नई दिल्ली, 17 जून 2026 (यूटीएन)। पिछले साल अक्तूबर में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत की खबरों ने लोगों को काफी डरा दिया था। दवा के सेवन के कारण कई बच्चों की किडनी फेलियर से मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बच्चों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग पर सलाह जारी की थी। जांच में पाया गया था कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48% से ज्यादा पाई गई, जबकि स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है।
अब इसपर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके तहत कफ सिरप समेत अन्य सिरप वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी। अब ऐसी दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन की जरूरी होगा। यह बदलाव सरकार द्वारा 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में 'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026' के जरिए किए गए संशोधन के बाद आया है। इस संशोधन को 9 जून को सरकारी गजट में नोटिफाई किया गया था।
*क्या कहता है नया नोटिफिकेशन?*
सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में बदलाव किया है। इसके तहत 'शेड्यूल-के' में छूट वाली दवाओं की लिस्ट से सिरप को हटा दिया गया है। 'शेड्यूल के' में ऐसी दवाएं आती हैं जिन्हें बनाने, बेचने से जुड़े कुछ नियमों से छूट मिली होती है। इस बदलाव से सिरप-बेस्ड दवाओं की 'ओवर-द-काउंटर' (बिना डॉक्टर की पर्ची के) बिक्री पर रोक लग गई है। यह बदलाव खांसी और मुंह से ली जाने वाली लिक्विड दवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ने और उन पर रेगुलेटरी नजर बढ़ने के बीच किया गया है।
नोटिफिकेशन में कहा गया है, "ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 (जो ऑफिशियल गजट में छपते ही तुरंत लागू हो जाएंगे) के तहत बिना डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन के सिरप (खांसी के सिरप सहित, जिनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है) बेचने पर रोक लगा दी गई है। आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करने के बाद, केंद्र सरकार ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से सलाह-मशविरा करके इस बदलाव को मंजूरी दी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

