Saturday, August 30, 2025

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एम्स के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट मेट’ के जरिए छात्रों को तनाव मुक्त करने की तकनीक सीखेंगे काउंसलर

26 अगस्त से 30 अगस्त तक चलने वाले इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बोर्ड का सहयोग दिल्ली एम्स कर रहा है, प्रोजेक्ट मेट एम्स दिल्ली द्वारा विकसित एक किशोर कल्याण कार्यक्रम है।

नई दिल्ली, 27 अगस्त  2025  (यूटीएन)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल काउंसलर व वेलनेस शिक्षकों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य व तनाव से निपटने की तकनीक सिखाने की दिशा में कदम उठाया है। सीबीएसई ने मंगलवार से प्रोजेक्ट मेट (माइंड एक्टिवेशन थ्रू एजुकेशन) ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है।
*दिल्ली एम्स के सहयोग से पांच दिवसीय कार्यक्रम*
26 अगस्त से 30 अगस्त तक चलने वाले इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बोर्ड का सहयोग दिल्ली एम्स कर रहा है। प्रोजेक्ट मेट एम्स दिल्ली द्वारा विकसित एक किशोर कल्याण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर के सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लगभग पचास काउंसलर भाग ले रहे हैं।
यह कार्यक्रम मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान और संचार के क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इन सत्रों में स्वास्थ्य के मनोवैज्ञानिक मॉडल, पोषण, पारिवारिक और सामाजिक भूमिकाएं, चिंता से निपटने, परामर्श विधियों और डिजिटल कल्याण सहित कई विषयों को शामिल किया जाएगा।
*कार्यक्रम में क्या सिखाया जाएगा?*
इस अवसर पर सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह ने स्वास्थ्य और शिक्षा को समग्र तरीके से एकीकृत करने की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट मेट स्कूल काउंसलरों और शिक्षकों को छात्रों की जरूरतों को सार्थक तरीके से पूरा करने के लिए सही उपकरण प्रदान करता है। वहीं सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता ने कहा कि बोर्ड और एम्स की यह पहल छात्रों को चिंता, तनाव, अकेलेपन जैसी समस्याओं से निपटने में मददगार साबित होगी।
*यह प्रोजेक्ट आज की जरूरत*
इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में एम्स निदेशक प्रो. डॉ. एम श्रीनिवास, सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह, सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता, एम्स के डीन ऑफ एकेडेमिक्स प्रो. डॉ. के.के वर्मा और एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. नंद कुमार उपस्थित रहे। एम्स निदेशक ने कहा कि यह प्रोजेक्ट आज कल के छात्रों की जरूरत है।
वहीं एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. नंद कुमार ने जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य के एक हिस्से के रूप में सामान्यीकृत किया जाना चाहिए और प्रारंभिक स्कूल-आधारित परामर्श व्यापक विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण, पारिवारिक और सामाजिक भूमिकाएं, आनंद परामर्श जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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एम्स के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट मेट’ के जरिए छात्रों को तनाव मुक्त करने की तकनीक सीखेंगे काउंसलर

26 अगस्त से 30 अगस्त तक चलने वाले इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बोर्ड का सहयोग दिल्ली एम्स कर रहा है, प्रोजेक्ट मेट एम्स दिल्ली द्वारा विकसित एक किशोर कल्याण कार्यक्रम है।

नई दिल्ली, 27 अगस्त  2025  (यूटीएन)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल काउंसलर व वेलनेस शिक्षकों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य व तनाव से निपटने की तकनीक सिखाने की दिशा में कदम उठाया है। सीबीएसई ने मंगलवार से प्रोजेक्ट मेट (माइंड एक्टिवेशन थ्रू एजुकेशन) ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है।
*दिल्ली एम्स के सहयोग से पांच दिवसीय कार्यक्रम*
26 अगस्त से 30 अगस्त तक चलने वाले इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बोर्ड का सहयोग दिल्ली एम्स कर रहा है। प्रोजेक्ट मेट एम्स दिल्ली द्वारा विकसित एक किशोर कल्याण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर के सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लगभग पचास काउंसलर भाग ले रहे हैं।
यह कार्यक्रम मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान और संचार के क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इन सत्रों में स्वास्थ्य के मनोवैज्ञानिक मॉडल, पोषण, पारिवारिक और सामाजिक भूमिकाएं, चिंता से निपटने, परामर्श विधियों और डिजिटल कल्याण सहित कई विषयों को शामिल किया जाएगा।
*कार्यक्रम में क्या सिखाया जाएगा?*
इस अवसर पर सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह ने स्वास्थ्य और शिक्षा को समग्र तरीके से एकीकृत करने की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट मेट स्कूल काउंसलरों और शिक्षकों को छात्रों की जरूरतों को सार्थक तरीके से पूरा करने के लिए सही उपकरण प्रदान करता है। वहीं सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता ने कहा कि बोर्ड और एम्स की यह पहल छात्रों को चिंता, तनाव, अकेलेपन जैसी समस्याओं से निपटने में मददगार साबित होगी।
*यह प्रोजेक्ट आज की जरूरत*
इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में एम्स निदेशक प्रो. डॉ. एम श्रीनिवास, सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह, सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता, एम्स के डीन ऑफ एकेडेमिक्स प्रो. डॉ. के.के वर्मा और एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. नंद कुमार उपस्थित रहे। एम्स निदेशक ने कहा कि यह प्रोजेक्ट आज कल के छात्रों की जरूरत है।
वहीं एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. नंद कुमार ने जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य के एक हिस्से के रूप में सामान्यीकृत किया जाना चाहिए और प्रारंभिक स्कूल-आधारित परामर्श व्यापक विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण, पारिवारिक और सामाजिक भूमिकाएं, आनंद परामर्श जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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