Sunday, February 8, 2026

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केंद्रीय बजट 2026 से दिल्ली को हेल्थ बूस्ट: एम्स दिल्ली को 5,200 करोड़

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन और आयुष्मान भारत योजना जैसी केंद्रीय योजनाएं दिल्ली में भी लागू होती हैं।

नई दिल्ली, 02 फरवरी 2026 (UTN)। केंद्रीय बजट में यूं तो दिल्ली के लिए सीधे तौर पर अलग से स्वास्थ्य के लिए कोई प्रविधान नहीं किए जाते पर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन और आयुष्मान भारत योजना जैसी केंद्रीय योजनाएं दिल्ली में भी लागू होती हैं। ऐसे में एम्स दिल्ली, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मेडिकल शिक्षा विस्तार के प्रस्तावों से दिल्ली को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। एम्स दिल्ली जैसे केंद्रीय संस्थानों के अस्पतालों को मिला बजट दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करता। इसके अलावा केंद्र की प्रमुख योजनाओं और संस्थागत आवंटनों से राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलती दिख रही है।
एम्स दिल्ली को 5,200 करोड़
केंद्रीय बजट में एम्स दिल्ली के लिए 5,200 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है। अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, शोध कार्यों को बढ़ावा देने और मरीजों की बढ़ती संख्या को बेहतर ढंग से संभालने में किया जाएगा।
हर वर्ष बढ़ता रहा बजट
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं व मेडिकल रिसर्च को मजबूती मिलने की उम्मीद है। एम्स दिल्ली को वित्त वर्ष 2024-25 में 4,523 करोड़ और 2023-24 में 4,134.67 करोड़ मिला था। 2023-24 के मुकाबले 2024-25 में लगभग 397 करोड़ की वृद्धि की गई थी। लगातार बढ़ता बजट एम्स के लिए साधन क्षमता, उपकरण उन्नयन, विशेषज्ञ स्टाफ भर्ती, बेड और आइसीयू विस्तार तथा अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मदद करता है, एम्स दिल्ली देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां दिल्ली के साथ-साथ देशभर से गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं।
*इन अस्पतालों को भी मिला तगड़ा फंड*
सफदरजंग अस्पताल को 2,179.58 करोड़, राम मनोहर लोहिया अस्पताल को 1,458.26 करोड़, लेडी हार्डिंग एवं सुचेता कृपलानी अस्पताल को 800 करोड़, कलावती सरन चिल्ड्रेन अस्पताल के लिए 183.16 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के इन पांचों अस्पतालों को इस बार मिला कुल बजट लगभग 9,821 करोड़ है। जो पिछले वर्ष 2024-25 के 8,937 करोड़ से 884 करोड़ अधिक है। यह बढ़ोतरी दिल्ली के अस्पतालों की सेवाओं, उपकरणों, स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी।
*राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से दिल्ली को समर्थन*
केंद्रीय बजट 2026-27 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 37,227 करोड़ का प्रावधान रखा गया है, जो पिछली बार के लगभग 36,000 करोड़ से 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 1,227 करोड़ अधिक है। दिल्ली में जनसंख्या अधिक होने से रोग-भार (बीमार और बीमारियों की संख्या) तीव्रता से बढ़ रही है, इसलिए एनएचएम के फंड से टीकाकरण अभियानों, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे उपायों को मजबूती मिलेगी।
*जनता को सीधा लाभ मिलेगा*
विशेषकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मोहल्ला क्लीनिकों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन बेहतर होगा, निश्शुल्क जांच और रोग निगरानी ज्यादा सुदृढ़ होगी होगी। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
*मेडिकल सीटों में वृद्धि से पीजी सीटों में विस्तार की संभावना*
केंद्रीय बजट में अगले वर्ष 10,000 नई मेडिकल सीटें बढ़ाने और पांच वर्षों में कुल 75,000 सीटें जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसका सीधा लाभ दिल्ली के मेडिकल काॅलेज और एम्स जैसे केंद्रीय संस्थानों को मिलने की संभावना है, हालांकि काॅलेज-वार सीट संख्या अभी तय या जारी नहीं की गई है।। दिल्ली, जो पहले से ही मेडिकल शिक्षा और उपचार का बड़ा केंद्र है, वहां प्रशिक्षित डाक्टरों की संख्या बढ़ने से सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
*दिल्ली के प्रमुख लाभार्थी संस्थान*
*एम्स, नई दिल्ली:* सुपर-स्पेशियलिटी और पीजी सीटों में विस्तार की संभावना
*मौलाना आजाद मेडिकल काॅलेज (एमएएमसी):* एमबीबीएस और पीजी दोनों स्तर पर सीटें बढ़ने की संभावना, इससे जुड़े लोक नायक, जीबी पंत अस्पतालों को भी लाभ
*वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (सफदरजंग अस्पताल):* देश के सबसे बड़े सरकारी शिक्षण अस्पतालों में शामिल इस अस्पताल में क्लिनिकल पीजी सीटों में संभावित वृद्धि
*लेडी हार्डिंग मेडिकल काॅलेज:* महिला चिकित्सा शिक्षा और पीजी सीटों में विस्तार की संभावना
*आर्मी काॅलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसीएमएस), दिल्ली कैंट:* केंद्र सरकार की नीति के तहत सीमित लेकिन संभावित बढ़ोतरी
*मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा, दिल्ली बनेगी हब*
दिल्ली देश का प्रमुख मेडिकल हब है, जहां एम्स, बड़े सरकारी अस्पताल और नामी निजी अस्पताल मौजूद हैं। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से दिल्ली केवल देश का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में उभर सकती है।
*इससे दिल्ली को लाभ*
विदेशी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलने से दिल्ली में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि राजधानी में पहले से उन्नत अस्पताल और विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में निवेश बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय मरीजों की मांग बढ़ने से दिल्ली के अस्पतालों में नई तकनीक, अत्याधुनिक उपकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश तेज होगा। विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार कैंसर, हृदय रोग, आर्गन ट्रांसप्लांट, न्यूरोलाजी और आर्थोपेडिक्स जैसी सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का दायरा और मजबूत होगा। स्वास्थ्य रोजगार में इजाफा
डाॅक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दिल्ली की वैश्विक पहचान मजबूत होगी मेडिकल टूरिज्म से दिल्ली की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भरोसेमंद और किफायती उपचार केंद्र के रूप में और मजबूत होगी। सहायक क्षेत्रों को भी फायदा होटल, ट्रैवल, ट्रांसलेशन, फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेवाओं जैसे सेक्टरों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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केंद्रीय बजट 2026 से दिल्ली को हेल्थ बूस्ट: एम्स दिल्ली को 5,200 करोड़

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन और आयुष्मान भारत योजना जैसी केंद्रीय योजनाएं दिल्ली में भी लागू होती हैं।

नई दिल्ली, 02 फरवरी 2026 (UTN)। केंद्रीय बजट में यूं तो दिल्ली के लिए सीधे तौर पर अलग से स्वास्थ्य के लिए कोई प्रविधान नहीं किए जाते पर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन और आयुष्मान भारत योजना जैसी केंद्रीय योजनाएं दिल्ली में भी लागू होती हैं। ऐसे में एम्स दिल्ली, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मेडिकल शिक्षा विस्तार के प्रस्तावों से दिल्ली को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। एम्स दिल्ली जैसे केंद्रीय संस्थानों के अस्पतालों को मिला बजट दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करता। इसके अलावा केंद्र की प्रमुख योजनाओं और संस्थागत आवंटनों से राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलती दिख रही है।
एम्स दिल्ली को 5,200 करोड़
केंद्रीय बजट में एम्स दिल्ली के लिए 5,200 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है। अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, शोध कार्यों को बढ़ावा देने और मरीजों की बढ़ती संख्या को बेहतर ढंग से संभालने में किया जाएगा।
हर वर्ष बढ़ता रहा बजट
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं व मेडिकल रिसर्च को मजबूती मिलने की उम्मीद है। एम्स दिल्ली को वित्त वर्ष 2024-25 में 4,523 करोड़ और 2023-24 में 4,134.67 करोड़ मिला था। 2023-24 के मुकाबले 2024-25 में लगभग 397 करोड़ की वृद्धि की गई थी। लगातार बढ़ता बजट एम्स के लिए साधन क्षमता, उपकरण उन्नयन, विशेषज्ञ स्टाफ भर्ती, बेड और आइसीयू विस्तार तथा अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मदद करता है, एम्स दिल्ली देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां दिल्ली के साथ-साथ देशभर से गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं।
*इन अस्पतालों को भी मिला तगड़ा फंड*
सफदरजंग अस्पताल को 2,179.58 करोड़, राम मनोहर लोहिया अस्पताल को 1,458.26 करोड़, लेडी हार्डिंग एवं सुचेता कृपलानी अस्पताल को 800 करोड़, कलावती सरन चिल्ड्रेन अस्पताल के लिए 183.16 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के इन पांचों अस्पतालों को इस बार मिला कुल बजट लगभग 9,821 करोड़ है। जो पिछले वर्ष 2024-25 के 8,937 करोड़ से 884 करोड़ अधिक है। यह बढ़ोतरी दिल्ली के अस्पतालों की सेवाओं, उपकरणों, स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी।
*राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से दिल्ली को समर्थन*
केंद्रीय बजट 2026-27 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 37,227 करोड़ का प्रावधान रखा गया है, जो पिछली बार के लगभग 36,000 करोड़ से 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 1,227 करोड़ अधिक है। दिल्ली में जनसंख्या अधिक होने से रोग-भार (बीमार और बीमारियों की संख्या) तीव्रता से बढ़ रही है, इसलिए एनएचएम के फंड से टीकाकरण अभियानों, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे उपायों को मजबूती मिलेगी।
*जनता को सीधा लाभ मिलेगा*
विशेषकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मोहल्ला क्लीनिकों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन बेहतर होगा, निश्शुल्क जांच और रोग निगरानी ज्यादा सुदृढ़ होगी होगी। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
*मेडिकल सीटों में वृद्धि से पीजी सीटों में विस्तार की संभावना*
केंद्रीय बजट में अगले वर्ष 10,000 नई मेडिकल सीटें बढ़ाने और पांच वर्षों में कुल 75,000 सीटें जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसका सीधा लाभ दिल्ली के मेडिकल काॅलेज और एम्स जैसे केंद्रीय संस्थानों को मिलने की संभावना है, हालांकि काॅलेज-वार सीट संख्या अभी तय या जारी नहीं की गई है।। दिल्ली, जो पहले से ही मेडिकल शिक्षा और उपचार का बड़ा केंद्र है, वहां प्रशिक्षित डाक्टरों की संख्या बढ़ने से सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
*दिल्ली के प्रमुख लाभार्थी संस्थान*
*एम्स, नई दिल्ली:* सुपर-स्पेशियलिटी और पीजी सीटों में विस्तार की संभावना
*मौलाना आजाद मेडिकल काॅलेज (एमएएमसी):* एमबीबीएस और पीजी दोनों स्तर पर सीटें बढ़ने की संभावना, इससे जुड़े लोक नायक, जीबी पंत अस्पतालों को भी लाभ
*वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज (सफदरजंग अस्पताल):* देश के सबसे बड़े सरकारी शिक्षण अस्पतालों में शामिल इस अस्पताल में क्लिनिकल पीजी सीटों में संभावित वृद्धि
*लेडी हार्डिंग मेडिकल काॅलेज:* महिला चिकित्सा शिक्षा और पीजी सीटों में विस्तार की संभावना
*आर्मी काॅलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसीएमएस), दिल्ली कैंट:* केंद्र सरकार की नीति के तहत सीमित लेकिन संभावित बढ़ोतरी
*मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा, दिल्ली बनेगी हब*
दिल्ली देश का प्रमुख मेडिकल हब है, जहां एम्स, बड़े सरकारी अस्पताल और नामी निजी अस्पताल मौजूद हैं। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से दिल्ली केवल देश का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में उभर सकती है।
*इससे दिल्ली को लाभ*
विदेशी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलने से दिल्ली में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि राजधानी में पहले से उन्नत अस्पताल और विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में निवेश बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय मरीजों की मांग बढ़ने से दिल्ली के अस्पतालों में नई तकनीक, अत्याधुनिक उपकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश तेज होगा। विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार कैंसर, हृदय रोग, आर्गन ट्रांसप्लांट, न्यूरोलाजी और आर्थोपेडिक्स जैसी सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का दायरा और मजबूत होगा। स्वास्थ्य रोजगार में इजाफा
डाॅक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दिल्ली की वैश्विक पहचान मजबूत होगी मेडिकल टूरिज्म से दिल्ली की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भरोसेमंद और किफायती उपचार केंद्र के रूप में और मजबूत होगी। सहायक क्षेत्रों को भी फायदा होटल, ट्रैवल, ट्रांसलेशन, फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेवाओं जैसे सेक्टरों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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