मुंबई, 19 अगस्त 2025 (यूटीएन)। हरलीन कौर रेखी इस समय स्टार भारत के शो कामधेनु गौमाता में शीर्षक भूमिका कामधेनु देवी के रूप में नज़र आ रही हैं। प्रेम सागर और शिव सागर के बैनर सागर वर्ल्ड मल्टीमीडिया द्वारा निर्मित यह शो हाल ही में ऑन-एयर हुआ है। लंबे समय से इंडस्ट्री में काम करने के बाद आखिरकार हरलीन को उनका हक मिला है और वे इस मुख्य किरदार को निभाने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
भूमिका मिलने पर अपनी खुशी जताते हुए हरलीन कहती हैं, “मैंने इस रोल के लिए पिछले साल सितंबर में ऑडिशन दिया था, लेकिन उस समय बात नहीं बनी। करीब साढ़े तीन महीने बाद अचानक मुझे कॉल आया कि मुझे फ़ाइनल करना चाहते हैं। मैं हैरान रह गई। लुक टेस्ट के दौरान मन में बस यही ख्याल आ रहा था कि अब तो बस शूटिंग शुरू हो जाए। हमारी प्रोफेशन में कुछ भी पक्का नहीं होता, जब तक सेट पर न पहुँच जाओ।”
वह आगे कहती हैं, “जब मैं पहली बार प्रेम सागर सर से ऑफिस में मिली, तो तुरंत कनेक्ट हुआ। उन्होंने मुझे एक गुरु की तरह गाइड किया और अब हमारे बीच बहुत अच्छा रिश्ता बन गया है। इतने बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर यह मेरी पहली लीड भूमिका है। 14–15 साल काम करने के बाद मुझे ऐसा मौका मिला है।”
किरदार की तैयारी को लेकर हरलीन बताती हैं, “मैं थिएटर से हूँ और 10 साल से भी ज़्यादा रामलीला कर चुकी हूँ। इसलिए शुद्ध हिंदी पर मेरी पकड़ थी। लेकिन फिर भी मैंने गहराई से तैयारी की। मैंने प्रेम सर से पूरा स्टोरीबोर्ड माँगा और शिव सागर जी और क्रिएटिव अभिषेक जी ने मुझे 10–12 एपिसोड दिए जिन्हें मैंने अच्छे से पढ़ा।”
वह आगे कहती हैं, “मैंने अपने मेंटर्स और क्रिएटिव टीम के साथ बैठकर हर बारीकी को समझा। इतने मायने रखने वाली कहानी में लीड निभाना मेरे सालों के अनुभव का नतीजा है।”
मिथक पर आधारित किरदार निभाने में शारीरिक बदलाव और भाषा दोनों ही चुनौतीपूर्ण होते हैं। इस पर हरलीन कहती हैं, “शारीरिक बदलाव ज़रूरी है। हर रोल में एक जैसा नहीं दिखना चाहिए। अगर मैं मंदोदरी निभाऊँ तो वह सीता माँ से अलग दिखनी चाहिए। बॉडी लैंग्वेज, चाल-ढाल, कॉस्ट्यूम पहनने का तरीका—सब फर्क डालता है। कामधेनु गौमाता में तैयार होने में ही दो घंटे लगते थे—बाल, मेकअप, कॉस्ट्यूम, ज्वेलरी और आलता। वहीं भाषा के लिए शुद्ध हिंदी ज़रूरी है। थिएटर का अनुभव मेरे बहुत काम आया और जब भी कोई शब्द समझ में नहीं आता, मैं डायरेक्टर या टीम से पूछ लेती थी।”
वह यह भी कहती हैं कि reel और real ज़िंदगी का संतुलन बनाना ज़रूरी है। मेरा मानना है कि किरदार से मिली अच्छी बातें हमें अपनी ज़िंदगी में उतारनी चाहिए—जैसे शांति, दया या आध्यात्मिक शक्ति। लेकिन अगर आप कोई नकारात्मक किरदार कर रहे हो, तो सावधान रहना चाहिए कि उसका असर आपकी असल ज़िंदगी पर न पड़े। जिद्दी या गुस्सैल न बन जाएँ। भावनात्मक अनुशासन बहुत ज़रूरी है। हरलीन मुस्कुराते हुए कहती हैं, यह रोल मेरे लिए बहुत खास है और मैं चाहती हूँ कि दर्शकों तक इसका संदेश भी पहुँचे।
मुंबई-रिपोर्टर,(हितेश जैन)।