बागपत,03 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण तथा आमजन को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगामी 12 सितंबर को जिला न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
इसी क्रम में तैयारियों को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश और रणनीति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों एवं न्यायालयों से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए प्रभावी समन्वय पर जोर दिया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में होगा आयोजन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता सिंह-II ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोज कुमार-III के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाली लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के मामलों को सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना तथा आपसी सहमति के आधार पर मामलों का सरल और शीघ्र समाधान उपलब्ध कराना है।
आपसी सुलह से खत्म होंगे विवाद
राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका समाधान दोनों पक्षों की सहमति से संभव है। पक्षकारों को आपसी समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने का अवसर मिलेगा।
लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पक्षकारों के बीच सहमति बनने पर मामले का निस्तारण अपेक्षाकृत सरल तरीके से किया जा सकता है। इससे लोगों का समय और धन दोनों बचता है तथा लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से भी राहत मिलती है।
चेक बाउंस के मामलों का भी होगा निस्तारण
लोक अदालत में धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित चेक के मामलों का भी निस्तारण कराया जा सकेगा। इसके अलावा धन वसूली से संबंधित मामलों को भी सुलह-समझौते के आधार पर समाप्त करने का अवसर मिलेगा।
चेक से जुड़े मामलों में लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोनों पक्षों को परेशानी होती है। ऐसे मामलों में यदि पक्षकार आपसी सहमति से समाधान पर पहुंचते हैं तो लोक अदालत के माध्यम से विवाद का निस्तारण कराया जा सकता है।
मोटर दुर्घटना दावा मामलों पर भी रहेगा जोर
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा से जुड़े मामलों को भी निस्तारित किया जा सकेगा। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में पीड़ित पक्ष और संबंधित पक्षों के बीच मुआवजे को लेकर सहमति बनने पर मामले का समाधान कराया जा सकता है।
इससे दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय से राहत मिल सकती है।
श्रम विवाद भी होंगे निस्तारित
लोक अदालत में श्रम विवादों को भी सुलह के आधार पर निस्तारित करने का प्रावधान रहेगा। श्रमिकों और संबंधित प्रतिष्ठानों या संस्थानों के बीच उत्पन्न विवादों को आपसी सहमति के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
अधिकारियों ने संबंधित पक्षों से अपील की है कि यदि उनका कोई ऐसा मामला लंबित है, जिसका समाधान आपसी सहमति से संभव है, तो वे लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण कराने का प्रयास करें।
बिजली, पानी और कर से जुड़े मामले भी शामिल
लोक अदालत में विद्युत एवं जल-कर से जुड़े मामलों तथा लोक उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के निस्तारण का भी अवसर मिलेगा। इससे बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े विवादों को आपसी समझौते के आधार पर खत्म किया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों के निस्तारण से आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है और विभागीय स्तर पर भी लंबित विवादों का समाधान होगा।
वैवाहिक विवादों का भी होगा समाधान
लोक अदालत में वैवाहिक विवादों का भी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराया जा सकेगा। हालांकि विवाह विच्छेद से संबंधित मामले इसके दायरे में नहीं होंगे।
पारिवारिक विवादों में आपसी बातचीत और समझौते के माध्यम से समाधान होने से परिवारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। लोक अदालत का उद्देश्य भी विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कर सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है।
भूमि अधिग्रहण और राजस्व मामलों को भी अवसर
भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के अलावा पेंशन, किरायेदारी, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, विनिर्दिष्ट अनुतोष समेत अन्य दीवानी वादों का भी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराया जा सकेगा।
इसके साथ ही राजस्व से संबंधित मामलों को भी लोक अदालत में समाधान का अवसर मिलेगा। संबंधित पक्षकार अपने मामलों को समझौते के आधार पर निस्तारित कराने के लिए लोक अदालत का लाभ उठा सकते हैं।
प्री-लिटिगेशन मामलों का भी होगा समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि केवल न्यायालयों में लंबित मामलों तक ही इसका दायरा सीमित नहीं रहेगा। प्री-लिटिगेशन स्तर के दीवानी और शमनीय आपराधिक मामलों को भी समाधान का अवसर मिलेगा।
इसका अर्थ है कि ऐसे विवाद जो अभी अदालत में मुकदमे के रूप में दाखिल नहीं हुए हैं, लेकिन उनमें विवाद की स्थिति बनी हुई है, उन्हें भी आपसी सुलह के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास किया जा सकता है।
अशमनीय आपराधिक मामले रहेंगे बाहर
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने स्पष्ट किया कि अशमनीय प्रकृति के आपराधिक मामले राष्ट्रीय लोक अदालत के दायरे में नहीं आएंगे। केवल वे शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामले, जिनमें कानूनन समझौते की अनुमति है, उन्हें नियमानुसार लोक अदालत में निस्तारण के लिए लिया जा सकेगा।
इससे पक्षकारों को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि उनके मामले का लोक अदालत के माध्यम से समाधान संभव है या नहीं।
लोगों को मिलेगा लंबित मामलों से राहत का अवसर
राष्ट्रीय लोक अदालत आमजन के लिए अपने लंबित विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। इसमें पक्षकारों को अपने विवाद को समझौते के आधार पर समाप्त करने का मौका मिलता है।
अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के माध्यम से विवादों के समाधान से न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का बोझ कम करने में भी मदद मिलती है। साथ ही पक्षकारों को बार-बार न्यायालय आने-जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण की तैयारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 12 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। संबंधित न्यायालयों और विभागों को लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें लोक अदालत में सुलह के लिए प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
अधिकारियों ने संबंधित पक्षकारों से अपील की है कि वे अपने मामलों में आपसी सहमति की संभावनाओं पर विचार करें और राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं।
समय और धन दोनों की होगी बचत
लोक अदालत के माध्यम से विवाद का समाधान होने पर पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी से राहत मिल सकती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाला समय और खर्च भी कम हो सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोग लोक अदालत की उपयोगिता को समझें और आपसी सहमति से विवादों को समाप्त करने की दिशा में आगे आएं।
आमजन से लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि जिन लोगों के मामले लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित हो सकते हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाएं। आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त होने से दोनों पक्षों को राहत मिल सकती है।
12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा तैयारियां जारी हैं। अधिकारियों का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों को सुलह के माध्यम से निस्तारित कर आमजन को त्वरित न्याय उपलब्ध कराया जाए।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।

