बिनौली,28 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। बरनावा स्थित महाभारतकालीन प्रसिद्ध लाक्षागृह परिसर में स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल में सोमवार को आध्यात्मिक एवं वैदिक वातावरण के बीच ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में दो दिवसीय सामवेद पारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। आयोजन के दौरान पांच यज्ञशालाओं में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया गया। विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर धर्मलाभ अर्जित किया और ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
गुरुकुल परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रों की गूंज, यज्ञ की सुगंध और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञशालाओं में विधि-विधान के साथ आहुतियां प्रदान कीं। आयोजन में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
आध्यात्मिक ज्ञान जीवन को दिखाता है सही मार्ग
यज्ञीय कार्यक्रम के दौरान वेदोपदेश देते हुए आयोजन के ब्रह्म वैदिक विद्वान एवं प्रधानाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान और सद्कर्म का प्रकाश आने के बाद उसका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति वेदों के ज्ञान को समझकर उसे अपने जीवन में उतारता है और अच्छे कर्मों को अपनाता है, तो उसके भीतर सत्य, संयम, सेवा और सदाचार की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देता है। सद्कर्म और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को संस्कारित कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान एवं सद्कर्म का प्रकाश आ जाता है, उसे परमात्मा की कृपा और अनुभूति का प्रसाद अवश्य प्राप्त होता है।
अरविंद शास्त्री ने श्रद्धालुओं से वैदिक संस्कृति, संस्कार और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ भारतीय वैदिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है और इसके माध्यम से मनुष्य में त्याग, सेवा, अनुशासन तथा लोककल्याण की भावना मजबूत होती है।
सह ब्रह्मा गुरवचन शास्त्री ने बताई यज्ञ की महत्ता
इस अवसर पर सह ब्रह्मा गुरवचन शास्त्री ने भी श्रद्धालुओं को यज्ञ की महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वैदिक परंपरा में यज्ञ को केवल धार्मिक कर्मकांड के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इसे आत्मशुद्धि, अनुशासन और लोककल्याण से जोड़कर समझाया गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को यज्ञीय परंपराओं और वैदिक जीवन पद्धति के महत्व की जानकारी दी। उनके अनुसार, यज्ञ के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर सकारात्मक विचारों का विकास कर सकता है और समाज में भी सद्भाव तथा संस्कारों को मजबूत करने का संदेश पहुंचाया जा सकता है।
ध्वजारोहण के साथ हुआ आयोजन का शुभारंभ
दो दिवसीय सामवेद पारायण महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ गांधी धाम समिति के प्रधान यशोधर्मा एवं मंत्री राजपाल त्यागी ने ध्वजारोहण कर किया। ध्वजारोहण के बाद वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञीय कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया।
आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुति दी। इस दौरान गुरुकुल परिसर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया। यज्ञशालाओं में आचार्यों एवं विद्वानों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने निर्धारित विधि के अनुसार यज्ञीय अनुष्ठान में भाग लिया।
पांच यज्ञशालाओं में हुआ सामवेद पारायण
आयोजन की विशेषता यह रही कि गुरुकुल परिसर में पांच यज्ञशालाओं पर सामवेद पारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया। विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने इनमें शामिल होकर आहुति दी। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ की प्रक्रिया संपन्न हुई।
आयोजकों ने बताया कि ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैदिक ज्ञान और संस्कारों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा भारतीय आध्यात्मिक एवं वैदिक परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ना है।
विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालु
महायज्ञ में जिले के अलावा कई अन्य प्रांतों से भी श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर धर्मलाभ अर्जित किया और वैदिक विद्वानों के प्रवचन सुने। आयोजन में पहुंचे लोगों ने गुरुकुल परिसर की धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता की।
श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐतिहासिक लाक्षागृह क्षेत्र में वैदिक परंपरा के अनुरूप आयोजित होने वाला ऐसा कार्यक्रम धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहां यज्ञ और वेदोपदेश के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक चिंतन तथा भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
यज्ञमानों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
यज्ञीय समारोह में बीएसएनएल के पूर्व जीएम चन्द्रहास, देवेंद्र शर्मा, सतीश शर्मा, पंकज राठी और सहदेव आर्य यज्ञमान रहे। यज्ञमानों ने विधि-विधान के साथ यज्ञ में सहभागिता करते हुए आहुति दी।
इस दौरान वैदिक विद्वानों ने यज्ञ की विभिन्न प्रक्रियाओं को संपन्न कराया और श्रद्धालुओं को वैदिक मंत्रों एवं यज्ञीय परंपरा के महत्व की जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने धार्मिक वातावरण में मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में भाग लेकर आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।
वैदिक संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को मजबूत करना भी आवश्यक है। बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, वेदों, संस्कारों तथा सदाचार से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
गुरुकुल परिसर में आयोजित सामवेद पारायण महायज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को वेदों के ज्ञान, यज्ञ की परंपरा और सद्कर्म के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति को अपने जीवन में संयम, अनुशासन, सेवा और सद्भाव अपनाने की प्रेरणा देता है। दो दिवसीय आयोजन के दौरान धार्मिक एवं वैदिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को शुभारंभ के बाद गुरुकुल परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरे क्षेत्र में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

