खेकड़ा,15 अगस्त 2026 (यूटीएन)। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एमएम डिग्री कॉलेज में छात्र-छात्राओं को देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत चर्चित फिल्म ‘बॉर्डर’ प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाई गई। फिल्म प्रदर्शन के दौरान कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। फिल्म के माध्यम से छात्र-छात्राओं को वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी, उस दौर के मानवीय दर्द और देश की एकता-अखंडता के महत्व से परिचित कराया गया।
फिल्म के प्रदर्शन का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल मनोरंजन कराना नहीं, बल्कि उन्हें देश के इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय से रूबरू कराना था, जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। फिल्म के विभिन्न दृश्यों के माध्यम से विद्यार्थियों ने विभाजन के दौरान लोगों के विस्थापन, संघर्ष, पीड़ा और बिछड़ने की घटनाओं को महसूस किया। साथ ही उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा में भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को भी करीब से समझा।
फिल्म में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति समर्पण को देखकर छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना और अधिक प्रबल हुई। सैनिकों के त्याग और विपरीत परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए डटे रहने के दृश्यों ने विद्यार्थियों को भावुक कर दिया। कई दृश्यों के दौरान विद्यार्थियों ने तालियां बजाकर सैनिकों के साहस और बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि देश की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं की सुरक्षा के पीछे असंख्य लोगों का त्याग और संघर्ष जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता का मूल्य समझने के साथ-साथ देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुनील तोमर ने कहा कि विभाजन की विभीषिका को याद करना केवल इतिहास के पन्नों को पलटना नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को अतीत से सीख लेने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा और उन्हें विस्थापन तथा असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इतिहास के ऐसे अध्यायों को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उन घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में समाज को अधिक मजबूत, शांतिपूर्ण और एकजुट बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इतिहास को समझें और उससे प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में योगदान दें।
प्राचार्य ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता में निहित है। अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं, संस्कृतियों और विचारों के बावजूद भारतीय समाज एक राष्ट्र के रूप में एकजुट है। उन्होंने विद्यार्थियों से जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर होने वाले भेदभाव से दूर रहने तथा सभी के प्रति सम्मान और भाईचारे की भावना रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा के साथ-साथ देश के इतिहास, संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों की भी जानकारी होनी चाहिए। जागरूक और जिम्मेदार युवा ही देश को मजबूत और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिल्म प्रदर्शन के दौरान कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने काफी रुचि के साथ फिल्म देखी। विद्यार्थियों ने कहा कि किताबों में पढ़े गए इतिहास को दृश्य माध्यम से देखना उनके लिए अलग अनुभव रहा। फिल्म के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि विभाजन जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का प्रभाव केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन पर भी गहरा पड़ा था।
विद्यार्थियों ने भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को भी प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। उनके त्याग और समर्पण के कारण ही देशवासी सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन जी पाते हैं।
आयोजन में कॉलेज के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों से विभाजन की त्रासदी से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को समझने और इतिहास से सकारात्मक सीख लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अतीत की घटनाओं से परिचित होना जरूरी है, ताकि वह भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सामाजिक एकता और सौहार्द को मजबूत कर सके।
कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रहा। फिल्म के माध्यम से विद्यार्थियों में देश के प्रति सम्मान, सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से अलग वास्तविक जीवन और इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं से जोड़ते हैं। दृश्य माध्यम के जरिए विद्यार्थी घटनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समझ पाते हैं और उनके भीतर राष्ट्रीय चेतना का विकास होता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने तथा समाज में शांति, भाईचारे और आपसी सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। आयोजन ने विद्यार्थियों को विभाजन के दर्दनाक इतिहास से सीख लेने के साथ-साथ देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी दिया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

