नई दिल्ली, 30 अगस्त 2025 (यूटीएन)। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बेड़े में 3 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं. पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने ये 3 बसें एम्स को कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के तहत दी हैं. इस तरह पहले से मिली हुई एक बस के साथ अब एम्स के पास कुल चार इलेक्ट्रिक बसें हो गई हैं जो अस्पताल के मरीजों के साथ-साथ स्टाफ को सर्विसेज देंगी.
इस दौरान पॉवरग्रिड की तरफ से मौजूद चेयरमैन और डायरेक्टर आर के त्यागी को एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने बताया कि एम्स दिल्ली शुरू से ही कार्बन डाई ऑक्साइड के स्तर को घटाने, कार्बन फुटप्रिंट और प्रदूषण को कम करने के लिए काफी कोशिशें कर रहा है. ऐसे में पावरग्रिड की यह सीएसआर पहल पर्यावरण को बचाने के लिए किए जा रहे एम्स के दृढनिश्चय के अनुरूप है और एम्स दिल्ली के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों का समर्थन करती है. ये इलेक्ट्रिक बसें एम्स परिसर के भीतर और बाहर पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सेवाएं प्रदान देंगी. जिससे यहां आने वाले मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही में सुधार होगा.

इस बारे में एम्स की ओर से बताया गया कि अस्पताल में पहले से ही मरीजों, परिजनों और एम्स कर्मचारियों की सुविधा के लिए इलेक्ट्रिक शटल चलती हैं. वहीं एक इलेक्ट्रिक बस भी पहले से मौजूद है, जो एम्स के ट्रॉमा सेंटर के अलावा विभिन्न विभागों और एम्स कैंपस के बाहर भी चलती है. अभी पॉवरग्रिड की तरफ से जो 3 बसें दी गई हैं वे भी एम्स परिसर के बाहर चलेंगी.
इन बसों को एम्स के विभिन्न सहयोगी केंद्रों जैसे एनसीआई झझ्झर या या सेटेलाइट सेंटरों जैसे बल्लभगढ़ और गाजियाबाद के लिए चलाया जाएगा. इसके अलावा एम्स की ओर से मेट्रो स्टेशनों तक फीडर बस सेवा चलाने को लेकर भी प्रस्ताव काफी पहले दिया गया है, ऐसे में संभव है कि ये बसें एम्स परिसर से मेट्रो स्टेशनों तक फीडर बस के रूप में भी चलाई जा सकती हैं. फिलहाल इनकी सर्विसेज पर फैसला होना बाकी है.
*एम्स ने 146.5 किलोग्राम की महिला को दिया नया जीवन*
एम्स के डॉक्टरों ने 44 वर्षीय एक महिला का सफल बेरियाट्रिक ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया है। महिला के 135 सेमी कद और 146.5 किलोग्राम वजन के साथ उनका बीएमआई 80.4 था, जो “सुपर-सुपर ओबेसिटी” श्रेणी में आता है। मोटापे की वजह से हार्ट, लिवर और किडनी प्रभावित हो गई थी। जिससे मरीज को सांस लेने की तकलीफ थी।
*सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था इलाज*
जानकारी के मुताबिक, मरीज का इलाज लगभग तीन महीने से सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था। मोटापे की सर्जरी के लिए उन्हें राममनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया। मरीज की हालत गंभीर होती देख वहां के डॉक्टरों ने एम्स रेफर कर दिया।
*शरीर के कई अंग थे प्रभावित*
मरीज को आईसीयू में भर्ती कर जांच की गई। पता चला कि महिला का हार्ट, लिवर, किडनी समेत मल्टी ऑर्गन प्रभावित हैं। जिससे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मरीज को लंबे समय से सांस लेने में मदद करने वाली मशीन पर रहना पड़ता था। एम्स में सर्जरी टीम का नेतृत्व डॉ. मंजूनाथ मरुति पोल ने किया।
*सर्जरी में लग गए घंटों*
उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को सर्जरी की गई। अमूमन मोटापे की सर्जरी लगभग एक घंटे में होती है। लेकिन इस मरीज के मल्टी ऑर्गन प्रभावित थे, जिससे तीन से ज्यादा घंटे लग गए। मरीज को निगरानी में रखा गया है। आने वाले महीनों में उनका वजन घटेगा, दिल और फेफड़ों की स्थिति बेहतर होगी और लिवर पर भी असर पड़ेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।