नई दिल्ली, 15 अगस्त 2025 (यूटीएन)। खेल के इतिहास में पहली बार भारत के खो-खो खिलाड़ी लाल किले पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाग लेंगे। स्वदेशी खेल की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता का जश्न मनाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जनवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित पहले वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद देश के 30 बेहतरीन खो-खो खिलाड़ियों को इस अवसर पर आमंत्रित किया है।
स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन में खो-खो की मौजूदगी यह भी दर्शाती है कि सरकार स्वदेशी खेलों को नई ऊंचाई पर ले जा रही है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खो-खो को एशियाई खेलों और 2036 ओलंपिक में शामिल करने की खुलकर वकालत की है। उन्होंने इसे खिलाड़ियों, महासंघों और खेल मंत्रालय के “सामूहिक प्रयास” का नतीजा बताया, जिसका उद्देश्य इस खेल की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना है। यह समारोह भारत की 2036 ओलंपिक बोली और 1936 के बर्लिन ओलंपिक में खो-खो के प्रदर्शन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है।
इन 30 खिलाड़ियों में से 15 इसी साल 29 नवंबर से होने वाले अल्टीमेट खो-खो (यूकेके) के नए सीज़न के प्लेयर ड्राफ्ट में शामिल होंगे। 2022 में शुरुआत के बाद से, यूकेके ने खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया (केकेएफआई) के साथ मिलकर खिलाड़ियों को एक संगठित पेशेवर मंच दिया है, जहां उन्हें नियमित उच्च-स्तरीय प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलती रही हैं। इसके आधुनिक प्रारूप, तेज़ खेल शैली और राष्ट्रीय प्रसारण ने इस खेल के प्रति जनता की रुचि को पुनर्जीवित किया है और पूरे देश में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया है। सीज़न 3 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे, जो इस खेल के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
इस अवसर पर प्रतीक वैकर ने कहा, “स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में आमंत्रित होना मेरे जीवन के सबसे गर्वपूर्ण पलों में से एक है। इस साल की शुरुआत में वर्ल्ड कप जीतना हमारे लिए ऐतिहासिक था, लेकिन देश से मिला यह सम्मान साबित करता है कि खो-खो को आखिरकार उसका हक मिल रहा है। अब यह खेल दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँच रहा है और यूकेके सीज़न 3 में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी शामिल होंगे, तो लगता है जैसे खो-खो उस वैश्विक मंच पर कदम रख रहा है, जिसका हम सभी ने सपना देखा था।
सम्मानित खिलाड़ियों में वर्ल्ड कप विजेता प्रतीक वैकर, रामजी कश्यप, सचिन भार्गो, सुयश गर्गटे, गोवथम एम.के., रोकसन खुमन, निखिल बी., पबनी साबर, आकाश बलियान, आदित्य गनपुले, सिवा रेड्डी, सुब्रमणि, मेहुल, अनिकेत पोटे और सुमन बर्मन शामिल हैं, जिनके शानदार प्रदर्शन ने इस खेल को देश और विदेश में नई गति और ऊर्जा दी है।
तेज़ रफ्तार, रणनीतिक गहराई और गहरी सांस्कृतिक जड़ों के साथ खो-खो अब एक स्कूल के खेल से विकसित होकर एक पेशेवर खेल बन चुका है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इस सीज़न में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी को इस खेल के व्यावसायिक विकास और ओलंपिक मान्यता, दोनों के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।