नई दिल्ली,11 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्ष 2006 में जब ब्रिक्स समूह की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश शामिल थे, लेकिन आज यह ब्रिक्स और उसके सहयोगी देशों को मिलाकर 21 देशों का परिवार बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, उसकी आर्थिक क्षमता और सदस्य देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं इसे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मंच बना रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ब्रिक्स देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और वैश्विक व्यापार के 25 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने जिस तेजी से विकास किया है, वह इस समूह की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की तुलना में तेज गति से बढ़ी ब्रिक्स अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वर्षों में जहां वैश्विक जीडीपी लगभग ढाई गुना बढ़ी है, वहीं ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है। उनके अनुसार, इसका अर्थ है कि ब्रिक्स की आर्थिक ताकत बाकी दुनिया की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव सदस्य देशों के व्यापार, निवेश, तकनीक, उद्योग और नए कारोबारी अवसरों पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रिक्स के बढ़ते आकार के साथ इसके सामने सहयोग के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के प्रमुख केंद्रों के रूप में भी उभर रहे हैं। जमीनी स्तर की पहल से लेकर अत्याधुनिक तकनीक तक, नवाचार की नई संभावनाएं सदस्य देशों में आकार ले रही हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का बढ़ता आकार, गति और आशावाद इस मंच पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित यह अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के बड़ी संख्या में कारोबारी नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि व्यापारिक समुदाय की भागीदारी यह दिखाती है कि ब्रिक्स के माध्यम से आर्थिक सहयोग को नए स्तर तक ले जाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
फोरम में व्यापारिक बाधाओं, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं, कृषि और कृषि-तकनीक, सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा महिला नेतृत्व वाले कारोबार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। भारत ने इस मंच के माध्यम से विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पुतिन बोले- ब्रिक्स के बीच कारोबारी संबंध हो रहे मजबूत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के आपसी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और आपसी कारोबार को बढ़ावा देना समूह का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच दुनिया के व्यापार का बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है और समूह के माध्यम से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। उन्होंने भारत की तेजी से आगे बढ़ रही आईटी कंपनियों का भी उल्लेख किया।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि जीडीपी के मामले में ब्रिक्स ने जी-7 को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने पश्चिमी देशों पर प्रतिस्पर्धा से बचने का आरोप लगाते हुए रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। पुतिन ने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस आगे बढ़ा है और दुनिया में गहरे संरचनात्मक तथा व्यापक बदलाव हो रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स की बड़ी हिस्सेदारी
पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक जीडीपी ब्रिक्स देशों से आई, जबकि तथाकथित जी-7 देशों की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में ब्रिक्स के योगदान को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में आधे से अधिक योगदान ब्रिक्स देशों का रहा, जबकि जी-7 का योगदान केवल 18 प्रतिशत रहा। पुतिन के अनुसार, इसका प्रमुख कारण ब्रिक्स देशों की बड़ी आबादी और उनके घरेलू बाजारों में मौजूद गतिशीलता है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के विशाल घरेलू बाजारों में मांग और विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। यही कारण है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में इन देशों की भूमिका और बढ़ सकती है।
ब्राजील ने कहा- ब्रिक्स ने खुद को और मजबूत किया
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में गहरे बदलाव हो रहे हैं और इन बदलावों के पीछे ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं की दशकों से जारी लगातार वृद्धि प्रमुख कारणों में से एक है।
उन्होंने कहा कि 1960 के दशक से आज तक दुनिया की जीडीपी में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वर्तमान में ब्रिक्स देश दुनिया के आर्थिक उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
विएरा ने कहा कि हालिया विस्तार के बाद ब्रिक्स ने खुद को दुनिया की कुछ सबसे गतिशील और समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मंच के रूप में मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था संरक्षणवाद, आर्थिक दबाव और एकतरफा प्रतिबंधों जैसी चुनौतियों से गुजर रही है, सदस्य देशों के उत्पादन क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
ईरानी राष्ट्रपति बोले- दुनिया जटिल दौर से गुजर रही
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत की मेजबानी की सराहना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के भीतर सहयोग को वास्तविक आर्थिक साझेदारी में बदलने की जरूरत है।
पेजेशकियन ने कहा कि दुनिया आज सबसे जटिल दौर में से एक से गुजर रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने देशों के आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं है, बल्कि तब सामने आती है जब इन आर्थिक क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदला जाता है।
उन्होंने कहा कि अब केवल संभावित सहयोग की बात करने से आगे बढ़कर व्यावहारिक और प्रभावी सहयोग की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
पीयूष गोयल बोले- सहयोग का लाभ किसानों और युवाओं तक पहुंचे
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
उन्होंने कहा कि सहयोग का लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही कारोबार और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने तथा युवा उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए संपत्ति और समृद्धि के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होना चाहिए।
गोयल ने बताया कि ब्रिक्स देशों और साझेदार देशों के 2,000 से अधिक कारोबारी नेता और प्रतिनिधि फोरम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह अब तक आयोजित सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है।
उन्होंने बताया कि फोरम में गैर-शुल्क बाधाओं, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं पर उनके प्रभाव, कृषि और कृषि-तकनीक, सेवा व्यापार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की 44 से अधिक सिफारिशें
पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट पूरी कर ली है, जिसमें 44 से अधिक सिफारिशें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सिफारिशों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
उन्होंने ब्रिक्स महिला बिजनेस अलायंस की बैठक का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार पिछले दो दिनों में हुई बैठक में ब्रिक्स देशों में महिला नेतृत्व वाले कारोबारों की बड़ी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए आगे की दिशा तय की गई।
भारत-रूस संबंधों पर मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस वर्ष दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात बताई गई।
बैठक में भारत और रूस के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल आधारित श्रम आवाजाही और लोगों के बीच संपर्क समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई।
दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। विशेष रूप से भारत की 2026 की अध्यक्षता में ब्रिक्स के भीतर सहयोग पर चर्चा हुई।
पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र पर भी चर्चा
मोदी और पुतिन ने आपसी हित से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इनमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्ष शामिल रहे। इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि भारत शांति के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।
दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच भी इसके महत्व को रेखांकित किया गया।
पुतिन ने मोदी को रूस आने का दिया निमंत्रण
बैठक के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
शिखर सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा के अनुसार राजनयिक माध्यमों से तय की जाएगी। माना जा रहा है कि आगामी वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच होगा।
इनोप्रॉम प्रदर्शनी में साथ-साथ पहुंचे मोदी और पुतिन
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने इनोप्रॉम प्रदर्शनी का भी दौरा किया। दोनों नेताओं ने विभिन्न उद्योगों से जुड़े स्टॉलों पर जाकर उत्पादों और तकनीकी परियोजनाओं की जानकारी ली।
इस दौरान दोनों ने हवाई जहाजों के इंजन से लेकर बुलेट ट्रेन से जुड़े प्रोजेक्ट तक देखे। औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में भारत तथा रूस के बीच सहयोग की संभावनाओं के लिहाज से भी इस दौरे को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रदर्शनी के दौरान दोनों नेताओं ने उद्योग और तकनीक के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को देखा। इससे यह संकेत भी मिला कि दोनों देश पारंपरिक सहयोग के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और औद्योगिक साझेदारी को भी आगे बढ़ाने में रुचि रखते हैं।
पुतिन को प्रधानमंत्री मोदी ने भेंट की तिरुक्कुरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल की पुस्तक भेंट की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक मानव मूल्यों से जुड़ी हुई है और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर सकती है।
तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर से जुड़ा प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें नैतिकता, राजनीतिक एवं आर्थिक मामलों और प्रेम जैसे विषयों से संबंधित दोहे शामिल हैं। यह तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से प्रशंसित कृतियों में गिना जाता है।
प्रधानमंत्री की ओर से तिरुक्कुरल भेंट किए जाने को भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानव मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में भी देखा गया। भारत और रूस के बीच राजनीतिक एवं रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ सांस्कृतिक संपर्कों को मजबूत करने की दिशा में भी ऐसे अवसर महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ब्रिक्स के विस्तार से बढ़ी आर्थिक संभावनाएं
ब्रिक्स के विस्तार के साथ समूह के सामने आर्थिक सहयोग के नए अवसर पैदा हुए हैं। सदस्य और साझेदार देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में नेताओं के वक्तव्यों से यह स्पष्ट हुआ कि समूह केवल राजनीतिक संवाद का मंच नहीं रहना चाहता, बल्कि इसे आर्थिक सहयोग के व्यावहारिक माध्यम के रूप में भी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
विशाल आबादी, बढ़ते घरेलू बाजार और विकास की संभावनाओं वाले देशों की भागीदारी से ब्रिक्स का आर्थिक आधार और व्यापक हुआ है। ऐसे में व्यापारिक बाधाओं को कम करना, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ाना और निवेश के नए अवसर तैयार करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।
ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं और उनकी बढ़ती भूमिका का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। भारत समेत कई सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील देशों को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।
ब्रिक्स के विस्तार ने इस बहस को और व्यापक बनाया है। सदस्य देशों के नेताओं ने व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में संतुलन और अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारत की अध्यक्षता में आर्थिक सहयोग पर विशेष फोकस
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आर्थिक सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। व्यापार और निवेश के साथ कृषि-तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, एमएसएमई, महिला उद्यमिता और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों को भी चर्चा के केंद्र में रखा गया है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में सामने आए विचारों से संकेत मिला कि आने वाले समय में समूह के भीतर कारोबारी संपर्क बढ़ाने, नए निवेश अवसर तैयार करने और सदस्य देशों के निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
इस पूरे सम्मेलन में एक तरफ जहां वैश्विक आर्थिक बदलावों और ब्रिक्स की बढ़ती ताकत पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी तरफ भारत-रूस जैसे द्विपक्षीय संबंधों को भी नई ऊर्जा देने के प्रयास दिखाई दिए। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक, रूस आने का निमंत्रण, इनोप्रॉम प्रदर्शनी का दौरा और तिरुक्कुरल भेंट जैसे घटनाक्रमों ने सम्मेलन के कूटनीतिक और सांस्कृतिक पक्ष को भी महत्वपूर्ण बना दिया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

