नई दिल्ली, 03 फरवरी 2026 (UTN)। सन 2011 की जनगणना में जैन समाज की जनसंख्या मात्र 45 लाख बताई गई थी। सरकार द्वारा जारी इस आंकड़े से जैन समाज बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। जैन समाज का मानना है कि भारत में जैन समाज की जनसंख्या चार करोड़ से भी अधिक है। लेकिन समाज की कुछ कमियों के कारण तथा जाति व धर्म के कालम में सही जानकारी न देने के कारण संख्या का आंकलन सही नहीं हो पाया। इस वर्ष शुरू हो रही जनगणना में जैन समाज की जनसंख्या का सही आंकलन किया जा सके इसके लिए जैन समाज के प्रमुख संगठन एवं संस्थाएं राष्ट्रीय स्तर पर जन जाग्रति अभियान शुरू करेंगे जिसमें लोगों को यह समझाया जाएगा कि धर्म व जाति के कालम में उपनाम की जगह जैन लिखवाएं जिससे जैनों की जनसंख्या का सही आंकड़ा मिल सके।
इस संदर्भ में विचार विमर्श करने के लिए आचार्य प्रज्ञ सागर जी महाराज एवं श्वेतांबर समाज के राजेंद्र विजय जी महाराज के सानिध्य में जैन समाज के सभी संप्रदायों के प्रमुख नेताओं ने एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में एक बैठक व सम्मेलन आयोजित किया गया। दिगंबर जैन महासभा के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम जैन जनगणना जागृति अभियान के अतिथि के रूप में अध्यक्षता करते हुए दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जी गंगवाल ने कहा कि जैन जनगणना जागृति अभियान समाज के पदाधिकारी एवं संतों के आशीर्वाद से घर-घर तक पहुंचेगा। गंगवाल ने सभी जैन परिवारों से अपील की है कि आगामी जनगणना में धर्म के कॉलम के आगे केवल जैन लिखें। लोग अपने जाति और उपजाति में भी केवल जैन का उल्लेख करें। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान में जैन धर्म को एक पृथक एवं स्वतन्त्र धर्म के रूप में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने दावा किया है भारत में जैन समुदाय की आबादी 3 से 4 करोड़ के बीच में है।
आगामी जनगणना में यह आंकड़ा सामने आएगा। उन्होंने जैन समाज की सभी राष्ट्रीय, प्रांतीय व स्थानीय संस्थाओं को संयुक्त रूप से मिलकर इस ओर ध्यान की करने को कहा। आगामी वर्ष में जनगणना होना तय है। जनगणना के आधार पर ही यह पता चलेगा कि भारतवर्ष में कितने जैनधर्म के अनुयायी हैं। मंदिर-मंदिर और समाज-समाज, संस्था-संस्था, श्रावक – श्राविका तक इस अभियान को तीव्र गति के साथ चलाना वर्तमान परिस्थितियों में जरूरी है। संख्या कम लगने का मुख्य कारण दिगंबर, श्वेतांबर, स्थानकवासी, तेरापंथी, बीसपंथी, खंडेलवाल, जैसवाल, गंगेरवाल, ओसवाल, अग्रवाल व अन्य में विभाजित जैन समाज के सभी घटकों को जनगणना में केवल जैन लिखने की जरूरत है, तभी अपनी वास्तविक संख्या का पता लगा पाएंगे। गजराज गंगवाल ने बताया कि अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा जैन समाज के सभी संप्रदायों व संतों को साथ लेकर पूरे देश में जनजागृति अभियान चलाएगी जिसमें देश के जैन समाज को समझाया जाएगा कि धर्म और जाति के कालम में मात्र जैन लिखवाएं जिससे कि हमारी जनसंख्या का आंकलन सही हो सके।
कुछ राज्यों में पिछड़े हुए तबके के तथा आदिवासी कहे जाने वाले लोग भी जैन धर्म को मानने हैं तथा जैन तीर्थंकरों की ही उपासना करते हैं क्योंकि कि उनकी मूल संस्कृति जैन ही है लेकिन कालांतर समय के प्रभाव से वे आदिवासी के रूप में जाने लगे। गंगवाल ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पोण्ड्रा जैन जाति, उड़िसा में सराक जैन जाति, महाराष्ट्र में रिंगिया जैन जाति एवं कर्नाटक में कसार जैन जाति को आदिवासी माना जाता है लेकिन मूल रूप से यह लोग जैन हैं तथा जैन धर्म के सभी नियमों का पालन करते हैं तथा जैन तीर्थंकरों की पूजा करते हैं। जनगणना के समय जनगणना कर्मी जैन बताने के बाद भी इनकी गणना आदिवासी के कालम में कर देते हैं। हम केन्द्र सरकार से भी यह अनुरोध करेंगे कि धर्म के कालम में इन्हें जैन लिखा जाए। आचार्य प्रज्ञसागर जी महाराज ने सभी देश के आए हुए पदाधिकारी से आह्वान करते हुए कहा कि जैन जनगणना जागृति अभियान को पूरे देश के सभी मंदिरों व मंचों से आव्हान किया जायेगा कि धर्म के कालम में उपनाम की जगह सिर्फ जैन लिखवाएं जिससे सही जनगणना हो सके।
उन्होंने कहा कि जैन समाज के कई लोग अपने नाम में सरनेम के स्थान पर जैन लिखने के बजाय गोत्र का नाम लिख देते हैं। इससे उनकी पहचान नहीं हो पाती। उपनाम लिखवाने के कारण हमारी गणना जैन समाज की। जगह दूसरे धर्म व जाति में हो जाती है इससे समाजबंधुओं की सही गणना नहीं हो पाती। इस अवसर पर श्वेतांबर समाज के संतों ने भी अपने विचार रखे इस कार्यक्रम में भगवान श्री राम जन्मभूमि के लिए लड़ाई लड़ने वाले एडवोकेट विष्णु दत्त शंकर जैन ने भी अपने उद्बोधन में जैन समाज की एकता की बात करते हुए कहा कि देश में हुई जनगणना में हमारे समाज की संख्या को बहुत कम बताया गया है। इसका प्रमुख कारण है कि समाज के लोगों ने जनगणना के दौरान सरनेम के बजाय अपने गोत्र लिख दिए, साथ ही उन्होंने जैन पर निशान न लगाते हुए हिन्दू के चिन्ह पर निशान लगा दिया।कार्यक्रम में समाज के जैन युवा महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विकेश मेहता का उद्बोधन हुआ हुआ विकेश मेहता ने कहा कि जैन समाज के लोग आने वाले समय में सांसद विधायक एवं नगर परिषद के चुनाव में और पंचायती राज चुनाव में पूरी ताकत के साथ में देश में चुनाव लड़ेंगे। कार्यक्रम में सराक क्षेत्र के प्रतिनिधि भी उपस्थित हुए।
जिन्होंने बताया कि वे जैन धर्म को ही मानते हैं वहीं बंगाल से पोन्ड्रा समाज के प्रतिनिधि आए जिनका मानना है कि वह आचार्य भद्रबाहु की परम्परा से जैन है आज भी पूर्ण शाकाहारी हैं। अहिंसा परमो धर्म में विश्वास करते हैं। कार्यक्रम में आए अनेक वक्ताओं ने कहा कि सेव जैन सेव जैनिज्म हमारा मूल मंत्र बनना चाहिए। तभी वास्तविक जैन जनसंख्या समाज व सरकार के सामने आएगी। दिगंबर जैन महासभा के महामंत्री पवन गोधा राष्ट्रीय पदाधिकारी सुधांशु कासलीवाल इस कार्यक्रम में जैन समाज के राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात महाराष्ट्र तेलंगाना पश्चिम बंगाल कर्नाटक उत्तर प्रदेश समिति कई राज्यों के पदाधिकारी उपस्थित थे कार्यक्रम में दिगंबर श्वेतांबर समाज के सभी संस्थाओं के बड़े पदाधिकारी उद्योगपति एडवोकेट डॉक्टर या विशिष्ट प्रतिभागी भी आमंत्रित किया गया था।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


