नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025 (यूटीएन)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर, पानी और श्मशान सभी के लिए हैं, इनमें भेदभाव नहीं होना चाहिए. संघ प्रमुख ने इस दौरान अमेरिका से ट्रेड, धर्मांतरण, संघ के बारे में जानने समेत कई महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया. मोहन भागवत ने कहा, ‘हमारे हिंदुस्तान का प्रयोजन विश्व कल्याण है. दिखते सब अलग-अलग है, लेकिन सब एक हैं. दुनिया अपनेपन से चलती है, यह सौदे पर नहीं चल सकती है. धर्म की रक्षा करने से सृष्टि ठीक चलती है. क्योंकि जड़वाद बढ़ा और अति पर पहुंच गया, व्यक्तिवाद बढ़ा और अति पर पहुंच गया.’संघ प्रमुख ने कहा, ‘विकास अमर्यादित होता है तो दुनिया में खराबी होती है.
दुनिया में अशांति है, कलह है, कट्टरपन बढ़ गया है, वोकिज्म जैसे शब्द दुनिया के लिए बड़ा संकट है. धर्म यानी रिलीजन नहीं. धर्म में विविधता स्वीकार्य है.’मोहन भागवत ने कहा, ‘आज की दुनिया संबंधों को तरस रही है, लेकिन सबसे जहां संबंध माने जाते हैं वो देश भारत है. आज आर्थिक उन्नति के कारण गरीब और अमीरों में दूरी बढ़ रही है. इसको दूर करने के लिए चर्चाएं होती है लेकिन परिणाम बहुत नहीं आते. धर्म सब जगह जाना चाहिए उसके लिए कन्वर्शन की जरूरत नहीं.’ उन्होंने कहा, ‘भारत ने सदा अपने नुकसान की अनदेखी करते हुए जिन्होंने नुकसान किया उनको भी मदद की है. आज विश्व हमारी साख को मानता है, समाज हमारी बात मानता है. अब आगे का पड़ाव क्या है जो हम संघ में कर रहे हैं वो सारे समाज में हो, जो चरित्र निर्माण, देशभक्ति जगाना जैसे काम हैं.
आरएसएस चीफ ने कहा, ‘भारत में जितना बुरा दिखता है उससे 40 गुना ज्यादा समाज में अच्छा है. हमको समाज के कोने-कोने तक पहुंचना पड़ेगा, कोई व्यक्ति बाकी नहीं रहे, ऐसे कार्य का विस्तार हमको करना पड़ेगा. समाज के सभी वर्गों में और सभी स्तरों में जाना पड़ेगा. गरीब से नीचे से लेकर अमीर के ऊपर तक संघ को पहुंचना पड़ेगा. ये जल्दी से जल्दी करना पड़ेगा. जिससे सब लोग मिलकर समाज परिवर्तन के काम में लग जाएं. मोहन भागवत ने कहा, ‘बाहर से भी जो विचारधारा आई वह आक्रमण के कारण आई, यही के लोगों ने उनको स्वीकार किया, लेकिन हमारा मत तो सबको स्वीकार करने का है. जो दूरियां बनी है उसको पाटने के लिए दोनों तरफ से प्रयास की जरूरत है. ये सद्भावना और सकारात्मकता के लिए अत्यंत आवश्यक है, जिसे देश को राष्ट्रीय स्तर पर करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले पड़ोसी देशों के साथ हमको समाज जोड़ने का काम करना होगा. आज जो पड़ोसी देश हैं, वो पूर्व में अधिकांश भारत देश ही थे. लोग वहीं हैं. जो विरासत मिली है इसमें सबका विकास हो. पंथ संप्रदाय अलग होंगे रहने दीजिए, लेकिन समाज को जोड़ना होगा. संघ प्रमुख ने कहा, ‘पर्यावरण में इन तीन चीजों पर काम करना होगा. पहला पानी बचाओ, दूसरा सिंगल यूस प्लास्टिक हटाओ और तीसरा पेड़ लगाओ. इसके अलावा, सामाजिक समरसता को लेकर काम करना होगा. मनुष्य को लेकर हम जाती के बारे में सोचने लगते हैं. इसको मन से खत्म करना होगा.
मंदिर, पानी, श्मशान सबके लिए हैं, उसमें भेद नहीं होना चाहिए.’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख ने कहा, ‘भारत को आत्मनिर्भर होना जरूरी है. स्वदेशी की बात का मतलब विदेशों से संबंध नहीं होंगे ऐसा नहीं है. अंतरराष्ट्रीय संबंध और व्यापार चलते रहेंगे, लेकिन इसमें दबाव नहीं होना चाहिए बल्कि स्वेच्छा होनी चाहिए. मोहन भागवत ने कहा, ‘नींबू की शिकंजी पी सकते हैं तो कोका कोला और स्प्राइट क्यों चाहिए, घर पर अच्छा खाना खाओ बाहर से पिज्जा की क्या जरूरत है. जो अपने देश में है, उसको प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जो अपने पास नहीं उसके लिए विदेश से लें.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।