजुकी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार और हीरो मोटोकॉर्प की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल से पर्दा उठाया है। इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि भारत को अब वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल्स की तरफ तेजी से कदम बढ़ाना ही होगा। चूंकि देश का 40 फीसदी वायु प्रदूषण अकेले ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वजह से होता है, इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए यह लॉन्चिंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, भारत हर साल 22-23 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इस कार के आने से देश की विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को नई उड़ान मिलेगी।

नितिन गडकरी ने इस अग्रणी पहल के लिए दोनों कंपनियों की टीमों को बधाई दी और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छ, आत्मनिर्भर और टिकाऊ मोबिलिटी के विजन के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया बाजार के तौर पर भारत फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की ओर बदलाव का नेतृत्व करने के लिए एक बेहतरीन स्थिति में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर और बाइक में इस तकनीक को अपनाने से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 77 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
गडकरी ने आगे जोर दिया कि इस पहल से ग्रामीण ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बायोफ्यूल की मांग बढ़ेगी, किसानों को समर्थन मिलेगा, वेस्ट-टू-वेल्थ पहल को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के मौके पैदा होंगे। यह लॉन्च ऑटोमोटिव सेक्टर, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है, जो सभी हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग और मिलकर की गई कोशिशों से मुमकिन हुआ है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ई20 से लेकर ई100 तक के विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकते हैं। इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यात्री वाहन क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का प्रवेश महज एक वाहन का लॉन्च नहीं है, बल्कि देश के ऊर्जा बदलाव में एक नए अध्याय की शुरुआत है। श्री पुरी ने कहा कि भारत में लगभग 37 लाख यात्री वाहन हैं, जो मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं और व्यक्तिगत परिवहन के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। वाहन क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने से इथेनॉल-आधारित परिवहन के प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 28 फरवरी को सैन्य संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत के एलपीजी आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था। 1.4 अरब की आबादी और वैश्विक औसत से तीन गुना अधिक ऊर्जा मांग वृद्धि वाले देश के रूप में, भारत ने पूरे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की। उन्होंने कहा, “देश में कहीं भी तेल की कमी नहीं हुई। लोग सड़क और हवाई मार्ग से सामान्य रूप से यात्रा करते रहे। वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत ने लगभग सामान्य स्थिति बनाए रखी। उन्होंने यह भी कहा कि गलत सूचना फैलाने और कृत्रिम कमी पैदा करने के कुछ प्रयास किए गए, लेकिन समय पर नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी प्रबंधन के कारण स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में रही।पुरी ने देश की ऊर्जा रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभों - उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता - के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उपलब्धता के संदर्भ में पुरी ने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी। भारत ने संकट से पहले के 32 टन मीट्रिक टन प्रति दिन के एलपीजी उत्पादन को बढ़ाकर लगभग 52 टन मीट्रिक टन प्रति दिन कर दिया है, साथ ही पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस और सीएनजी की आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी काम किया है।
सामर्थ्य के विषय पर पुरी ने कहा कि भारत में ईंधन की कीमतों में वैश्विक स्तर पर सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी करने के निर्णय के बारे में भी बताया। सतत विकास के विषय पर बोलते हुए पुरी ने ब्राजील और अमेरिका में अपने पूर्व अनुभवों को याद किया, जहां चीनी और मक्का आधारित इथेनॉल मिश्रण पहले ही सफलता प्रदर्शित कर चुका था। उन्होंने कहा कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा परिवर्तन की सबसे सफल पहलों में से एक बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत की इथेनॉल सफलता की कहानी सरकार के समग्र सहयोग और किसानों, इथेनॉल उत्पादकों, तेल विपणन कंपनियों, वाहन निर्माताओं, वैज्ञानिकों और वित्तीय संस्थानों को शामिल करते हुए एक मजबूत परितंत्र के निर्माण के माध्यम से संभव हुई है।
भारत के पास अब टूटे हुए अनाज, कृषि अपशिष्ट, बांस और समुद्री शैवाल जैसे कई कच्चे माल के स्रोतों से इथेनॉल का उत्पादन करने की क्षमता है। 2013-14 में इथेनॉल का मिश्रण 1.5 प्रतिशत से कम था, जो 2025-26 में बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है, और इस तरह लक्ष्य निर्धारित समय से 5 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया है। वर्ष 2013-14 के वित्तीय वर्ष में इथेनॉल की खरीद लगभग 38 करोड़ लीटर थी, जो आज बढ़कर 1,040 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है, जबकि इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग पांच गुना बढ़कर 2014 में 421 करोड़ लीटर से 2026 में लगभग 2000 करोड़ लीटर हो गई है। इस बदलाव से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, उत्सर्जन कम हुआ है और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
पुरी ने कहा कि नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का यदि 50 प्रतिशत हिस्सा फ्लेक्स फ्यूल मानकों के अनुरूप वाहनों की ओर स्थानांतरित हो जाता है, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की अतिरिक्त मांग पैदा होगी और किसानों को 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
इसके अलावा, इससे 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आएगी। नीति आयोग ने आधिकारिक तौर पर इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी) को शून्य-उत्सर्जन वाहन के रूप में वर्गीकृत किया है। इनमें ई85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहन भी शामिल हैं। ई85 ईंधन से कण पदार्थ (पीएम) का उत्सर्जन भी लगभग शून्य होता है, जिससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश में बढ़ते वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए एक आशाजनक समाधान बन जाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने देशव्यापी फ्लेक्स-फ्यूल प्रणाली बनाने के लिए सरकार के रोडमैप की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। प्रस्तावित रोडमैप के तहत, बीआईएस विनिर्देशों के अनुसार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई85 को एकल ईंधन मानक के रूप में निर्धारित किया गया है। योजना के अनुसार, शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50-100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार ईंधन खुदरा आउटलेट खोले जाएंगे, जिनका विस्तार दिसंबर 2026 तक लगभग 500 आउटलेट और 2027 के अंत तक प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 आउटलेट तक किया जाएगा।
सरकार ईंधन के उपयोग को बढ़ाने के लिए मूल्य निर्धारण में सहायता, सड़क कर में छूट, ई85 परीक्षण ईंधन की उपलब्धता, ईंधन वाहन (एफएफवी) और खुदरा दुकानों के लिए विशेष पहचानकर्ता, उपभोक्ता जागरूकता पहल और भंडारण एवं वितरण अवसंरचना के विकास जैसे सहायक उपायों पर भी काम कर रही है। पुरी ने कहा कि यह केवल ईंधन में बदलाव नहीं है, बल्कि स्वच्छ परिवहन, मजबूत ऊर्जा सुरक्षा और अधिक आत्मनिर्भरता के लिए एक संपूर्ण परितंत्र का निर्माण है। हीरो मोटोकॉर्प द्वारा फ्लेक्स फ्यूल मोटरसाइकिलों के लॉन्च और मारुति सुजुकी द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन के लॉन्च का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि देश स्वच्छ गतिशीलता के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
भारत में स्वच्छ ऊर्जा परिवहन के क्षेत्र में मारुति सुजुकी के योगदान की सराहना करते हुए पुरी ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन भारत में ही निर्मित होगा, भारतीय नवाचारों द्वारा संचालित होगा, भारतीय किसानों के सहयोग से होगा और भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा प्रेरित होगा। उन्होंने वाहन निर्माताओं से सभी वाहन श्रेणियों में फ्लेक्स फ्यूल मॉडल की शुरुआत में तेजी लाने और तेल विपणन कंपनियों से देश भर में ई85 की उपलब्धता को तेजी से बढ़ाने का आग्रह किया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

