Breaking News
पड़ोसी तीन युवकों पर भाई-बहन को पीटकर घायल करने का आरोप   | गजानन के धूम्रकेतु स्वरूप की पूजा कर श्रद्धालुओं ने मांगा बल-बुद्धि का आशीर्वाद   | दीपक शर्मा बने धार्मिक रामलीला कमेटी के प्रधान, 9 अक्टूबर से शुरू होगा रामलीला मंचन   | रटौल में रोटी पर थूककर बनाने का वीडियो वायरल, आरोपी गिरफ्तार   | अतिरिक्त हल्के के बस्ते जमा कर लेखपालों ने शुरू किया कार्य बहिष्कार   | दशलक्षण महापर्व पर तप धर्म का संदेश, कर्मों की शुद्धि के लिए तप को बताया सर्वहितकारी   | सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘मेरे सपनों का भारत’ पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित   | जनता वैदिक कॉलेज में होंगे कबड्डी के रोमांचक मुकाबले, देशभर की आठ विश्वविद्यालयी टीमें दिखाएंगी दमखम   | मोदी के 25 वर्षों की सेवा को ‘नमो सेवा अनकही कहानी’ में दिखाया जाएगा, भव्य नाट्य मंचन की तैयारी : नीरज शर्मा   | घेवर-बालूशाही के लिए मिलेगी 33 लाख तक की सब्सिडी, नया उद्योग लगाने और कारोबार बढ़ाने का मौका   |
मल्टी डिजिटल मीडिया, पत्रकारिता के क्षेत्र में तुरंत आवश्यकता है देश एवं प्रदेश के सभी जगह से अनुभव गैर अनुभवी पुरुष एवं महिलाएं, देश एवं प्रदेश के सभी जिला एवं राज्य में युवक / महिलाएं संपर्क करें मल्टीमीडिया उज्जवल टाइम्स न्यूज़ में जोड़ने के लिए आपको मिल रहा है सुनहरा मौकाआप हमें अपने समाचार एवं विज्ञापन, कविता, लेख प्रकाशित करने के लिए संपर्क कर सकते हैं . E-mail- ujjwaltimesnewsnetwork@gmail.com

60 साल बाद बड़े पर्दे पर गूंजेगी वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा

1789305858_01.jpg


नई दिल्ली, 13 सितम्बर  2026  (यूटीएन)। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के अत्याधुनिक पैटन टैंकों के सामने अदम्य साहस और अद्वितीय सैन्य कौशल का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा अब बड़े पर्दे पर गूंजेगी। राजधानी के डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'देश की शान' कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन और सैन्य पराक्रम पर आधारित फिल्म 'वीर अब्दुल हमीद' के निर्माण की घोषणा की गई।

फिल्म के निर्माण की घोषणा के साथ ही कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने वीर अब्दुल हमीद के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि देश के ऐसे वीर सैनिकों की गाथाएं केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें आधुनिक माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

मुख्य अतिथि मेजर जनरल जी.डी. बख्शी (सेवानिवृत्त) ने फिल्म निर्माण की घोषणा को लंबे समय से प्रतीक्षित कदम बताया। उन्होंने कहा कि करीब छह दशक बाद वीर अब्दुल हमीद की वीरता और बलिदान को बड़े पर्दे पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक सैनिक की कहानी नहीं होगी, बल्कि भारतीय सेना के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणादायक गाथा को सामने लाने का माध्यम बनेगी।

असल उत्तर की लड़ाई में दिखाई अद्भुत वीरता

मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने कहा कि वर्ष 1965 के युद्ध के दौरान असल उत्तर की लड़ाई भारतीय सैन्य इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है। इसी युद्धक्षेत्र में वीर अब्दुल हमीद ने दुश्मन के पैटन टैंकों के खिलाफ असाधारण साहस का परिचय दिया था।

उन्होंने कहा कि उस दौर में पाकिस्तान के पास अमेरिका निर्मित पैटन टैंक थे, जिन्हें बेहद शक्तिशाली और आधुनिक माना जाता था। ऐसे टैंकों का मुकाबला करना भारतीय सैनिकों के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद वीर अब्दुल हमीद ने परिस्थितियों की परवाह किए बिना मोर्चे पर डटे रहकर दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाया।

मेजर जनरल बख्शी ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद ने जिस साहस, सूझबूझ और आत्मविश्वास के साथ युद्धभूमि में अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह भारतीय सैन्य इतिहास में प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने कहा, “वीर अब्दुल हमीद पर फिल्म बनना बहुत पहले हो जाना चाहिए था। असल उत्तर की लड़ाई में उन्होंने जिस वीरता से दुश्मन के पैटन टैंकों को नष्ट किया, उसकी मिसाल कम मिलती है। देर से ही सही, अब उनके योगदान को बड़े पर्दे पर लाया जा रहा है।”

साधारण परिवार से निकले असाधारण योद्धा

वीर अब्दुल हमीद का जीवन इस बात की मिसाल माना जाता है कि सामान्य परिस्थितियों से निकलकर भी कोई व्यक्ति असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर देश के इतिहास में अमर स्थान बना सकता है।

उनका सैन्य जीवन अनुशासन, साहस और देश के प्रति समर्पण से जुड़ा रहा। भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। युद्ध के कठिन समय में उन्होंने जिस बहादुरी का परिचय दिया, उसने उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक परमवीर चक्र का हकदार बनाया।

फिल्म में उनके जीवन के इसी संघर्ष, सैन्य प्रशिक्षण, पारिवारिक पृष्ठभूमि, सेना में सेवा और युद्धभूमि तक पहुंचने की यात्रा को दिखाने का प्रयास किया जाएगा।

पैटन टैंकों के सामने नहीं डिगे कदम

1965 का युद्ध भारतीय सेना के लिए चुनौतीपूर्ण दौर था। युद्ध के दौरान दुश्मन की बख्तरबंद शक्ति का मुकाबला करना महत्वपूर्ण था। पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे पैटन टैंकों को उस समय बेहद शक्तिशाली माना जाता था।

ऐसे में वीर अब्दुल हमीद ने अपने साहस और युद्ध कौशल से दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि युद्ध में केवल हथियारों की तकनीकी क्षमता ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि सैनिक का साहस, प्रशिक्षण, रणनीतिक समझ और आत्मविश्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनकी वीरता की कहानी भारतीय सैनिकों के अदम्य मनोबल की प्रतीक बन गई।

सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हुए

युद्धभूमि में वीर अब्दुल हमीद ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका जीवन और शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई।

उनकी वीरता के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान युद्ध के दौरान सर्वोच्च स्तर की वीरता और असाधारण साहस के लिए दिया जाता है।

वक्ताओं ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद की कहानी भारतीय सेना की उस परंपरा को दर्शाती है, जिसमें सैनिक देश की सुरक्षा को अपने व्यक्तिगत जीवन से ऊपर रखते हैं।

पुस्तक पर आधारित होगी फिल्म

फिल्म के निर्माता रईस खान और एसोसिएट प्रोड्यूसर हेमंत कुमार ने बताया कि फिल्म लेखक सैयद अहसान अली की पुस्तक पर आधारित होगी।

निर्माताओं के अनुसार फिल्म में वीर अब्दुल हमीद के जीवन के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें उनके प्रारंभिक जीवन से लेकर सेना में शामिल होने, सैन्य प्रशिक्षण, युद्ध के अनुभव और वर्ष 1965 के युद्ध में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को कहानी के केंद्र में रखा जाएगा।

फिल्म निर्माताओं का कहना है कि प्रयास रहेगा कि वीर अब्दुल हमीद के व्यक्तित्व को केवल युद्धभूमि के एक बहादुर सैनिक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में भी सामने लाया जाए, जिसने अपने कर्तव्य को सर्वोच्च माना।

युद्ध के ऐतिहासिक परिदृश्य को भी दिखाया जाएगा

फिल्म में केवल वीर अब्दुल हमीद की व्यक्तिगत वीरता ही नहीं, बल्कि वर्ष 1965 के युद्ध की ऐतिहासिक परिस्थितियों को भी दर्शाने का प्रयास किया जाएगा।

निर्माताओं के अनुसार उस दौर का सैन्य वातावरण, सैनिकों की तैयारियां, युद्धभूमि की परिस्थितियां, बख्तरबंद युद्ध और भारतीय सैनिकों के सामने मौजूद चुनौतियों को कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।

इससे दर्शकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वीर अब्दुल हमीद ने किन परिस्थितियों में अपना साहस दिखाया और उनके सामने किस प्रकार की सैन्य चुनौती थी।

नई पीढ़ी को मिलेगा इतिहास से जुड़ने का अवसर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता सेनानियों और सैन्य नायकों की कहानियों से जोड़ना जरूरी है। बदलते समय में सिनेमा और डिजिटल माध्यम युवाओं तक इतिहास पहुंचाने के प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद जैसे सैनिकों की कहानियां युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन, साहस और जिम्मेदारी की भावना पैदा कर सकती हैं।

फिल्म के माध्यम से देश के उन वीर सैनिकों की गाथा को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास होगा, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

'देश की शान' कार्यक्रम में हुई घोषणा

डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'देश की शान' कार्यक्रम का वातावरण वीर सैनिकों के सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की परंपरा को याद किया।

इसी दौरान वीर अब्दुल हमीद के जीवन पर फिल्म बनाने की घोषणा की गई। घोषणा के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल का स्वागत किया और इसे लंबे समय से अपेक्षित प्रयास बताया।

सैनिकों की वीरगाथाओं को सामने लाने की जरूरत

वक्ताओं ने कहा कि देश के सैन्य इतिहास में ऐसे अनेक अध्याय हैं, जिनमें सैनिकों ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया। लेकिन समय बीतने के साथ इन कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार कम हो जाता है।

सिनेमा के माध्यम से इन घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने से नई पीढ़ी इतिहास को अधिक प्रभावी ढंग से समझ सकती है। फिल्में भावनात्मक स्तर पर भी दर्शकों को जोड़ती हैं और वीर सैनिकों के जीवन तथा बलिदान को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

वीर अब्दुल हमीद की कहानी में देशभक्ति का संदेश

फिल्म निर्माताओं के मुताबिक वीर अब्दुल हमीद की कहानी में देशभक्ति का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आएगा। युद्धभूमि में उनका साहस, अपने साथियों के प्रति जिम्मेदारी और देश की रक्षा के प्रति उनका समर्पण फिल्म की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सैनिक किस प्रकार कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते।

असल उत्तर की वीरगाथा फिर होगी जीवंत

असल उत्तर की लड़ाई का नाम भारतीय सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण युद्ध प्रसंगों में लिया जाता है। इसी मोर्चे पर वीर अब्दुल हमीद की बहादुरी ने उन्हें अमर कर दिया।

फिल्म में युद्ध के दृश्यों के माध्यम से उस दौर की परिस्थितियों को जीवंत करने की कोशिश की जाएगी। दुश्मन के टैंकों के सामने भारतीय सैनिकों के संघर्ष और वीर अब्दुल हमीद की भूमिका को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।

दर्शकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फिल्मकार युद्धभूमि के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम को किस प्रकार पर्दे पर प्रस्तुत करते हैं।

केवल फिल्म नहीं, एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनाने की कोशिश

कार्यक्रम में वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि फिल्म मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज का काम करेगी।

उन्होंने कहा कि जब किसी वीर सैनिक की कहानी बड़े पर्दे पर आती है तो उसके जीवन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर लोगों की रुचि भी बढ़ती है। इससे इतिहास, सैन्य परंपराओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

छह दशक बाद मिलेगा व्यापक मंच

वीर अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद से ही उनकी वीरता की चर्चा देश में होती रही है। हालांकि उनके जीवन और शौर्य पर बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण की पहल अब सामने आई है।

कार्यक्रम में इसे करीब छह दशक बाद उनकी वीरगाथा को बड़े पर्दे पर व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने भी कहा कि देश के इस महानायक को जिस स्तर पर सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए थी, उसके लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं।

युवाओं के लिए बनेगी प्रेरणा

फिल्म के जरिए युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि देश सेवा केवल शब्द नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समर्पण का नाम है। वीर अब्दुल हमीद का जीवन बताता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया जा सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को देश के सैन्य इतिहास से परिचित कराने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों पर भी ऐसी वीरगाथाओं को सामने लाने की जरूरत है।

सेना के साहस और बलिदान को मिलेगा सम्मान

फिल्म के निर्माण को भारतीय सेना के उन सभी जवानों के सम्मान से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना जीवन न्योछावर किया। वीर अब्दुल हमीद की कहानी उनके जैसे अनगिनत सैनिकों की वीरता का प्रतिनिधित्व करती है।

फिल्म निर्माताओं का उद्देश्य उनके जीवन और बलिदान को इस तरह प्रस्तुत करना है कि दर्शक न केवल युद्ध की कठिनाइयों को समझें, बल्कि सैनिकों के त्याग और परिवारों के संघर्ष को भी महसूस कर सकें।

इतिहास को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि इतिहास केवल तारीखों और घटनाओं का संग्रह नहीं है। इतिहास उन लोगों की कहानियों से बनता है, जिन्होंने असाधारण परिस्थितियों में असाधारण निर्णय लिए।

वीर अब्दुल हमीद की कहानी इसी तरह की प्रेरणादायक गाथा है। उनके जीवन को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने से देश के युवाओं को भारतीय सैन्य इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

फिल्म की घोषणा के साथ ही अब दर्शकों की निगाहें इसके निर्माण, कलाकारों, निर्देशन, शूटिंग और रिलीज से जुड़ी आगामी जानकारियों पर रहेंगी। हालांकि फिल्म से जुड़ी विस्तृत कास्ट और रिलीज की जानकारी निर्माताओं की ओर से आगे साझा की जाएगी।

कुल मिलाकर, 'वीर अब्दुल हमीद' के रूप में भारतीय सिनेमा में एक ऐसे सैन्य नायक की कहानी सामने आने जा रही है, जिसने वर्ष 1965 के युद्ध में असाधारण साहस दिखाकर अपना नाम देश के इतिहास में अमर कर दिया। करीब 60 वर्ष बाद बड़े पर्दे पर उनकी शौर्यगाथा का पुनर्जीवित होना न केवल उनके प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सैनिकों के साहस, त्याग और राष्ट्रसेवा की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







Breaking Update

🌐 Translate
🔔 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें ×
📢 ताज़ा खबर WhatsApp पर पाएँ