बागपत,03 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। जिले में लेखपालों द्वारा अतिरिक्त हलकों का काम छोड़ने का असर अब सीधे आम लोगों के राजस्व संबंधी कार्यों पर दिखाई देने लगा है। आदमपुर निवासी मिंटू ने आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगने के कारण उसका प्रमाणपत्र अभी तक जारी नहीं हो सका। मिंटू की तरह जिले में बड़ी संख्या में लोग अपने प्रमाणपत्र और जमीन संबंधी कार्य पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।
लेखपालों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे विरोध के कारण जिले के 54 अतिरिक्त राजस्व हलकों का काम प्रभावित हुआ है। इसका असर करीब 3500 प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट, 100 वारिसान के मामलों और 115 नाली-चकरोड व जमीनों की पैमाइश पर पड़ा है। लेखपाल की जांच और रिपोर्ट राजस्व संबंधी कई प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में रिपोर्ट लंबित होने के कारण संबंधित आवेदनों को आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है।
जिले में 130 राजस्व हलके
बागपत जिले में कुल 130 राजस्व हलके हैं। इनमें से 54 अतिरिक्त हलकों का काम प्रभावित होने से बागपत, बड़ौत और खेकड़ा तहसील क्षेत्रों के कई गांवों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आय, जाति, निवास समेत विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए लेखपाल की जांच और रिपोर्ट की आवश्यकता होती है।
आवेदक ऑनलाइन या संबंधित कार्यालय में आवेदन करने के बाद यह उम्मीद करते हैं कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत जल्द प्रमाणपत्र जारी हो जाएगा, लेकिन लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगने से कई मामलों में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे लोगों को प्रमाणपत्रों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट के लिए इंतजार
बताया गया है कि जिले में करीब 3500 प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट लंबित है। इनमें आय, जाति, निवास सहित अन्य राजस्व प्रमाणपत्रों से जुड़े आवेदन शामिल हैं। इन प्रमाणपत्रों की जरूरत विद्यार्थियों, नौकरी के आवेदकों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और अन्य नागरिकों को अलग-अलग कार्यों के लिए पड़ती है।
आय प्रमाणपत्र लंबित होने से ऐसे आवेदकों को सबसे अधिक परेशानी हो सकती है, जिनके किसी आवेदन या सरकारी प्रक्रिया में प्रमाणपत्र जमा करने की समय सीमा निर्धारित है। इसी तरह जाति और निवास प्रमाणपत्र भी विभिन्न प्रशासनिक एवं शैक्षिक कार्यों में इस्तेमाल होते हैं।
वारिसान के 100 मामले भी लंबित
लेखपालों के अतिरिक्त हलकों का काम प्रभावित होने से पैतृक संपत्ति में वारिसों के नाम दर्ज कराने के करीब 100 मामले भी अटक गए हैं। ऐसे मामलों में संबंधित भूमि और परिवार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद रिपोर्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
वारिसान दर्ज होने में देरी का असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो पैतृक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं। लेखपाल की रिपोर्ट लंबित होने से इन मामलों के निस्तारण में समय लग रहा है।
115 पैमाइश के मामले अटके
वहीं जिले में नाली, चकरोड और जमीनों की करीब 115 पैमाइश भी लंबित बताई गई हैं। जमीन की सीमाओं, रास्तों और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में पैमाइश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पैमाइश नहीं होने के कारण खेतों की सीमा, रास्ते और चकरोड से जुड़े विवादों का समाधान भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों में राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जाता है।
10 साल से 2800 ग्रेड पे की मांग
लेखपाल अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में 10 वर्षों से 2800 ग्रेड पे और वेतन विसंगति दूर करना शामिल है। लेखपालों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से शासन स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
इसके अलावा आठ वर्षों से लंबित अंतर मंडलीय स्थानांतरण की मांग भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। लेखपालों के अनुसार स्थानांतरण से संबंधित प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है, जिससे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पदोन्नति सूची जारी करने की मांग
लेखपालों की ओर से दो वर्षों से लंबित पदोन्नति सूची जारी करने की मांग भी की जा रही है। इसके साथ ही 16 वर्षों से भत्ते में बढ़ोतरी की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
लेखपालों का कहना है कि उनकी सेवा से संबंधित कई विषय लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों के समाधान को लेकर अतिरिक्त हलकों का कार्य नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
नवनियुक्त लेखपालों के स्थायीकरण की मांग
लेखपालों की मांगों में नवनियुक्त लेखपालों का स्थायीकरण भी शामिल है। इसके अलावा परिषदादेश के बाद भी लेखपालों को राजस्व निरीक्षक के कार्यों से अवमुक्त करने की मांग की जा रही है।
लेखपालों का कहना है कि उनके मूल कार्यों के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी प्रभावित होती हैं, इसलिए संबंधित आदेशों के अनुसार कार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
तकनीकी पद घोषित करने और सुरक्षा की भी मांग
लेखपालों की ओर से लंबित परीक्षा परिणाम घोषित करने, लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने तथा सचिवालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की जा रही है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया है।
आम लोगों की बढ़ी परेशानी
लेखपालों के अतिरिक्त हलकों का काम नहीं करने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से तहसील और राजस्व कार्यालय पहुंच रहे लोगों को कई मामलों में यह जानकारी मिल रही है कि संबंधित रिपोर्ट अभी लंबित है।
लोगों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया है, लेकिन रिपोर्ट नहीं लगने के कारण उन्हें दोबारा कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रमाणपत्रों और जमीन संबंधी मामलों में देरी के कारण आवेदकों को आगे की प्रक्रिया शुरू करने में भी परेशानी हो रही है।
तीनों तहसीलों के कई गांव प्रभावित
54 अतिरिक्त हलकों का काम प्रभावित होने का असर बागपत, बड़ौत और खेकड़ा तहसील क्षेत्र के संबंधित गांवों में दिखाई दे रहा है। राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों में लेखपालों की भूमिका महत्वपूर्ण होने के कारण अतिरिक्त हलकों का काम प्रभावित होने से कई प्रकार के आवेदन लंबित हो गए हैं।
प्रशासन के सामने अब लंबित प्रमाणपत्रों, वारिसान और पैमाइश के मामलों को जल्द निस्तारित कराने के साथ-साथ लेखपालों की मांगों से जुड़े मुद्दों को हल करने की चुनौती है।
आंकड़ों में स्थिति
- जिले में कुल राजस्व हलके: 130
- अतिरिक्त हलकों का काम छोड़ने वाले लेखपाल: 54
- लंबित प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट: करीब 3500
- लंबित वारिसान के मामले: करीब 100
- लंबित नाली-चकरोड व जमीनों की पैमाइश: करीब 115
- 2800 ग्रेड पे की मांग: करीब 10 वर्षों से
- अंतर मंडलीय स्थानांतरण की मांग: करीब 8 वर्षों से
- पदोन्नति सूची: करीब 2 वर्षों से लंबित
- भत्ते में बढ़ोतरी की मांग: करीब 16 वर्षों से
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

