नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा, सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर पाएगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं।
*पीएम मोदी का 2026 का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम*
उन्होंने आगे कहा, 2026 के शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जो भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए। जिस स्थान पर यह प्रदर्शनी लगी है वो भी अपने-आप में विशेष है। किला राय पिथौरा का यह स्थान भारत के गौरवशाली इतिहास की यशभूमि है।
*भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पाकर हम सभी धन्य*
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना… ये दोनों ही पड़ाव अपने-आप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को भी तबाह कर देती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ भी यही हुआ। गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने का प्रयास किया। भारत के लिए तो भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष… हमारे आराध्य का ही एक अंश है, हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है।
*’पूरी मानवता का है भगवान बुद्ध का मार्ग‘*
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध का ज्ञान, उनका दिखाया मार्ग… पूरी मानवता का है। यह भाव हमने बीते कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया। बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष जिस भी देश में गए, वहां आस्था और श्रद्धा का ज्वार उमड़ आया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


